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केशव प्रसाद मौर्य: अखिलेश की विफलता भाजपा की सफलता का आधार बनेगी

सुहास मुंशी | Updated on: 3 February 2017, 8:13 IST
(फाइल फोटो )

उत्तर प्रदेश के चुनाव सिर्फ सबसे बड़े राजनीतिक इलाके पर काबिज होने की दौड़ मात्र नहीं है. पुरानी बनाम नई समाजवादी, मायावती और कांग्रेस के लिए तो यह उनके वजूद की लड़ाई है. भाजपा के लिए, अगर गुजरात से कोई हैरान करने वाला नतीजा नहीं आया तो 2019 की लड़ाई के पहले, यह उसकी अंतिम बड़ी दौड़ है. 

भाजपा के पास मौका था कि वह सर्जिकल स्ट्राइक, कैराना से हिंदुओं के कथित पलायन और ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों से फायदे को भुनाए, वही अब नोटबंदी और टिकट बंटवारे पर तल्ख सवालों के जवाब देने में व्यस्त है. पिछले साल हुए पांच चुनावों में पार्टी को सिर्फ एक चुनाव में जीत मिली है, जिसमें बिहार की बड़ी हार भी शामिल है. 

ऐसे मौके पर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में जीत का आशय होगा कि मोदी अब भी एक ऐसी राजनीतिक पूंजी हैं जिस पर पार्टी दांव खेल सकती है और उनमें वह जन अपील मौजूद है जिसके चलते पार्टी को 2014 के चुनाव में सत्ता हासिल हुई थी. भाजपा की उत्तर प्रदेश ईकाई, जिसने अब तक कोई सीएम पद के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किया है, उत्तर प्रदेश में जीत के लिए काफी हद तक मोदी पर ही निर्भर कर रही है.

लेकिन यहां एक हार का मतलब होगा कि मोदी नाम की कुछ चमक धूमिल हो जाएगी. इससे पार्टी के शीर्ष क्रम में कुछ हेर-फेर और रणनीति में बदलाव भी देखने को मिल सकता है. याद रहे कि जब तक उत्तर प्रदेश के चुनावों के परिणाम आएंगे तब तक केंद्र में सत्तासीन पार्टी के लिए शासन के तीन वर्ष लगभग पूरे हो जाएंगे. 

भाजपा यूपी में इस समय किस तरह के दबाव और चुनौतियों का सामना कर रही है यह समझने के लिए कैच ने उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य से बात की. मौर्य ने बताया कि भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश के खराब प्रदर्शन को मुद्दा बनाएगी और साथ ही उन्हें गरीब तबके से भी बड़ा साथ मिलने की उम्मीद है. मौर्य ने दावा किया कि हिंदुओं के साथ-साथ अच्छे मुस्लिम भी भाजपा को वोट देंगे.

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश में दो बड़ी पार्टियों ने चुनाव पूर्व गठबंधन कर लिया है और मायावती भी प्रदेश की बड़ी आबादी में लोकप्रिय हैं. आपको क्यों लगता है कि प्रदेश में लोग भाजपा को वोट देंगे ?

पार्टी की बड़ी जीत का सबसे बड़ा कारण रहेगा अखिलेश का कुशासन. उनकी विफलता में ही हमारी सफलता का आधार है. उनके शासनकाल में यूपी में गुंडा राज बढ़ा है और साथ ही भ्रष्टाचार भी बढ़ा है. कोई विकास कार्य नहीं कराया गया. गरीब और भी अधिक हाशिए पर चले गए हैं. गरीब लोग नरेंद्र मोदी की तरफ देख रहे हैं और यही वजह है कि हम जीतेंगे.

लोकसभा चुनावों में यूपी ने रिकॉर्ड सीटें जीती थीं जबकि पार्टी ने किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था. इस बार भी पार्टी अब तक तीन सूचियों में 403 सीटों पर 371 उम्मीदवार खड़े कर चुकी है. इसमें ओबीसी समेत लगभग सभी समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है. पर अब तक किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया गया है, ऐसा क्यों ?

इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. इसका आशय सिर्फ इतना है कि हमें कोई अच्छा मुस्लिम उम्मीदवार ही नहीं मिला.

नोटबंदी को आप कितना बड़ा ध्रुवीकरण करने वाले फैक्टर मानते हैं?

हमें इससे जबर्दस्त लाभ हुआ है. मुझे लगता है कि यह हमारी जीत में एक बड़ा कारण होगा. जिन लोगों ने इसका विरोध किया है वे एक्सपोज हो गए हैं और जनता उनको इन चुनाव में सजा देगी.

