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बुंदेलखंड में भाजपा अपनी जीत पक्की कर सकती है

सादिक़ नक़वी | Updated on: 24 February 2017, 9:15 IST

 

‘आप किस पार्टी का समर्थन कर रहे हैं?’ ‘जरा, एक मिनट रुकें. भीतर से अपना शर्ट ले आऊं.’ मानपुर गांव के युवा मतदाता नरेश कुमार अपने घर में तेजी से भागते हैं और शर्ट लेकर फुर्ती से बाहर आते हैं. शर्ट पहनने के बाद, जेब पर पिन किए सफेद कमल की ओर इशारा करते हैं.


कुमार कहते हैं, ‘मैंने स्थानीय कॉलेज से ग्रेजुएट किया है. आईटीआई से भी कोर्स किया है. फिर भी मेरे पास नौकरी नहीं है.’ कुमार बाल्मीकि हैं, वे कहते हैं, ‘जब मायावती सत्ता में थीं, उन्होंने सभी समुदायों के सफाईकर्मियों को नौकरियां दीं. अब नौकरियों पर बनियों, ब्राह्मणों, यादवों और ठाकुरों का कब्जा है. वे 3,000 रुपए महीने के बहुत कम वेतन पर हम जैसे लोगों को रख लेते हैं और बाकी का वेतन अपनी जेब में डाल लेते हैं. बिना कमाए वे 15,000 रुपए महीना बचा रहे हैं और हम भुगत रहे हैं. अखिलेश ने केवल यादवों को इटावा से पुलिस की नौकरियां दी हैं.’


कुमार कहते हैं, ‘हाथी की सरकार ने कुछ नहीं किया.’ स्थानीय विधायक गया चरण दिनकर, जो पिछली विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे हैं, एक बार भी अपनी शक्ल नहीं दिखाई. ‘लोगों की धारणाएं तो यहां तक है कि यदि आप भाजपा के टिकट पर बिजूका को भी खड़ा करेंगे, तो उसे भी वोट मिलेंगे,’ मानिकपुर में अमरपुर गांव के किसान दुर्गा प्रसाद पाल ने इस रिपोर्टर को अपने दो बैलों के पीछे-पीछे खेत में जाते हुए बताया. वे आगे कहते हैं, ‘पानी नहीं, अन्न नहीं, कॉलेज नहीं, हम क्या करें?’

 

मोदी को आज़माने में बुराई क्या


मानिकपुर में गढ़वा गांव की पंधरा कोल कहती हैं, ‘सब को देख लिया. मोदी को भी देख लेते हैं.’ कैच को दमाउरा गांव के रामू सिंह कहते हैं, ‘परिवर्तन चाहिए.’

 

जबकि महोबा में बीजानगर गांव के प्रमोद जैसे मतदाता कहते हैं कि उन्हें ऋण में छूट जैसी खैरात नहीं चाहिए, बल्कि नौकरियां चाहिए. प्रमोद उनमें से हैं, जिन्हें सभी खेतों की जमीन पर स्थानीय तालाब के पट जाने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इस सूखी जमीन पर यह बड़ा करुणाजनक दृश्य है. पर अन्य किसानों को भाजपा के ऋण में छूट देने के वादे से उम्मीद बनी है.


महोबा के कबरई कस्बे में चाय की दुकान पर राकेश द्विवेदी ने इस रिपोर्टर को कहा, ‘इस इलाके में 80 फीसदी लोगों के ऋण नहीं चुक पाए हैं. मोदी ने कहा कि वे उन्हें इसमें छूट देंगे. वे वादा नहीं तोड़ेंगे.’ चित्रकूट में चित्र गोकुलपुर गांव की हरिजन बस्ती में गांव के लोगों के साथ ताश खेलते हुए स्यंबर प्रसाद ने कैच को बताया, ‘मतदाता विभाजित हैं. यहां तक कि हरिजन भी एक होकर वोट नहीं करेंगे. कुछ वोट भाजपा को जाएंगे.’ से ही प्रसाद भाजपा के लिए बोले, रमेश कोरी बीच में बोल पड़े, ‘बसपा पांच साल से सरकार में नहीं है, पिछले इलेक्शन में हमने कमल खिलाया. इस बार उसे नीचे लाना है.’

 

बसपा की दिक्कत

 

सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड में पिछले आठ सालों से गंभीर अकाल की-सी स्थिति बनी हुई है. मायावती और अखिलेश यादव दोनों की सरकार के समय यही हाल था. मतदाताओं का एक वर्ग, खासतौर से दलित और आदिवासी समुदाय, जो पहले जातिगत वोट दिया करते थे, उनका रुझान भाजपा की ओर हो रहा है. उच्च जाति के वर्गों, खासतौर से ब्राह्मण, यहां तक कि ओबीसी, लोढ़ा, कुर्मी और अन्य समुदाय के लिए भगवा पार्टी पहली पसंद रही है.

इस वोट बैंक से उन्हें और वोट मिल सकते हैं. 2012 में भाजपा को केवल एक सीट मिली. 2014 के लोक सभा चुनावों में उसने सारी सीटें जीत लीं. अब बुंदेलखंड में, जहां ज्यादातर निर्वाचन क्षेत्रों में त्रिकोणीय स्पर्धा है, भाजपा अच्छे मतों से जीत सकती है.


बाबू सिंह कुशवाहा, स्वामी प्रसाद मौर्य, आरके पटेल, विशंभर प्रसाद निशाद जैसे कुछ पिछड़े वर्ग के नेता खोने के बाद बसपा को फिर पिछड़े वर्ग के वोट नहीं मिले. 2017 के चुनावों में पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उसने इस क्षेत्र में वोट्स पाने की उम्मीद में, उच्च जाति के कई उम्मीदवार खड़े किए हैं. और कुछ दलित और मुसलमान वोट, जिसके लिए मायावती आक्रामकता से होड़ कर रही हैं, बसपा कमी को पूरा कर लेगी.

