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आजम का सपा पर तंज- 'बेभरोसा सियासी ताकत के साथी नहीं बनना चाहते मुसलमान'

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 October 2016, 10:59 IST
(फाइल फोटो)
QUICK PILL
  • आजम खान ने समाजवादी पार्टी के पारिवारिक घमासान पर प्रेस नोट के जरिए इशारों में निशाना साधा है.
  • आजम ने लिखा है कि सियासी हालात से सबसे ज्यादा मुसलमान परेशान हैं और उनका सपना टूट रहा है. 
  • आजम ने कहा है कि मुस्लिमों का फैसला ऐसा होगा जिससे यह तय हो सके कि भाजपा सरकार यूपी में ना बनने पाए.

समाजवादी पार्टी में चल रहे पारिवारिक घमासान के बीच कैबिनेट मंत्री आजम खान ने अपनी ही पार्टी को इशारों-इशारों में कठघरे में खड़ा किया है. वरिष्ठ सपा नेता आजम खान ने एक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा है कि मुस्लिम ऐसी पार्टी के साथ नहीं जानना चाहते, जहां अविश्वास का माहौल है.

सियासी जानकार मानते हैं कि सपा में चल रहे संग्राम की वजह से विधानसभा चुनाव में उसका मुस्लिम वोट बैंक खिसक सकता है. आजम खान ने चिट्ठी में लिखा है कि मुसलमान हारी हुई लड़ाई नहीं लड़ना चाहते.

आजम ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के मुसलमान राज्य में चल रहे सियासी घमासान से काफी परेशान हैं. आजम ने प्रेस नोट में लिखा है कि मुस्लिम समाज की सियासी हालात पर पैनी नजर है. उनकी चिट्ठी में क्या कुछ है आपको बताते हैं:

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'पानी का बुलबुला नहीं है मुसलमान'

मोहम्मद आजम खान

मंत्री, संसदीय कार्य, नगर विकास

                                     इस समय प्रदेश और देश के राजनैतिक क्रम में सबसे ज्यादा मुसलमान परेशान है, क्योंकि उनको अपना भविष्य बहुत अंधकारमय नजर आ रहा है. उनका टूटता-बिखरता सपना सबके सामने है.

खेद की बात है कि बिना कुछ किए सभी ने मुस्लिम वोटों को अपनी जागीर समझ रखा है. ना तो मुसलमान पानी का बुलबुला है. और ना ही थाली का बैंगन है, जिसे कहीं भी लुढ़का दिया जाए. मुसलमानों की हालात पर पैनी नज़र है औऱ फैसला लेने में काफी समय है. फैसला अवश्य ही ऐसा होगा जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में ना बन सके.

मुसलमानों का बुद्धिजीवी वर्ग और स्वयं मुसलमान अपना अच्छा-बुरा भली प्रकार से जानते हैं. मुसलमानों मुद्दों पर तथा मजबूत राजनैतिक पकड़ वाले दल या व्यक्तित्व की ओर भी अपनी नजर जमाए हुए है.

मुस्लिम लीडरशिप तथा स्वयं मुसलमान भी सही मायनों में सेकुलर हिंदुओं के साथ ही चलना चाहते हैं और ना ही बेभरोसा राजनैतिक ताकत के सहयोगी बनना चाहते हैं.

मोहम्मद आजम खां,

26-10-2016

First published: 27 October 2016, 10:59 IST
 
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