पर राष्ट्रीय लोक दल जैसी पार्टियां जिनका जनाधार मुख्य रूप जाट कृषक समाज में है, वे इस चुनाव में नोटबंदी के खिलाफ लोगों में मौजूद गुस्से को भुनाना चाहती हैं ?

आरएलडी की यूपी में अब कोई उपस्थिति नहीं है. वे एक भी सीट इस बार जीतने नहीं जा रहे हैं. लोग उनको क्यों वोट देंगे? वे इससे क्या हासिल करेंगे? क्या अजीत सिंह अगले मुख्यमंत्री बन सकेंगे?

आप लोगों ने बिहार में जिस तरह से चुनाव लड़ा और अन्य दलों ने आपका जिस तरह से विरोध किया उसमें और उत्तर प्रदेश में जिस तरह से आप लड़ रहे हैं उसमें काफी-कुछ समानताएं हैं. दोनों ही मामलों में पार्टी ने कोई मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित नहीं किया, दोनों ही मामलों में वरिष्ठ आरएसएस कार्यकर्ता ने आरक्षण के खिलाफ बयान जारी किया है और दोनों ही मामलों में आपके खिलाफ चुनाव लड़ रही पार्टी ने बाहरी और स्थानीय का मुद्दा उठाया है.

जहां तक मनमोहन वैद्य के वक्तव्य का सवाल है, तो चुनाव किसी एक बयान के आधार पर नहीं लड़े जाते हैं. हम आरक्षण के साथ खड़े हैं और प्रधानमंत्री ने यह साफ कर दिया है कि जब तक जरूरत है तब तक आरक्षण रहेगा. जहां तक बाहरी और स्थानीय की बात है, तो इस मुद्दे को सबसे पहले राहुल गांधी ने उठाया था. इसलिए सबसे पहले राहुल गांधी को यह बताने दो कि उनकी मम्मी कहां से हैं? हमारे पास मजबूत स्थानीय नेता पार्टी में हैं और वे पार्टी की प्रदेश में बड़ी जीत सुनिश्चित करेंगे.

आप कितनी सीटें उम्मीद कर रहे हैं?

हम राज्य में 300 से 350 सीटों की उम्मीद कर रहे हैं. बाकी अन्य दलों को सब मिलाकर 50 से भी अधिक सीटें नहीं मिलेंगी.

आपके पक्ष में क्या चीज रहेगी? पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ध्रुवीकरण, कैराना या बूचड़खाना पर प्रतिबंध लगाने का आपका वादा? क्या आपकी राजनीति को खुले तौर पर हिंदुत्ववादी के रूप में नहीं देखा जा सकता?

भाजपा ने कभी ध्रुवीकरण और सांप्रदायवादी खेल नहीं खेला है. हां, लेकिन आजम खान जैसे गुंडे प्रदेश में हैं जो कि गरीब लोगों का उत्पीड़न कर रहे हैं, उनका अपना घर छोड़ने को मजबूर कर रहे हैं और लोगों को जान से मार रहे हैं जैसा कि उन्होंने मुजफ्फरनगर में किया, तब जरूर हम पीड़ितों के साथ खड़े होंगे. यही वजह है कि हिंदू और अच्छे मुस्लिम भाजपा को ही वोट देंगे.

बूचड़खाने का संबंध विकास से है. हम गाय को मारकर एक समुदाय के रूप में न तो बढ़ सकते हैं और न ही विकास कर सकते हैं. हम गाय को बचाएंगे और लोगों को डेयरी सेक्टर में रोजगार उपलब्ध कराएंगे. जहां तक हिंदुत्ववादी कहे जाने का संबंध है तो यह इस पर निर्भर करता है कि आप इसको कैसे देखते हैं?

कई लोगों को आपके घोषणापत्र और इसी माह के आरंभ में समाजवादी पार्टी द्वारा जारी किए गए घोषणा पत्र में भारी समानता दिखती है.

हमारी पार्टी ने संकल्प पत्र जारी किया है, घोषणा पत्र नहीं. उनमें और हममें अंतर यही है कि उन्होंने अपने वादों को पूरा नहीं किया जबकि हम अपने वादे पूरा करेंगे.

क्या आपको लगता है कि वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार के वक्तव्य से पार्टी की छवि को नुकसान होगा?

मैंने यह देखा कि कई बार मीडिया भी लोगों को ऐसे बयान देने के लिए उकसाता है और फिर उन्हें प्राइम टाइम में दिखाया जाता है. हम अपनी पार्टी के लिए एक अच्छा प्लेटफॉर्म बनाने की कोशिश कर रहे हैं पर कभी-कभी गलती से कुछ निकल जाता है. पार्टी के लिए लहर पहले से ही है, हम इससे ज्यादा और क्या बोलें?

First published: 3 February 2017, 8:13 IST
 
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