Home » उत्तर प्रदेश चुनाव » Azam Khan on cycle symbol: Now the ball is in Election Commission's Court and we will have to wait for decision
 

आज़म को अब भी उम्मीद, कहा- धुंध है लेकिन अंधेरा नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 6:42 IST
(एएनआई)

समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान के बीच जहां साफ़ तौर पर दो खेमे बंट गए हैं, वहीं पार्टी में एक कद्दावर शख्स ऐसा है, जो अभी किसी पक्ष का पैरोकार नहीं है. जी हां यह शख्स हैं आजम खान जो किसी भी सूरत में समाजवादी पार्टी में बंटवारा नहीं चाहते हैं. 

आज़म 31 दिसंबर से लगातार मुलायम और अखिलेश के बीच पुल का काम कर रहे हैं. विवाद के बीच जब तमाम नेता बयानबाजी में मशगूल रहे, उस दौरान मुलायम के आवास से लेकर अखिलेश के घर तक लगातार आजम खान ने दौड़ लगाई. मकसद ये कि किसी तरह सपा टूटने न पाए. 

'हमेशा पुल की तरह काम किया'

शायद यही वजह है कि आज़म ख़ान की उम्मीद अब भी टूटी नहीं है. कहते हैं कि उम्मीद पर दुनिया कायम है. इस फलसफे को इस वक़्त आजम गांठ बांधकर चल रहे हैं. लिहाजा जब सुलह के सारे रास्ते बंद दिखाई दे रहे हैं, तब भी आजम को रोशनी की किरण नजर आ रही है. 

आजम से अखिलेश और मुलायम के बीच चल रही खेमेबाजी पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने जवाब दिया, "मैंने हमेशा एक पुल की तरह काम किया है. धुंध है लेकिन अंधेरा नहीं है." इससे पहले भी आजम कह चुके हैं कि समाजवादी पार्टी को लेकर मुस्लिम काफी फिक्रमंद हैं. 

'चुनाव आयोग के पाले में गेंद'

आजम से जब सोमवार के घटनाक्रम पर पूछा गया, तो उन्होंने मामला चुनाव आयोग के पास होने का हवाला दिया. साइकिल का चुनाव चिह्न किसको मिलेगा, जब आजम से इस सवाल का जवाब मांगा गया, तो उन्होंने कहा, "अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है और हमें उसके फैसले का इंतज़ार करना होगा." 

सोमवार को मुलायम सिंह यादव और रामगोपाल यादव दोनों ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की. मुलायम ने मीडिया से बातचीत में रामगोपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके और अखिलेश के बीच कोई विवाद नहीं है, पूरे घमासान के पीछे एक आदमी है. 

वहीं रामगोपाल यादव ने कहा कि चुनाव आयोग से उन्होंने मांग की है कि विवाद का निपटारा जल्द कर दिया जाए, क्योंकि उत्तर प्रदेश में जल्द ही विधानसभा चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है.

First published: 9 January 2017, 3:47 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी