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भाजपा की पहली सूची और बाहरी बनाम भीतरी की कशमकश

अतुल चंद्रा | Updated on: 17 January 2017, 7:50 IST
(फ़ाइल फोटो )

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. उत्तर प्रदेश से पार्टी के प्रमुख उम्मीदवारों में प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा के नाम शामिल हैं.

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति के सचिव जेपी नड्डा ने सोमवार को उत्तराखंड से 64 उम्मीदवार और उत्तर प्रदेश से 149 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की. उत्तर प्रदेश में पहले दो चरणों के चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हुई है.

पार्टी ने उत्तर प्रदेश के लिए जिन सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है उनमें 11 और 15 फरवरी को शुरुआती दो चरणों में मतदान होना है. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को मेरठ से टिकट दिया गया है, जबकि कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह को अतरौली से और श्रीकांत शर्मा को मथुरा से टिकट दिया गया है. सिंह और शर्मा पहली बार चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने के लिए उतरेंगे.

पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने लंबे विचार विमर्श के बाद उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया था. सूची में मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी रहे विधायक संगीत सोम और सुरेश राणा का नाम भी शामिल है.

हालांकि, केंद्रीय मंत्री एवं उत्तर प्रदेश के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह के नाम पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है. लेकिन पार्टी ने अभी नोएडा और गाजियाबाद की सीटों के नाम घोषित नहीं किया है.

पार्टी में शामिल हुए दूसरे दलों के बागी नेता भी 2017 के चुनावों में टिकट पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं

पार्टी में शामिल हुए दूसरे दलों के बागी नेता भी 2017 के चुनावों में टिकट पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. यह भाजपा के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है. इन बागियों के चलते पार्टी के पुराने नेताओं के बीच खलबली मच गई है जो चुनाव मैदान में उतरने की दावेदारी जता रहे हैं.

कम से कम एक दर्जन विधायक और मशहूर नेता ऐसे हैं, जो अपनी पार्टियों से बगावत कर चुके हैं और भाजपा से अपने या अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट मांग रहे हैं.

भाजपा के लिए अपने ही नेताओं के बीच टिकट बंटवारा मुश्किल भरा काम साबित हो रहा है. भाजपा नेताओं के कुछ रिश्तेदार राजनीति में बड़ा ब्रेक चाह रहे हैं और जाहिर है उन्हें पार्टी में अपने रिश्तेदारों से समर्थन मिल रहा है. राजनाथ सिंह, लालजी टंडन, कलराज मिश्र, हुकुम सिंह जैसे कुछ नेता चाह रहे हैं कि उनके बेटे या बेटी को आगामी चुनाव में पार्टी से टिकट मिल जाए.

इस बात की पूरी पूरी आशंका है कि पार्टी की उम्मीदवारों की सूची सामने आते ही भारी असंतोष फैल सकता है. कारण कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के सुपुत्र पंकज सिंह को ग़ाज़ियाबाद से और लोकसभा सांसद हुकुम सिंह की बेटी को कैराना से पार्टी का टिकट मिलने की संभावना है. उम्मीदवारों की सूची से वंशवाद की राजनीति पर भाजपा के रवैये का भी पता लग सकेगा.

सुनने में यह भी आ रहा है कि कल्याण सिंह के बेटे और एटा सांसद राजवीर अपनी पत्नी प्रेमलता या पुत्र संजू को डिबाई से टिकट दिलाने के लिए लॉबिंग करने में लगे हैं. डिबाई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके कल्याण सिंह की पारम्परिक मजबूत सीट रही है. फिलहाल कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल हैं और राजवीर एटा से सांसद.

इनके अलावा बांदा सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा, धारूहेड़ा सांसद रेखा वर्मा और अमरोहा सांसद कंवर सिंह तंवर भी अपने भतीजे, भतीजी और बेटे को टिकट दिलवाने के लिए प्रयासरत हैं. भाजपा के सूत्रों के मुताबिक पार्टी में 24 वरिष्ठ नेता अपने रिश्तेदारों के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं.

बच्चों के करियर की फिक्र

भाजपा के अपने वरिष्ठ नेता तो चाहते ही हैं कि इस चुनाव से उनके बेटे-बेटी, भतीजे-भतीजी के राजनीतिक करियर की शुरूआत हो. कुछ दलबदलू नेताओं ने भी टिकट बंटवारे को जटिल बना दिया है. बसपा से बगावत कर भाजपा में आए स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बेटे उत्कृष्ट और बेटी संघमित्रा के लिए भी भाजपा का टिकट चाहते हैं. 

उत्तर प्रदेश कांगेस की अध्यक्ष रह चुकी रीता बहुगुणा जोशी भी अपने बेटे मयंक के लिए भाजपा टिकट की जुगत बिठाने में लगी है. रीता बहुगुणा जोशी स्वयं अपने लिए भी लखनऊ से भाजपा का टिकट चाहती हैं. उनके भाई विजय बहुगुणा भी कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हैं.

भाजपा का टिकट चाहने वाले दलबदलू नेताओं की फेहरिस्त लंबी है और इसे लेकर इनका मुकाबला फिलहाल पार्टी के पुराने नेताओं से है. इन ‘‘आयाराम’’ को टिकट मिलेगा या नहीं, यह दीगर बात है लेकिन यह तय है कि भाजपा को टिकट बंटवारे को लेकर बड़े असंतोष का सामना करना पड़ सकता है.

बग़ावत के आसार

आगामी चुनावों में भाजपा का पलड़ा भारी देखते हुए बसपा से बगावत कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं में मौर्य सहित 9 नेता हैं. मौर्य के अलावा ये हैं- बृजेश पाठक, राजेश त्रिपाठी, चिल्लूपुर से विधायक बाला प्रसाद अवस्थी, हरगोविंद सिंह कुशवाह, पूर्व राज्य मंत्री परम देव यादव, वसुदेव मौर्य, राकेश जयसवाल, तुलसीराम यादव और राकेश लोधी. 

इनमें से स्वामी प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक और राजेश त्रिपाठी टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. हालांकि उनके बजाय अगर उनके बेटे या बेटी को टिकट दिया जाए तो शायद मौर्य ज्यादा खुश होंगे.

कांग्रेस से भाजपा में आए एक नेता गंगाचरण राजपूत गीता बहुगुणा की उम्मीदों पर पानी फेर सकते हैं

कांग्रेस से ही भाजपा में आए एक और नेता गंगाचरण राजपूत गीता बहुगुणा की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए पार्टी उम्मीदवार बन सकते हैं, क्योंकि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए वे पहले ही नामांकित हो चुके हैं. मौर्य, पाठक और दारा सिंह चौहान व एक और नए चेहरे को भी हाल ही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है.

बेशक, नए चेहरों को पार्टी के वफादारों के बजाय अधिक महत्व मिलने से पार्टी में असंतोष है. लेकिन पार्टी के एक महासचिव ने दलबदलुओं को लेकर किसी तरह के असंतोष की बात से इनकार किया है. उन्होंने कहा, जिस सीट से किसी अन्य पार्टी में रहा दलबदलू नेता चुनाव जीत चुका हो उसे भाजपा का टिकट देकर वहीं से मैदान में उतारने में क्या हर्ज है बजाय इसके कि उस सीट पर भाजपा का उम्मीदवार पांचवें या छठे स्थान पर रहे.

उन्होंने कहा, टिकट बंटवारे में उम्मीदवार की जीत की संभावना पर विचार किया जाएगा न कि किसी और मापदंड पर. साथ ही उन्होंने अपने बच्चों के लिए टिकट की मांग कर रहे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

First published: 17 January 2017, 7:50 IST
 
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