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सहारनपुर में अमित शाह का साफ़ संदेश: यूपी में भाजपा बनाम मुसलमान

आदित्य मेनन | Updated on: 7 November 2016, 18:41 IST

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सहारनपुर में पार्टी की परिवर्तन रैली का आगाज़ कर दिया. मगर यहां उनके जोशीले भाषण से यह साफ़ हो गया कि वह यूपी में बदलाव और विकास की जो बात वह कह रहे हैं, वह सिर्फ छलावा है. इस चुनाव में भाजपा की मुख्य रणनीति सूबे के मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर निशाना साधकर वोटों के लिए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करना है.

जोड़-तोड़

भाजपा ने अपना चुनावी अभियान शुरू करने के लिए पश्चिमी उप्र के सहारनपुर ज़िले को चुना. इस जिले में मुसलमानों की आबादी 41 फीसदी है. देवबंद का दारुल उलूम, जिसकी विश्व में पहचान है और जिसका भारतीय मुसलमानों पर बड़ा प्रभाव है, वह भी इसी ज़िले में है.

यह वही ज़िला है जहां नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के बमुश्किल दो महीने के भीतर जुलाई 2014 में साम्प्रदायिक हिंसा हुई थी. भाजपा इस ज़िले में ख़ासतौर से आंखें गड़ाए हुए है. प्रधानमंत्री ने इस साल मई में जब अपने कार्यकाल के दो साल पूरे किए थे, तब जश्न मनाने के लिए उन्होंने इसी ज़िले को चुना था.

टारगेट

अमित शाह ने अपने भाषण में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के कुछ ख़ास नेताओं को जान-बूझकर निशाना बनाया. उन्होंने पूछा, 'मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद को विकास पुरुष कहते हैं. वह कहते थे कि जब तक वह मुख्यमंत्री हैं, तब तक अफज़ाल अंसारी और मुख्तार अंसारी जैसे नेता समाजवादी पार्टी में शामिल नहीं किए जाएंगे. 

आज यूपी के लोग आपसे पूछना चाहते हैं कि अफजल अंसारी आपकी पार्टी में भरे पड़े हैं और आप भी अभी तक मुख्यमंत्री बने हुए हैं. और सिर्फ़ अफजल अंसारी का मामला नहीं है. अतीक अहमद के बारे में क्या कहेंगे, आजम खान के बारे में क्या ख्याल है? समाजवादी पार्टी का पूरा कुनबा अतीक, आज़म, अफजल और मुख्तार जैसे लोगों से भरा पड़ा है.

समाजवादी पार्टी का पूरा अंदरूनी कुनबा अतीक, आज़म, अफजल और मुख्तार जैसे लोगों से अटा पड़ा है.

इन नामों से साफतौर पर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अमित शाह का संदर्भ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं के बारे में नहीं था. अगर उन्हें सिर्फ़ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं का हवाला देना होता तो वह रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया का ज़िक्र भी करते. उनपर बाक़ियों से ज़्यादा मुकदमें हैं. वैसे मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद की पृष्ठभूमि आपराधिक है लेकिन आज़म खान के बारे में यही बात नहीं कही जा सकती. 

मगर अमित शाह ने जिन सभी नेताओं का नाम लिया, उनमें एक समानता ज़रूर है. वो यह कि सभी मुस्लिम हैं. ऐसे में यह साफ है कि उनका निशाना मुस्लिम ही थे. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को भी निशाने पर लिया है. 

उन्होंने कहा कि बहनजी (मायावती) कहती हैं कि वह सपा से उप्र को मुक्ति दिलाएंगी. उन्होंने कहा कि अगर यहां अतीक, आजम, अफजल हैं तो वहां भी (बसपा) में नसीमुद्दीन (सिद्दीकी) हैं. आप भागकर कहां जाएंगे. एक बाजू कुआं है तो दूसरे बाजू खाई है. 

मगर नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी बसपा के बड़े मुस्लिम नेता हैं. बेशक़ वह भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं लेकिन उनकी पहचान आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेता की नहीं है.

शाह ने आगे कहा कि मगर हमारे यहां ऐसा कोई नहीं है. भाजपा में कोई गुंडा नहीं है. भाजपा में गुंडों के लिए कोई जगह नहीं है. केवल भाजपा ही उप्र को गुंडों से मुक्त कर सकती है.

हक़ीक़त तो यह है कि सिद्दीक़ी और आजम खान की मुक़ाबले कई गैर-मुस्लिम नेता हैं जिन पर गुंडा होने का ठप्पा है. इनमें से राजा भइया, डीपी यादव, अमरमणि त्रिपाठी जैसे नाम गिनाए जा सकते हैं. लेकिन अमित शाह ने इनमें से किसी के भी नाम का ज़िक्र नहीं किया.

बहरहाल, अगर शाह वाकई में चाहते हैं कि उप्र गुंडा मुक्त हो तो इसकी शुरुआत उन्हें अपनी खुद की पार्टी के यूपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य से करनी चाहिए. केशव मौर्य पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. वह हत्य़ा के एक मामले मुख्य अभियुक्त हैं। इसके अलावा उन पर सांप्रदायिक उन्माद फैलाने, डराने-धमकाने, धार्मिक भावनाएं भड़काने और साज़िश करने समेत कई मामले दर्ज हैं.

मौर्य का बैकग्राउंड देखने के बाद लगता है कि उप्र को गुंडामुक्त करने की शाह को चिन्ता ही नहीं है.

खतरा

कैराना से हिन्दुओं के कथित पलायन पर उन्होंने शाह ने कहा कि पश्चिमी उप्र के लोगों पर जबरिया इलाक़ा छोड़ने का दवाब बनाया जा रहा है. इसके लिए समाजवादी पार्टी जिम्मेदार है. अगर भाजपा उप्र में सत्ता में आती है तो किसी को भी अपना गांव छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा. जो लोग गांव छोड़ने के लिए दबाव डाल रहे हैं, उन्हें बेशक़ गांव छोड़ने पड़ेंगे. 

शाह ने सर्जिकल स्ट्राइक का भी श्रेय लिया और कहा कि भाजपा ने इसे कर दिखाया है. उन्होंने भारतीय सेना का नाम नहीं लिया. उन्होंने कहा कि जो कोई भी हमें ललकारेगा, हमें मालुम है कि उसका जवाब कैसे दिया जाता है. ईंट का जवाब पत्थर से और गोली का जवाब गोले से दिया जाएगा.  

First published: 7 November 2016, 18:41 IST
 
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