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अखिलेश ने जारी की 235 की सूची, शिवपाल ने भी अपने 68 मैदान में उतारे

फ़ैसल फ़रीद | Updated on: 29 December 2016, 23:02 IST
(फाइल फोटो )

इसे बगावत का तेवर कहा जाए या फिर दबाव की राजनीति लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिन भर चली सियासी उठा पटक के बाद आख़िरकार 235 विधानसभा सीटों से अपने कैंडिडेट घोषित कर दिए. इनमें 171 उम्मीदवार उन सीटों से हैं जिन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर 2012 में जीत दर्ज की थी. इसके अलावा 64 उम्मीदवार ऐसी सीटों से हैं जिनपर सपा का कब्ज़ा नहीं है.

उम्मीद के मुताबिक़ इस लिस्ट में ऐसे नाम शामिल हैं जो कल मुलायम सिंह यादव द्वारा जारी सूची में जगह नहीं पा सके थे. कई शिवपाल यादव के समर्थक इस सूची में नहीं हैं. अखिलेश के कार्यालय 'जनेश्वर मिश्र लोहिया के लोग ट्रस्ट' ने बताया है कि बाक़ी सीटों पर भी उम्मीदवार जल्दी घोषित कर दिए जाएंगे. इस लिस्ट पर हालांकि किसी के दस्तख़त नहीं हैं.

मुलायम सिंह की लिस्ट आने के बाद जिन तीन मंत्रियों अरविन्द सिंह गोप, पवन पाण्डेय और रामगोविंद चौधरी पर रार छिड़ी थी, अखिलेश ने इन्हें भी अपनी सूची में शामिल कर उम्मीदवार घोषित कर दिया है. 

शिवपाल समर्थक पूर्व मंत्री जंगीपुर से ओमप्रकाश सिंह, फेफना से अम्बिका चौधरी को अखिलेश की लिस्ट में जगह नहीं मिली है. अखिलेश इन्हें पहले भी मंत्री पद से बर्ख़ास्त कर चुके हैं. अतुल प्रधान भी सरधना से टिकट पा गए हैं.

आर-पार की लड़ाई?

बात अब किसको टिकट मिल रहा है उसकी नहीं है क्योंकि अभी भी ये कहना जल्दबाज़ी है कि ये टिकट और सूची कितने दिन टिकेगी. ज़रूरी बात यह है कि क्या अखिलेश यादव अब आर-पार के मूड में हैं? कई दिनों से चल रहे घमासान का पटाक्षेप क्या वो अपना अलग गुट या दल बना कर करेंगे? फिलहाल हालात तो इसी तरफ इशारा कर रहे हैं लेकिन समाजवादियों का कोई भरोसा भी नहीं किया जा सकता.

देखना यह भी होगा कि क्या सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव अब अपनी आंख के सामने 25 साल पहले बनाई गयी अपनी पार्टी को टूटता हुए देखेंगे? सपा भी आखिर में जनता दल की राह पर चल पड़ी है.

कल सुबह इस बात का भी फैसला होगा कि बेटा या भतीजा किसका पलड़ा मुलायम की नज़र में भारी है. मुलायम अपने बेटे की बगावत बर्दाश्त करेंगे या फिर अब किस तरह समझौते की गुंजाइश बचेगी.

इधर कुछ दिनों के घटनाक्रम इसी ओर इशारा कर रहे थे लेकिन कोई अधिकृत सूचना नहीं आ रही थी. बात सिर्फ टिकट की नहीं है. टिकटों के कट जाने से तो एक बहाना मिल गया अखिलेश को और आखिर में उन्होंने ऐसा कदम उठा लिया जिससे अब सपा, मुलायम और शिवपाल सब बैकफुट पर आ गए हैं.

समाजवादी पार्टी में फिलहाल फैमिली ड्रामा इतना हो चुका है कि अगर अब कोई समझौता होता है तो भी पार्टी पर हर कोई हंसेगा. चुनाव जीतना और हारना अब दूसरे पायदान का मुद्दा बन गया है. अब तो लड़ाई वर्चस्व की ज़ोर पकड़ चुकी है. पार्टी बचाने का अब एक ही रास्ता है कि दोनों गुटों में से किसी एक को झुकना ही पड़ेगा. और इस राजनितिक जंग में जो झुकेगा, उसका खेल कमोबेश ख़त्म माना जाएगा.

मगर कोई ख़ुद को इस तरह ख़त्म भी नहीं करना चाहेगा. क्या पता कि थोड़ी देर में शिवपाल यादव बाक़ी बचे 78 उम्मीदवारों की भी लिस्ट ना जारी कर दें. अपने वजूद के लिए लड़ाई अब आर-पार की ज़रूरी हो गई है. तलवार मयान से निकलने के बाद बिना लहू पिए अन्दर नहीं जाती है.

लिस्ट पलटी

सरसरी तौर पर अखिलेश की लिस्ट के हिसाब से जो मुख्य नाम बदले गए हैं उनमें नगीना से मौजूदा विधायक मनोज पारस, मुरादाबाद के पांचो सिटिंग विधायक शामिल हैं. अमरोहा से शिवपाल समर्थक माइकल चंद्रा की जगह जगराम सिंह हैं. अखिलेश ने मंत्री हसन अख्तर को टिकट दिया है जिनका टिकट शिवपाल की लिस्ट में होल्ड पर था. अलीगढ की छर्रा विधानसभा से विधायक राकेश कुमार का नाम है जिनका टिकट कट गया था. मैनपुरी से दो मौजूदा विधायकों का टिकट कट गया था. अखिलेश ने उनमें से एक अलोक कुमार शाक्य को भोगांव से और बृजेश कुमार कठेरिया को किशनी से टिकट दिया है. 

ऐसे ही बरेली की दो सीटें जिन पर सिटिंग विधायक का टिकट कटा था, अखिलेश ने उन्हें ही लड़ाने का फैसला किया है. सिधौली से विधायक मनीष रावत, मलीहाबाद से इन्दल रावत, पट्टी से राम सिंह, टांडा से अजीमुल हक पहलवान, जैदपुर से रामगोपाल रावत, घोरावाल से रमेश दुबे का टिकट बहाल कर दिया है. इन सब का टिकट शिवपाल की सूची में कट गया था.

कांग्रेस के विधायक कौशल किशोर मुन्ना को नौतनवा से अखिलेश ने उम्मीदवार बनाया है.

शिवपाल ने जारी की बाकियों की लिस्ट

अखिलेश यादव की सूची जारी होने के बाद देर रात चले घटनाक्रम में शिवपाल यादव की मुलाकात मुलायम सिंह यादव से हुई. इस मुलाकात के बाद शिवपाल यादव ने बाकी बची 78 सीटों में से 68 पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जो मुलायम सिंह द्वारा घोषित सूची में होल्ड पर रखे गए थे.

लिहाजा संकेत यही हैं कि शिवपाल यादव को मुलायम सिंह का संरक्षण प्राप्त है और वे अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे. ऐसे में यह लड़ाई किसी मुकाम तक पहुंचने की बजाय और जटिल होती दिख रही है.

First published: 29 December 2016, 23:02 IST
 
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