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मुलायम का इमोशनल दांव: 'आप भी मेरे, साइकिल भी मेरी, पार्टी भी मेरी और बेटा भी मेरा'

महेंद्र प्रताप सिंह | Updated on: 12 January 2017, 8:01 IST
(फ़ाइल फोटो )

बीते चार महीने से चल रहा समाजवादी पार्टी का संघर्ष बुधवार को भी कमोबेश बना रहा. बस इसमें एक छोटा सा बदलाव यह देखने को मिला कि मुलायम सिंह लखनऊ स्थित पार्टी के दफ्तर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को भावुकता की जमीन पर दुहने की कोशिश की.

मुलायम सिंह के इस दांव पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि शायद वह हताश हो चुके हैं और अब खुलकर इमोशनल दांव चला है. उन्होंने इस दौरान अपने कई रूप दिखाए. करीब दो बजे वे मीडिया के सामने आए. बेहद भावुक और उदास. उनकी बातों में पिता का पुत्र के लिए प्रति मोह छलक रहा था तो पार्टी बचाने की चिंता और मिन्नतें भी.

बोलते समय लगा कि वे भावुक हो रहे हैं. वे सबकुछ बोल गए जो खुद नहीं कह सके उसे वहां मौजूद जनता से उगलवाया. चचेरे भाई राम गोपाल यादव पर उन्होंने खूब गुस्सा उतारा. बेटे अखिलेश को भी कार्यकर्ताओं के जरिए संदेश देने की कोशिश की.

उन्होंने कहा अगर अखिलेश किसी के चंगुल में फंसे हैं तो वे उन्हें बचाएंगे. न सिर्फ अखिलेश बल्कि पार्टी को भी बचाएंगे और अपनों को भी. भावुक होकर बोल उठे- 'साइकिल मेरी है. पार्टी मेरी है और आप भी मेरे हैं और हमेशा रहेंगे. हम पार्टी और सिंबल को हर कीमत में बचाएंगे. मैं अभी दिल्ली जा रहा हूं.' यह कह कर वे दिल्ली के लिए रवाना हो गए.

अखिलेश कहीं फंस गया है?

मुलायम सिंह के परिवार में जारी घमासान के बीच उन्होंने पार्टी को तोड़ने वालों को भी चेतावनी दी. कठोर दिखने की कोशिश कर रहे मुलायम बेटे के प्रति नरम दिखे. बेटे की तमाम कमियों को गिनाते हुए कहा अगर वह कहीं फंस गया था तो मुझे बताता. हम बचाते उसे. हम बचाएंगे उसे. इसके बाद उन्होंने जोर देकर एक बात दोहराई, 'अखिलेश ही अगले मुख्यमंत्री होंगे.'

इमोशन की बाढ़

मुलायम सिंह पार्टी समर्थकों की सहानुभूति बटोरने के लिए पुराने संघर्ष के दिनों के किस्से कहानी याद करने लगे. उन्होंने कहा इमरजेंसी में हमें बंद कर दिया गया. तब अखिलेश दो-ढाई साल का था. शिवपाल रात को गायब हो जाते थे. हम तो जेल में थे. हमने दो जगह से नामांकन भरे थे. दोनों नामांकन रद्द कर दिए गए. शिवपाल लगे रहे. हमें और हमारे कार्यकर्ताओं को पुलिस जहां चाहती वहां पीट देती. कई बार हमारे लोगों के हाथ पैर टूटे. ये संघर्ष अखिलेश को क्या मालूम.

मुलायम ने कार्यकर्ताओं से यह सवाल किया क्या आप लोगों से पूछकर हमने अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाया था. अब इसे पता ही नहीं है कौन सगा है, कौन पराया. जो लोग जांच में फंसे हैं वे खुद को बचाने के चक्कर में अखिलेश को तोड़ रहे हैं. जाहिर है उनका सीधा निशाना राम गोपाल यादव पर था जिनके बेटे और बहू के ऊपर यादव सिंह मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं.

मुलायम सिंह ने कहा हम उन्हें बाहर करेंगे. हमारे दिन ही कितने बचे हैं. आप लोगों को ही देखना है. पर हम इस पार्टी को टूटने नहीं देंगे. मैंने अखिलेश को सब कुछ दे दिया. मेरे पास क्या बचा. मेरे पास आप लोग बचे हैं.

लिखकर दे रहे हैं अखिलेश होंगे सीएम

असल में बीते कुछ दिनों के दौरान मुलायम सिंह के कई रूप देखने को मिले हैं. उन्होंने धमकी से लेकर सुलह-समझौते तक तमाम उपाय कर लिए हैं. अब उन्हें शायद इस बात का एहसास हो गया है कि अखिलेश अपनी बात से पीछे नहीं हटने वाले. लिहाजा उन्होंने अंतिम हथियार के तौर पर भावुकता का दांव चला है.

समाजवादी पार्टी को टूटने से बचाने के लिए मुलायम सिंह यादव ने प्रत्यक्ष तौर पर कार्यकर्ताओं से मिन्नतें की लेकिन दरअसल वे अखिलेश यादव से मिन्नत कर रहे थे. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, 'हमने अखिलेश को कहा है कि सीएम तुम ही बनोगे, लेकिन रामगोपाल से अलग हो जाओ. रामगोपाल अपने लड़के और बहू के चलते हमारी पार्टी तोड़ रहे हैं.'

मुलायम बोले, हम न तो अलग पार्टी बना रहे हैं और न ही सिंबल बदल रहे हैं. हम अपनी पार्टी नहीं छोड़ेंगे. वे बोले अखिलेश जब बहुत छोटे थे तब पार्टी बनाई थी. यूं ही इसे बिखरने नहीं देंगे. मुलायम के साथ शिवपाल यादव भी पार्टी कार्यालय में मौजूद थे.

मुलायम सिंह ने कहा, 'मैं लिखकर देने को तैयार हूं, अखिलेश ही सीएम का चेहरा होंगे, लेकिन उन्हें खुद को रामगोपाल से अलग करना होगा, वो उसे बरगला रहे हैं.'

अखिलेश ने कहा 'नो थैंक्स'

उधर, सपा में मचे घमासान पर राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सीएम अखिलेश यादव से कहा कि अब पिताजी से मिलकर इन चीजों को समेटिए. अब झगड़ा ठीक नहीं है, चुनाव सिर पर है. सबको टिकट भी बांटना है.

लालू यादव के इस हस्तक्षेप पर अखिलेश यादव ने बेहद रूखा जवाब दिया, 'नो थैंक्स.' बाद में लालू प्रसाद यादव ने मीडिया को बताया, 'मैंने अखिलेश को देर रात फोन कर सलाह दी थी कि वह मुलायम सिंह यादव से सुलह कर ले, लेकिन मुझे निराशा हाथ लगी.'

First published: 12 January 2017, 8:01 IST
 
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