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अमेठी-रायबरेली सीटों पर सपा-कांग्रेस गठबंधन में गांठ बनी हुई है

सादिक़ नक़वी | Updated on: 5 February 2017, 8:07 IST

यूपी की अमेठी और रायबरेली सीट कांग्रेस के लिए बरसों से प्रतिष्ठा का सवाल रही है. पार्टी का प्रथाम परिवार इन्हीं दोनों सीटों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करता है. हालांकि जरूरी नहीं कि लोकसभा चुनाव में इस सीट से जीतने वाली कांग्रेस को यहां विधानसभा चुनावों में भी सफलता मिले. उदाहरण के लिए 2012 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इन दोनों लोकसभा क्षेत्रों की 10 में से केवल 2 ही सीटों पर विजय हासिल हो सकी थी. हो सकता है सपा से गठबंधन के चलते इस बार कांग्रेस अमेठी विधानसभा क्षेत्र से लड़े ही नहीं.

सपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू में बताया कि इन दो जिलों में सीटों के बंटवारे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पार्टियां पहले ही बात कर चुकी हैं. अखिलेश ने स्पष्ट किया है कि अमेठी से सपा विधायक गायत्री प्रजापति चुनाव लड़ेंगे. उन्हें सपा के जनक मुलायम सिंह का करीबी माना जाता है.

पार्टियों में गतिरोध का कारण

कैच ने पहले भी ऐसी ही रिपोर्ट की थी कि अखिलेश इस सीट को कांग्रेस को इसलिए नही देना चाहते क्योंकि...

1. वे अपने पिता के करीबी का टिकट काट कर उन्हें और दुखी नहीं करना चाहते.

2. सपा की अंदरूनी गणित के अनुसार गायत्री प्रजापति इस क्षेत्र में सबसे मजबूत स्थिति में है. इस बीच, कांग्रेस इस बात पर जोर दे रही है कि इन क्षेत्रों की दसों विधानसभा सीटों पर उसे लड़ने दिया जाए क्योंकि रायबरेली से सोनिया गांधी और अमेठी से राहुल गांधी सांसद हैं. कांग्रेस को कहीं न कहीं यह लग रहा है कि अगर वह अपने गढ़ों में सपा को अधिक जगह देगी तो 2019 के लोकसभा चुनावों के समय वह कमजोर पड़ सकती है.

बदलते समीकरण

हालांकि फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व को बता दिया है कि वह ऊंचाहार, गौरीगंज और अमेठी सीट से चुनाव लड़ेगी. अब इन जिलों की बाकी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ सकती है. 

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे सपा को केवल दो सीटों पर लड़ने को राजी करने में कामयाब रहे हैं. पहले अखिलेश ने इन दस सीटों में से पांच पर सपा उम्मीदवार खड़े करने का फैसला लिया था. इससे खफा कांग्रेस गठबंधन पर बातचीत बीच में ही छोड़ने वाली थी. सपा ने रायबरेली की सलोन, ऊंचाहार और सरेनी सीट पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं तो अमेठी जिले की अमेठी व गौरीगंज सीट पर.

एक सपा नेता ने कैच को बताया कि अंदरूनी सर्वे के मुताबिक सपा सरेनी और हरचंदरपुर में हार रही है. पिछले चुनावों में सपा ने 7 मे से 2 सीटों पर चुनाव जीते थे. उन्होंने कहा ऊंचाहार, अमेठी और गौरीगंज सीट पर शायद समझौता नहीं होगा. ऊंचाहार से इस समय मनोज पांडेय विधायक हैं. 

सपा के प्रचार अभियान से जुड़े एक और अंदरूनी सूत्र ने बताया कि पार्टी को जमीनी स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, रायबरेली के सदर क्षेत्र में कांग्रेस फिर भी जीत सकती है लेकिन अन्य 9 क्षेत्रों में कांग्रेस के जीतने के आसार बहुत कम हैं.

अखिलेश ने बताया इन दो जिलों में सीटों का बंटवारा करते वक्त इस बात का खास खयाल रखा जाएगा कि बसपा या भाजपा वहां से चुनाव न जीत पाएं. समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि भाजपा तेजी से यहां अपना आधार बना रही है. इसलिए पार्टी कांग्रेस की अधिक सीटों की मांग शायद ही पूरी करे.

अमिता सिंह फैक्टर

प्रजापति पर भाजपा और दूसरी पार्टियां लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही हैं लेकिन इसके अलावा कांग्रेस नेता संजय सिंह की पत्नी भी यहां से चुनाव लड़ने की इच्छुक है. अगर सपा प्रजापति को गठबंधन का उम्मीदवार बनाने पर अड़ी रही तो हो सकता है अमिता सिंह निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ें.

दबाव बनाने के लिए संजय सिंह ऐसे वक्तव्य दे रहे हैं कि कांग्रेस जिले की सभी दस सीटों पर चुनाव लड़ेगी. भाजपा ने संजय सिंह की पूर्व पत्नी गरिमा सिंह को इस सीट से टिकट दिया है.

First published: 5 February 2017, 8:07 IST
 
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