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बनारस: आधी रात में मदनपुरा, नई सड़क पर जारी चुनावी चकल्लस

आवेश तिवारी | Updated on: 7 March 2017, 12:34 IST
कैच न्यूज़

लोग कहते हैं बंबई कभी सोती नहीं, उत्तर प्रदेश में बनारस के कुछ हिस्से भी हमेशा जगते रहते हैं. सुबह की तर्ज़ पर रात में भी यहां एक दुनिया रची-बसी है. चौक-चौराहों पर गप्प करते हुए लोग मिलेंगे. वो दुकाने भी मिलेंगी जो बमुश्किल बंद होती हैं. दरअसल यह जागा हुआ बनारस उन बुनकरों के मुहल्ले हैं, जिनके ताने-बाने की वजह से बनारस और यहां की साड़ियां दुनिया भर में मशहूर हैं.

रात के एक बजे हम बनारस के मदनपुरा इलाके में हैं. दीवारों पर माफिया डान मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी की अपील के पोस्टर हैं. इक्का-दुक्का दूसरी पार्टियों के नेताओं के भी पोस्टर हैं. अफ़जाल अंसारी ने बजरडीहा इलाके में एक सभा की थी जिसमें बुनकरों को बुलाया गया था. पता चलता है कि भारी संख्या मे मुसलमान अफजाल अंसारी की सभा में गए भी थे. बनारस की आठों विधानसभाओं में मुस्लिम वोटों का खास महत्व है. यहां के मुस्लिम वोटरों में भी 60 फीसदी से ज्यादा अंसारी हैं जिनके बारे में माना जाता है कि इनका वोट एकतरफा पड़ता है.

हम बोल्ड (Bold) नामक चाय की दुकान पर बैठे नाजिम अंसारी से पूछते हैं कि क्या आप लोगों ने तय कर लिया है? तो कई जवाब एक साथ मिलता है कि अभी कुछ नहीं तय किया गया है? धंधे का हाल पूछते हैं तो नाजिम कहते हैं कि नोटबंदी ने बनारस में बुनकरी के धंधे को चौपट कर दिया है हम अभी तक नहीं उबर पाए हैं. एक दशक पहले की तुलना में साड़ियों का काम दस फीसदी रह गया है.

विकास की भूख पलायन का दंश

बनारस के बुनकरों और साड़ी के कारोबारियों में बनारस का विकास न होने को लेकर बेहद नाराजगी है. गोइल अली बताते हैं, 'बनारस में सड़कों की खुदाई के अलावा कोई काम नहीं हुआ है.' हमने अखिलेश यादव का जिक्र किया कि वे कहते हैं हम बनारस को 24 घंटे बिजली दे रहे हैं. जवाब मिलता है केवल पिछले 15 दिन से दे रहे हैं. चाय की दूकान पर बैठे लोग एकसुर से सहमत हैं कि अभी उन्होंने वोट देने का तय नहीं किया है.

लोगों को टीस है कि बनारसियत पहले से कम हुई है इसकी वजह भी बनारसी साड़ी है. एक दूसरी आवाज आती है कि 15 हजार से ज्यादा मुसलमानों का पलायन हुआ है अखिलेश सरकार ने कागज़ पर चाहे जो किया हो लेकिन वास्तविक जमीन पर कुछ नहीं किया. हम पूछते हैं आप लोग मतदान करेंगे? इसका जवाब व्यंग्य में छिपा होता है- मोदी को करेंगे.

मोदी के शहर में मोदी की बातें

थोड़ी दूर हम आगे बढ़ते हैं. कुछ लोग चुनावी गप्पबाजी कर रहे हैं. आपके इलाके में क्या विकास हुआ है? इस सवाल का जवाब मिलता है हम लोगों के घर में सीवर का गन्दा पानी आता है, गली की हालत आप देख ही रहे हैं. हालांकि लोग मानते हैं कि धर्म के आधार पर विकास में भेदभाव नहीं होता है.

लोगों का कहना है कि टीवी देखो तो लगता है कि अखिलेश यादव ने विकास किया है ऐसे नहीं. एक आवाज आती है कि रामनगर का पुल कौन बनवा रहा है अखिलेश यादव की सेन्ट्रल गवर्नमेंट? हमने बताया कि अखिलेश, तो जवाब मिलता हैं पांच साल पहले जितना बना था आज भी उतना ही बना है, यह है विकास.

बताया जाता है कि मुसलमानों का वोट थोड़ा दुविधा में है. अगला सवाल है मोदी ने बनारस को क्या दिया है? अनवर नाम के एक सज्जन कहते हैं, मोदी ने बनारस को जागरूकता दी है, कम से कम यह एहसास दिया है कि हमारे पास जो अधिकार है उसे कहां इस्तेमाल करें. यहां भी नोटबंदी को लेकर नाराजगी है, लोग उससे हुए पलायन को लेकर बेहद दुखी है. कहा जाता है कि धंधा ख़त्म हो गया.

बसपा और मुसलमान 

बनारस का नई सड़क खुदरा कपड़ों का बड़ा बाजार है यह बनारस का सर्वाधिक व्यस्ततम इलाका है. एक चौराहे पर कई युवा बैठे मिलते हैं. हम पूछते हैं इन चुनावों में मुद्दा क्या है. जवाब मिलता है विकास का मुद्दा है, विकास किसने किया यह भी मुद्दा है. पूछते हैं बनारस को मोदी ने क्या दिया है? तो जवाब मिलता है कि शहर में जाम की समस्या और अतिक्रमण को लेकर कुछ न हुआ. कुछ लोग बताते हैं, मोदी के सांसद होने से शहर का हाल और बुरा हो गया पूरी सड़कें खोद दी गई हैं.

सड़क की ओर इशारा करके लोग बताने लगे, यह क्योटो है, कांग्रेस ने 27 साल पहले जो विकास किया, वही विकास भर हुआ है बाकी कुछ नहीं हुआ है? लोग कहते हैं कि बसपा ने कभी मुसलामानों को गले नहीं लगाया सिर्फ वोटबैंक समझा. मायावती जी ने बगल में नहीं बैठाया. बनारस की जगह गोरखपुर में एम्स बनाने को लेकर भी लोग दुखी हैं. एक सज्जन कहते हैं कि नेताओं ने जुमलेबाजी के अलावा कुछ नहीं किया गया, जबकि बनारस में तीन विधायक और मेयर भी भाजपा के हैं. 

First published: 7 March 2017, 7:42 IST
 
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