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'दर्दे बनारस' जानने को मोदी के गढ़ में उतरी सोनिया पड़ीं बीमार

आवेश तिवारी | Updated on: 3 August 2016, 8:45 IST

'27 साल यूपी बेहाल' के नारों के साथ यूपी चुनाव में उतरी कांग्रेस पार्टी के लिए पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रोड शो के माध्यम से किया गया शक्ति प्रदर्शन चुनावी जमीन तैयार करने में सफल दिख रहा है. मंगलवार को वाराणसी में आयोजित कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इस रोड शो में उमड़ी भीड़ से यह साफ संकेत मिल रहे थे कि एक के बाद एक चुनाव हार झेल रही कांग्रेस पार्टी को कम से कम यूपी के चुनावों की दृष्टि से अप्रासंगिक कहना अन्य दलों के लिए बड़ी राजनैतिक भूल साबित हो सकती है.

हालांकि यात्रा के अंतिम पड़ाव में रोडशो पूरा करने से पहले ही सोनिया को तेज बुखार की शिकायत के बाद यात्रा रोकनी पड़ी. आगे की यात्रा राज बब्बर और गुलाम नबी आजाद ने पूरी की.

सोनिया के रोड शो में यह साफ दिखा कि कांग्रेस पार्टी इन चुनावों को हल्के में नहीं ले रही है. पार्टी के नेताओं और खुद सोनिया गांधी में यह आत्मविश्वास भी दिखा कि थोड़ी सी कोशिशों से वो चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं. हांलाकि रोड शो में मौजूद भीड़ स्थानीय नेताओं के तमाम दावों की भी पोल खोलती नजर आई. लेकिन यह भी काबिले गौर था कि लम्बे अरसे से खेमों में बंटी यूपी कांग्रेस एक साथ नजर आई.

अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में भारी भीड़

हल्की हरी सिल्क की साड़ी में उत्साह से लबरेज नजर आ रही सोनिया गांधी पूरी यात्रा में पार्टी की सीएम उम्मीदवार शीला दीक्षित का हाथ थामे रही. पार्टी द्वारा 'दर्दे ए बनारस' के स्लोगन के साथ बनारस की सड़कों पर उतरी सोनिया के इस रोड शो में अब तक टुकड़ों में बंटे कांग्रेस एक दूसरे के गले में हाथ डाले नजर आये.

शहर की सड़कें सोनिया गांधी, कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद के नारों से गूंजती रही. शहर के बीचोबीच स्थित भीमराम आंबेडकर पार्क में डॉ आंबेडकर की प्रतिमा को माल्यार्पण करने के बाद शुरू हुआ यह रोड शो शहर के लगभग सभी बड़े चौराहों से होता हुआ इंगलिशिया लाइन पर पहुंचकर खत्म हुआ.

सोनिया गांधी के रोड शो के दौरान शहर के अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में भीड़ उमड़ी. पुराने कांग्रेसियों का कहना था कि आमतौर पर ऐसी भीड़ 80 के दशक में नजर आती थी.

राजबब्बर और गुलाम नबी आजाद ने किया रोडशो का नेेतृत्व

यूपी के महासंग्राम में कम से कम 100 सीटों की उम्मीद पाले जी-जान से जुटी कांग्रेस पार्टी के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का रोड शो महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है. सुरक्षा कारणों से सोनिया शो के दौरान जनता से सीधा संवाद करने से बचती रही लेकिन शहर के व्यस्ततम सड़कों पर गाड़ी के बाहर हाथ निकालकर उन्होंने जनता का जमकर अभिवादन किया. प्रदेश कांग्रेस के निवनियुक्त अध्यक्ष राज बब्बर, गुलाम नबी आजाद, प्रमोद तिवारी और रीता बहुगुणा जोशी सरीखे दिग्गजों ने गाड़ियों पर मोर्चा संभाला तो राजेश मिश्रा, अजय राय और राजेशपति त्रिपाठी ने गाड़ी के ऊपर बैठकर.

सोनिया गांधी के इस रोड शो की सबसे बड़ी खासियत युवाओं की उपस्थिति थी. बनारस शहर ही नहीं आस-पास के कई जिलों के कांग्रेसी इस रोड शो में मौजूद रहे. मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रभारी मोहन प्रकाश ने कहा कि बनारस और गांधी परिवार का एक दूसरे से गहरा नाता रहा है, सोनिया जी का यह रोड शो पूरी तरह से विफल हो रही भाजपा के खिलाफ कांग्रेस पार्टी की मुहिम की शुरुआत है, जो नरेन्द्र मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकने के साथ ही ख़त्म होगा.

सेहत बनी समस्या

लगभग तीन घंटे तक नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में सोनिया गांधी ने दमखम के साथ रोड शो किया. लेकिन, थकान ने तबीयत खराब कर दी. डिहाइड्रेशन, उल्टी और बुखार के कारण सोनिया गांधी को अपना शो नियत स्थान से थोड़ा पहले ही रोकना पड़ा. इसके चलते उनका काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन का कार्यक्रम भी रद्द करना पड़ा.

सोनिया ने कहा कि तबीयत खराब होने के कारण काशी विश्वनाथ मंदिर नहीं जा सकी. लेकिन जल्द ही वापस आऊंगी और काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा करूंगी. इस बीच वाराणसी में चेकअप के बाद एयर एंबुलेंस से उन्हें रात में दिल्ली लाया गया. यहां आर्मी अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया जहां उनकी हालत अब बेहतर बताई जा रही है.

कहा जा रहा है कि वे रात में ही घर जाना चाहती थी लेकिन डॉक्टरों ने एहतियातन उन्हें रात भर अस्पताल में निगरानी में रखा. सोनिया गांधी के बीमार होने की खबर से पीएम मोदी भी चिंतित हुए. उन्होंने सोनिया के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए डॉक्टर भेजने और दिल्ली लाने के लिए विशेष विमान भेजने की पेशकश भी की. पीएम ने उनके जल्दी स्वच्छ होने की कामना की.

2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुना कांग्रेस के साथ ही सोनिया गांधी के परिवार का भी बड़ा इम्तेहान है. सोनिया, राहुल और प्रियंका सभी मिलकर इस बार के चुनाव में हैं. राहुल गांधी का राजनीतिक रसूख भी दांव पर है. प्रियंका गांधी चुनाव न लड़कर भी अहम भूमिका निभाने वाली हैं, लिहाजा यह इम्तेहान पिछले तमाम इम्तेहान से कहीं बड़ी है.

First published: 3 August 2016, 8:45 IST
 
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