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आज़मगढ़: चार चरण बीतने के बाद भी मुलायम सिंह अपने ही गढ़ से दूर क्यों है?

वीरेंद्र नाथ भट्ट | Updated on: 25 February 2017, 10:58 IST
कैच न्यूज़

आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी के विधान सभा चुनाव में पार्टी और वहां की जनता अपने सांसद मुलायम सिंह यादव का बेसब्री से इंतज़ार कर रही है. जिले में अटकलों का बाज़ार गर्म है क्योंकि अब मुलायम सिंह की जगह उनके बेटे अखिलेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

विधान सभा चुनाव का चौथा चरण का चुनाव 23 फरवरी को पूरा होने के साथ 403 विधान सभा सीटों में से 262 सीटों का चुनाव पूरा हो जायगा लेकिन मुलायम सिंह ने अब तक केवल तीन चुनावी सभाएं की हैं. दो अपने छोटे भाई शिवपाल यादव के समर्थन में इटावा के जसवंत नगर में और एक लखनऊ में अपनी छोटी बहु अपर्णा यादव के पक्ष में जो लखनऊ कैंट विधान सभा सीट से उमीदवार है.

आजमगढ़ में छठे चरण में 4 मार्च को मतदान होना है. 2014 में 63,000 से अधिक मतों से मुलायम सिंह आजमगढ़ से सांसद निर्वाचित हुए थे और सांसद बनने के बाद मुलायम सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र का केवल एक बार दौरा किया है. पिछले वर्ष छह अक्टूबर को आजमगढ़ से मुलायम ने पार्टी के चुनाव प्रचार का श्री गणेश करने की घोषणा की थी लेकिन पार्टी और परिवार में विवाद के चलते रैली अंतिम क्षणों में रद्द कर दी गयी.

मुलायम कब आएंगे

समाजवादी पार्टी के आजमगढ़ के जिला अध्यक्ष हवलदार सिंह के अनुसार, 'पार्टी तय करेगी कि मुलायम सिंह कब आयंगे, जिला इकाई की ओर से प्रदेश अध्यक्ष को निवेदन भेजा जा चुका है लेकिन उत्तर नहीं मिला है'.

हवलदार यादव ने कहा कि मुलायम का अपने क्षेत्र में ना आने में कुछ भी असामान्य नहीं है क्योंकि कांग्रेस की तरह सपा में भी दुसरी पंक्ति ने नेता अब सक्षम हो गए हैं और चुनाव प्रचार की कमान बखूबी संभाल रहे हैं. सोनिया गांधी भी तो प्रचार नहीं कर रही हैं क्योंकि राहुल गांधी अब पार्टी का नेतृत्व करने में सक्षम हो गए हैं.

2012 के विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जिले की दस सीटों में नौ पर विजय हासिल कर जिले में अपना परचम लहाराया था एक सीट पर बसपा को विजय मिली थी.

आजमगढ़ के एक डिग्री कॉलेज के राजनीती शास्त्र के प्रोफेसर सुधीर कुमार कहते हैं, 'अब मुलायम सिंह अपने क्षेत्र में बेगाने हो गए हैं. अब केवल जिले में उनकी जाति के बुजुर्गों में ही उनके लिए कुछ सहानभूति शेष है. यदि मुलायम सिंह आजमगढ़ आते हैं तो थोड़ा फर्क पड़ सकता है लेकिन कुछ क्षेत्रों में झटका भी लग सकता है क्योंकि जितने समर्थन की उनको उम्मीद है उतना समर्थन अब शायद आजमगढ़ में ना मिले.'

आजमगढ़ सपा की चुनौती

गौरतलब है कि मुलायम सिंह यादव 1993 के बाद से लगातार अपने चुनाव अभियान का श्रीगणेश आजगमढ़ से करते आए हैं. इस लिहाज से यह पहला चुनाव है जब मुलायम सिंह पूरे चुनाव के दौरान आजमगढ़ से विरत हैं.

आजमगढ़ सपा के लिए लिए एक उम्मीद से ज्यादा इस बार एक चुनौती है. 2012 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की 10 में से 9 विधानसभा सीटें सपा ने जीती थी. एकमात्र मुबारकपुर विधानसभा सीट बसपा के खाते में गई थी जबकि भाजपा का पूरे जिले से सफाया हो गया था. इस बार अगर अखिलेश यादव को दोबारा से उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी करनी है तो 2012 के उस आंकड़े को बनाए रखना बहुत जरूरी होगा.

पिता मुलायम सिंह की चुनाव से दूरी, परिवार का झगड़ा और पांच साल की एंटी इंकंबेंसी के बीच यह सब संभव हो सकेगा? कहना मुश्किल है.

First published: 23 February 2017, 8:09 IST
 
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