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उत्तर प्रदेश: गठबंधन पर प्रशांत किशोर की सक्रियता को कंग्रेसियों ने दिखाया आइना

आकाश बिष्ट | Updated on: 7 November 2016, 7:34 IST
QUICK PILL
  • विधानसभा चुनावों के लिए नियुक्त किए गए कांग्रेस के रणनीतिकार देश की इस सबसे पुरानी पार्टी में टिक पाएंगे, अब ऐसा कहना मुश्किल हो रहा है.
  • उनके ख़िलाफ उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं से लेकर पंजाब तक में नाराज़गी का असर साफ़ देखा जा सकता है. 

समाजवादी पार्टी के 25वें स्थापना दिवस समारोह के कुछ घंटे पहले यूपी के सीएम अखिलेश यादव कांग्रेस पार्टी के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर से लखनऊ में एक फाइव स्टार होटल में मिले. इसके बाद कांग्रेस और सपा को लेकर अटकलें जोरों पर हैं कि वे यूपी के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले बिहार जैसा महागठबंधन करने जा रहे हैं.

उत्तरप्रदेश में सत्ता में आने की अपनी संभावनाएं बनाने के लिए कांग्रेस ने किशोर को पार्टी की चुनावी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी दी है. यहां कांग्रेस पार्टी 16 साल से भी ज्यादा समय से सत्ता से बाहर है. आमतौर पर माना जा रहा है कि किशोर चुनाव से पहले सपा के साथ गठबंधन के लिए उससे बात कर रहे हैं. मगर इसका खुलासा नहीं हुआ है कि उन्हें इसके लिए कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की इजाज़त है या फिर वह सबकुछ अपने मन से कर रहे हैं.

विवाद उस समय सामने आया जब प्रशांत किशोर ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और उनके करीबी अमर सिंह से तीन घंटे वार्ता की. इस मुलाकात को दोनों पार्टियों को करीब लाने की कोशिश के तौर पर देखा गया ताकि भारत के सबसे घनी आबादी वाले राज्य में भाजपा को सत्ता में आने से रोका जा सके. इससे पहले उन्होंने सपा नेता शिवपाल यादव के साथ जेडीयू नेता के साथ केसी त्यागी के घर दिल्ली में गुप्त बैठक रखी थी.

कांग्रेसी ख़फ़ा

किशोर की इन गतिविधियों से कांग्रेस के शीर्ष नेता नाराज हैं और उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशांत अपनी सीमा से आगे बढ़ रहे हैं और देश की सबसे पुरानी पार्टी की ओर से बिना उनकी स्वीकृति के पहल कर रहे हैं. यह पहली बार नहीं है कि कांग्रेस नेताओं ने किशोर के काम करने के तरीके को लेकर अपना विरोध जताया है. 

कांग्रेस के यूपी प्रमुख राज बब्बर ने जोर देकर कहा कि किशोर की सपा के साथ बैठक निजी थी और इसका धर्मनिरपेक्ष गठबंधन के साथ कोई लेना-देना नहीं है. कांग्रेस के कई नेता यूपी में पार्टी को पुनर्जीवित करने की किशोर की योग्यता पर पहले से ही सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि क्या पार्टी में अन्य राजनीतिक पार्टियों से राजनीतिक वार्ता करने वाले वरिष्ठ नेताओं का अभाव है?

कांग्रेस के एक नेता ने कहा, 'हमारे पास गुलाब नबी आजाद जैसे लोग हैं, जो यूपी में कांग्रेस महासचिव हैं और ऐसे अनुभवी राजनेता इस तरह की बातचीत में सक्षम हैं. मेरी समझ में नहीं आता कि उनके इस कदम के लिए किशोर को क्यों नहीं सजा दी जाती'.

फॉल्ट लाइन

इसके अलावा कांग्रेस और किशोर के बीच कैंपेन के आर्थिक पहलू को लेकर भी फॉल्ट लाइन पनप रही हैं. खासकर तब जब कांग्रेस ने किशोर की फर्म आईपीएसी के भुगतान में देरी कर दी थी. एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि भुगतान में देरी हो गई थी जिसकी वजह से पंजाब और यूपी में किशोर की टीम ने काम रोक दिया था. 

आर्थिक तंगी झेल रही कांग्रेस को शक था कि किशोर के कैंपेन पर जो पैसा लगाया गया था, उससे अपेक्षित नतीजे सामने नहीं आ रहे थे. वहीं किशोर की टीम के एक वरिष्ठ सदस्य ने भुगतान विवाद पर कुछ नहीं कहा और इस बात पर जोर दिया कि काम बंद नहीं किया गया था.  

बढ़ता भ्रम

किशोर की रोज़मर्रा की दख़लअंदाज़ी को देखते हुए राज्य के कई कांग्रेसी नेताओं और कार्यकताओं में यह बात घर कर गई है कि टिकटों के बंटवारे में आख़िरी फैसला ख़ुद किशोर करेंगे. अधिक समय नहीं हुआ, जब यूपी में पार्टी के पूर्व महसचिव मधुसूदन मिस्त्री को भी यही महसूस हुआ था और उन्होंने किशोर की मनमानी की शिकायत की थी. वे इस बात से खासतौर पर परेशान थे कि उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया और उनकी जगह आजाद को जिम्मेदारी दे दी गई.

पंजाब कांग्रेस भी नाराज

कुछ इसी तरह के हालात पंजाब में हैं, जहां कैप्टन अमरिन्दर सिंह और किशोर के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद सुर्खियों में हैं. उनके बीच भी विवाद की जड़ टिकटों के बंटवारे को लेकर बनी धारणा थी. पंजाब इकाई के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि स्थानीय मीडिया में खबरों को देखकर अमरिन्दर हैरान थे कि उम्मीदवारों के फैसले पर किशोर का अंतिम निर्णय होगा. इससे नाराज कैप्टन ने तुरंत एक बयान जारी किया कि टिकट वितरण केवल सोनिया गांधी का विशेषाधिकार है. 

किशोर की शिक़ायत

साल की शुरुआत में प्रशांत किशोर ने निष्काषित नेताओं और कैप्टन के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों जगमीत बरार और बीर देविन्दर के साथ गुप्त बैठकें की थीं. कहा जा रहा है कि इन बैठकों में उन्होंने पार्टी में उनकी वापसी को लेकर चर्चा की थी. नाराज कैप्टन ने कहा कि किशोर की भूमिका रणनीति तक सीमित है, जबकि वे पार्टी चलाने के लिए जिम्मेदार हैं. उन्होंने आगे कहा कि प्रशांत पंजाब की राजनीति की जटिलताओं को नहीं समझते, इसलिए उन्हें इससे बाहर रखा जाना चाहिए. यहां तक कि क्रिकेट से राजनीति में आए नवजोत सिंह सिद्धू से किशोर की बैक चैनल वार्ता भी कैप्टन को रास नहीं आई और उनके सूत्रों ने कहा कि उन्हें इससे अलग रखा जाए. 

नजरिए का खेल

इन सब मतभेदों के बीच पार्टी नेताओं का कहना है कि किशोर की राजनीतिक पारी उम्मीद से जल्दी शुरू हो जाएगी. यही वजह है कि पार्टी के नेता उनकी गतिविधियों का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे मतदाता प्रभावित होंगे और वे कांग्रेस को कमजोर समझेंगे. 

First published: 7 November 2016, 7:34 IST
 
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