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फिर गूंजेगा, 'मंदिर वहीं बनाएंगे'

सुहास मुंशी | Updated on: 20 October 2016, 7:46 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने फिर राम मंदिर का मुद्दा उठा दिया है. केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा से लेकर उमा भारती और  विनय कटियार जैसे राम मंदिर के पक्ष में खुलकर बोलने लगे हैं. 

तुलसीदास की रामचरित मानस में एक जगह पवन पुत्र हनुमान की वानर सेना का वर्णन है. लंका पहुंचने के लिए व्याकुल इस सेना की हर कोशिश जब नाकाम हो जाती है तो सभी वानर राम का नाम जपना शुरू कर देते हैं. इसके बाद समुद्र पर वानरों का पुल तैयार हो जाता है. 

उत्तर प्रदेश में सिंहासन पर बैठने को बेताब भारतीय जनता पार्टी ने भी वानर सेना की तर्ज़ पर राम का नाम जपना शुरू कर दिया है. इसकी शुरूआत मंगलवार को देश के संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने की. अगले साल होने वाले चुनाव के लिए महेश शर्मा ने पार्टी के मंसूबों की राजनीतिक आधारशिला रख दी है. 

राम मंदिर उत्तर प्रदेश में सभी सांप्रदायिक विवाद की जड़ है. जैसे ही शर्मा ने राम मंदिर की बात की, उन्होंने अनजाने में ही बाबरी मस्जिद के गड़े मुर्दे भी उखाड़ दिए. बाबरी विध्वंस कांड की वजह से उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में हजारों लोगों की बलि चढ़ चुकी है. 

शर्मा ने मंगलवार को अयोध्या में कहा, 'मन बन चुका है, माहौल बन चुका है, राम लला का आदेश हो चुका है'. अब इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीजेपी यूपी विधानसभा में राम मंदिर कार्ड खेलने वाली है.

मन बन चुका है, माहौल बन चुका है-राम लला का आदेश हो चुका है-महेश शर्मा

संस्कृति मंत्री मंगलवार को उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे. उनका मकसद अयोध्या में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक रामायण म्युजियम की प्रस्तावित ज़मीन का मुआयना करना था. मगर मज़े की बात है कि इसके बहाने शर्मा अपना और पार्टी का असली मकसद नहीं छिपा सके और उन्होंने जनता के बीच राम को फिर ला खड़ा किया. 

शर्मा के भाषण में बार-बार राम लला, राम राज्य, राम का नाम सुनाई दे रहा था. इसे सुनकर लगा कि भाजपा उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार में राम मंदिर मुद्दा जोर-शोर से उठाना चाहती है.

तैयार थी भाषण की स्क्रिप्ट

मंगलवार को शर्मा जिस अंदाज़ में अयोध्या में जनता को संबोधित कर रहे थे, उन्हें सुनकर पता चला कि कसे हुए भाषण की ढंग से स्क्रिप्ट लिखी गई है. उनके भाषण और संदर्भ पूरी तरह तर्क पर आधारित और साफतौर पर उत्तर प्रदेश चुनाव की योजना के मुताबिक ही थे.

राम मंदिर बीजेपी का पसंदीदा मुद्दा है. बस मौक़ा मिलते ही पार्टी इस चिंगारी को हवा देने में लग जाती है. दरअसल भाजपा को मालूम है कि यह धमाका जितना बड़ा होगा, बीजेपी का वोट भी उतने ही बढ़ेंगा. वहीं अगर पार्टी नेताओं से राम मंदिर निर्माण पर सवाल होते हैं तो सभी कहते हैं कि उनके हाथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंधे हुए हैं.

महेश शर्मा जैसे नेता जहां इस मुद्दे पर आम जनता को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं बीजेपी ने भी पार्टी को इस मुद्दे पर खुलकर बोलने की छूट दे दी है.

1990 में अयोध्या में राममंदिर के हिंसक आंदोलन का चेहरा रहे विनय कटियार ने मंगलवार को कहा, 'रामायण म्युजियम का आइडिया तो एक लॉलीपॉप है और मंदिर बनाने का आह्वान किया'.

राम मंदिर आंदोलन का एक और चेहरा रहीं केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी 2017 तक राम मंदिर बनाने का वादा किया है. सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने साफ़ कहा कि विवादित स्थल सदा राम का ही रहेगा.

हिन्दू तुष्टिकरण?

राम मंदिर भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में एक लोकप्रिय और आज़माया हुआ मुद्दा है. बीजेपी को मालूम है कि जातिगत ध्रुवीकरण और हिन्दू वोटरों को लुभाने के लिए उसके पास इससे बड़ा चुनावी हथियार नहीं है. मोदी की दलितों तक पहुंच, महेश शर्मा का दादरी दौरा, कैराना मसले को निपटाना, तीन तलाक पर बहस और अब राम मंदिर, ये सब एक ही बड़ी योजना का हिस्सा हैं.

मंगलवार को शर्मा राम मंदिर मुद्दे के प्रतीक बन गए, ठीक उसी तरह जैसे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर इन दिनों पाक-विरोधी राष्ट्रवाद का चेहरा बने हुए हैं और हर जगह सिर्फ़ सर्जिकल स्ट्राइक की बात करते हैं.

वैसे तो पार्टी का मुख्य चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. मोदी ख़ुद को विकास पुरुष के प्रतीक के रूप में पेश करेंगे. वे इन मुद्दों से ऊपर उठकर बात करते हैं. सेना की तारीफ करते हैं, दलितों से हमदर्दी जताते हैं और सिर्फ़ विकास से जीवन स्तर सुधारने की बात करते हैं.

मंगलवार को एक तरफ़ केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा राम की माला जप रहे थे, वहीं दूसरी तरफ़ प्रधानमंत्री भी दो-दो रैलियों में जुटे थे. हिमाचल के मंडी में मोदी ने सेना की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय सेना ने इजराइली सेना की तरह गुप्त कार्यवाई को अंजाम दिया है. साथ ही उन्होंने हर घर में गैस कनेक्शन का वादा किया. फिर पंजाब पहुंचने पर मोदी ने लुधियाना में कहा कि दलितों पर अत्याचार के कारण उनका सिर शर्म से झुक गया है.

बीजेपी के लिए मंदिर, सर्जिकल स्ट्राइक और कैराना जैसे मुद्दों को हवा देना इस लिए ज़रूरी है क्योंकि पार्टी अपनी पुरानी गलतियों से भी सीख रही है.

पार्टी सूत्रों ने माना है कि 'बिहार में राम मंदिर कोई मुद्दा नहीं था. फिर बिहारी बनाम बाहरी और आरक्षण पर मोहन भागवत के बयान से राज्य में हमारा चुनाव प्रचार फीका पड़ रहा था. मगर उत्तर प्रदेश में हम शुरू से ही तीन तलाक, कैराना, दादरी और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों को उठाकर चल रहे हैं'.

राम मंदिर के साथ ही बीजेपी गौरक्षा और तीन तलाक के मुद्दे जारी रखेगी

सूत्रों ने कहा, पार्टी 2004 में भी ऐसी ही गलती कर चुकी है, जब पार्टी इंडिया शाइनिंग पर ही बात करती रही और राष्ट्रवादी हिन्दू भावनाओं की उपेक्षा कर गई. उत्तर प्रदेश में पार्टी यह गलती दोहराना नहीं चाहती. इसलिए मंदिर मुद्दा फिर से उठाया जा रहा है. 

First published: 20 October 2016, 7:46 IST
 
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