 

हालांकि यह सपा-कांग्रेस के गठबंधन को देखते हुए तिकड़म वाली गणना है. उन क्षेत्रों में ब्राह्मण भाजपा के साथ जाते नजर आ रहे हैं, जहां बसपा और भाजपा दोनों के ब्राह्मण उम्मीदवार हैं. यह चित्रकूट में नजर आ रहा था, मसलन जहां खोई गांव के स्वामी धर्माचार्य जैसे मतदाताओं का दावा था कि ‘बसपा के ब्राह्मण उम्मीदवार को ब्राह्मणों से पानी भी नहीं मिलेगा.’

 

नसीमुद्दीन फैक्टर

 

बुंदेलखंड में मुसलमानों के वोट पाने की मायावती की उम्मीदें नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे नेताओं पर टिकी हैं. पार्टी का यह मुस्लिम चेहरा बांदा से है. सिद्दीकी बांदा ने पिछले कुछ दिनों में कैंप लगाए. वे पार्टी के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने बांदा और पड़ोसी जिलों में जनसभाएं रखीं. मायावती के समय बांदा में काफी विकास कार्य हुआ, जिसमें लगभग 800 मीटर लंबा फ्लाईओवर भी शामिल हैं.


इसके लिए कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इस छोटे-से कस्बे में इसकी लंबाई काफी बेजा बढ़ा दी गई थी, सिर्फ सिद्दीकी के राजनीतिक विरोधियों से वोट्स तय करने के लिए. फ्लाईओवर का एक छोर का अंत वहां है, जहां स्थानीय कांग्रेस विधायक विवेक सिंह का आवास खत्म होता है. दावे को और विश्वसनीय बनाने के लिए.


बुंदेलखंड के इस कस्बे में नवाब-एरा जामा मस्जिद पर कादिर सिद्दीकी ने मुझे बताया, ‘मतदाता विभाजित हैं.’ जिन अन्य मुसलमानों से इस रिपोर्टर ने बात की, उन्होंने बताया कि किस तरह सिद्दीकी तो सही थे, पर उनके फैले परिवार ने स्थानीय लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दीं. इस बीच, कुछ अन्य उनका साथ दे रहे थे.

 

नारायणी में लांबरहेटागांव के मो.अब्दुल हफीज ने केन नदी के बहने की दिशा की ओर इशारा करते हुए इस रिपोर्टर को कहा, ‘वे स्थानीय लोगों को नौकरियां देकर मदद करते हैं और बहनजी जब सत्ता में थीं, उन्होंने काफी काम किया. उन्होंने माफिया को खत्म किया. अब यह सभी रेत माफिया के लिए फ्री है. कम से कम बांदा के प्रकाश द्विवेदी सहित चार उम्मीदवारों का रेत की खानों के कारोबार के साथ संबंध हैं. प्रकाश बांदा में भाजपा टिकट पर खड़े हुए हैं.’

 

फतेहपुर फैक्टर


दिलचस्प है कि फतेहपुर में मोदी के भाषण से मुसलमान खुश नहीं हैं. उन्होंने ईद और दीवाली पर समान बिजली आपूर्ति के बारे में कहा था. एक स्थानीय वकील मंजर इमाम ने कैच को बताया कि ‘कल मैं एक शादी में था. और सभी गठबंधन का समर्थन करने की बात कर रहे थे क्योंकि प्रधानमंत्री सांप्रदायिक भाषा में बात कर रहे थे.’

 

‘हमारे लिए मुसलमानों का ठोस आधार है. यादवों की भी बस्तियां हैं,’ यह कहते हुए एक सपा नेता बताते हैं कि किस तरह पार्टी अपने दम पर कम से कम 5 सीटें बनाए रखने की उम्मीद करती है और बाकी की 4 सीटें, जो कांग्रेस ने जीती थीं. वे आगे कहते हैं, ‘इस ठोस आधार और हमारी पसंद के उम्मीदवारों से हम संभाल लेंगे.’

 

उन्होंने बताया कि किस तरह गठबंधन ने प्रभावी उम्मीदवार खड़े किए हैं, जिसमें उसके मौजूदा विधायक, और राजू भैया और विशंभर प्रसाद निशाद जैसे कुछ अन्य नेता अपने समुदायों में से मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए हैं. इसके अलावा बांदा सदर जैसी जगहों पर वर्चस्व वाली जातियों के समुदाय के बहुमतों का विभाजन होगा.

 

यहां ठाकुर कांग्रेस विवेक सिंह को वोट देने की ज्यादा संभावनाएं नजर आ रही हैं. एक ठाकुर को देंगे, बजाय भाजपा के द्विवेदी को. या चित्रकूट में जहां वीर सिंह पटेल को कुर्मी वोटों का काफी हिस्सा मिल सकता है. ब्राह्मण भाजपा के सीके उपाध्याय को साथ देते नजर आ रहे हैं, जो सपा के पक्ष में हो सकता है.


सरकार ने स्टूडेंट्स को भी कई खैरातें बांटी हैं, ‘स्टूडेंट्स सपा कोलेकर काफी खुश हैं, खासकर वे जिन्हें फायदा हुआ है.’ मानपुर के एक डॉक्टर ने कैच को बताया. और जैसा कि मानिकपुर के सपा नेता ने कहा, ‘सपा ने सूखे से पीडि़त लोगों को मदद की थी. सूखे से राहत पहुंचाने के लिए पैसों के अलावा फ्री खाना दिया. इससे पार्टी के लिए गुडविल बनी है.’

First published: 24 February 2017, 9:14 IST
 
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