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बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन पर आचार संहिता का साया

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 January 2017, 14:32 IST
(एएनआई)

रविवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती का जन्मदिन विधानसभा चुनाव के चलते लगी आचार संहिता की साया में सादगी से मनाया गया. हर बार की तरह इस बार उनका यह 61वां जन्मदिन गाजे-बाजे और धूम धड़ाके के बिना ही आयोजित हुआ. इस दौरान माया ने 'मेरा संघर्षमय जीवन और बसपा मूवमेंट का सफरनामा-12' ब्लू बुक का विमोचन भी किया.

यूं तो इससे मायावती के जन्मदिन पर रैलियां आयोजित की जाती थीं और खूब तमाशा होता था, लेकिन इस रविवार को यह आयोजन सादगी भरा ही दिखा. पार्टी के कार्यकर्ताओं, संचालकों और जिला अध्यक्षों को पहले ही सख्त हिदायत दे दी गई थी कि आचार संहिता का पालन करते हुए एक उचित दायरे में ही काम करें. 

मायावती के इस जन्मदिन पर तमाम जिला कार्यालयों पर कार्यक्रम का सजीव प्रसारण किया गया. आचार संहिता की सख्ती का आलम यह रहा कि मायावती ने अपने जन्मदिन को जनकल्याणकारी दिवस के तौर पर भी नहीं मनाया और गरीबों में साड़ी-कंबल वितरित भी नहीं किए.

मायावती ने इस दौरान आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील भी कि वे उनके जन्मदिन को सादगी से मनाएं और इस दौरान गरीबों और जरूरतमंदों के हित में कार्य करें. 

भाजपा के नोटबंदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि नोटबंदी के 50 दिन बाद भी उन्होंने नहीं बताया कि कितना कालाधन पकड़ा गया है. उत्तर प्रदेश के 90 फीसदी लोगों को कंगाल बनाने वाली भाजपा को अब इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए. अपने भाई आनंद कुमार पर लगे आरोपों पर उन्होंने कहा कि अगर उनके परिवार के सदस्य किसी गैरकानूनी काम में लगे हुए थे तो अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

हालांकि माया ने अपने जन्मदिन के मौके पर मतदाताओं को अपनी बात समझाने का मौका नहीं छोड़ा और वो पूरी तरह चुनावी मूड में दिखीं. उन्होंने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के परिवार में चल रहे विवाद को नौटंकी बताते हुए कहा कि सपा और भाजपा प्रदेश की जनता का ध्यान भटका रही हैं. 

आचार संहिता को लेकर उन्होंने कहा कि इसके चलते वे गरीबों की मदद नहीं कर पा रही हैं. पार्टी महापुरुषों के मार्ग पर चल रही है और बसपा पांच राज्यों में अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ रही है.

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने पिछड़ी जातियों का बरसों तक शोषण किया है. सिर्फ बीएसपी ने ही उन्हें सम्मानजनक स्थान दिया है. कांग्रेस के बुरे काम का बुरा नतीजा सबके सामने है. कांग्रेस पार्टी ऑक्सीजन पर चल रही है. कांग्रेस यूपी में तरह-तरह जनता को प्रलोभन दे रही है. आजादी के बाद अब तक आश्वासन देती रही है. यूपी में लगभग 37 सालों तक राज किया लेकिन फिर भी कांग्रेस की बात जनता गंभीरता से नहीं ले रही. 

First published: 15 January 2017, 14:32 IST
 
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