Home » उत्तर प्रदेश चुनाव » Ground report Agra: BJP holds the edge, but women may turn the tide for SP
 

आगराः रुझान भाजपा की ओर लेकिन महिलाएं भाजपा को लेकर सशंकित

प्रियता ब्रजबासी | Updated on: 11 February 2017, 1:10 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

आगरा में में प्रचार थम चुका है और मतदाता अपने पसंदीदा प्रतिनिधि को चुनने का मन बना चुके हैं. 11 फरवरी को यहां पहले चरण में मतदान होगा. आगरा में 9 विधानसभा क्षेत्र एतमादपुर, आगरा कैंट (एस.सी), आगरा (दक्षिण), आगरा (उत्तर), आगरा ग्रामीण (एससी), फतेहपुर सीकरी, खैरागढ़, फतेहाबाद और बाह हैं. इनमें से छह सीटों का प्रतिनिधित्व फिलहाल बसपा विधायक कर रही है. दो सीटों पर 2012 में भारतीय जनता पार्टी जीती थी जबकि केवल एक सीट पर सपा विधायक है.

इस बार ऐसा लग रहा था कि भाजपा की लोकप्रियता में कमी आई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसका जनाधार बिल्कुल ही खत्म हो गया है. जनता सपा के राज से भी उकता चुकी है. यहां कानून-व्यवस्था सबसे बड़ा मुददा है. कुछ लोगों को लगता है कि यही समय है जब भारतीय जनता पार्टी राज्य में मायावती की बसपा या मुलायम (और अब अखिलेश यादव) की सपा का विकल्प बन सकती है. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार राम शंकर कठेरिया आगरा से और चौधरी बाबू लाल फतेहपुर सीकरी से जीते थे.

आगरा में मुद्दे

आगरा में चमड़े के एक कारखाने में काम करने वाले कर्मचारी ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था का बिगड़ना सबसे बड़ा मुद्दा है. दिन-दहाड़े महिलाओं को प्रताडि़त किया जाता है. दुष्कर्म की घटनाएं होना आम बात है. सरकार ने कानून व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए कुछ नहीं किया. भाजपा राज्य के लिए बेहतर साबित होगी.’

मंतोला के एक व्यापारी रईस खान बताते हैं, 'नोटबंदी और उससे हुई परेशानी के बावजूद भाजपा राज्य के लिए बेहतर साबित होगी.' वे कहते हैं, ‘क्या हुआ जो मैं मुसलमान हूं. धर्म मेरा निजी मामला है. मैं धर्म के आधार पर वोट नहीं देता. मुझे लगता है कि नरेंद्र मोदी देश में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. इसलिए उत्तर प्रदेश में भी उन्हें सरकार बनानी चाहिए.’

आगरा एक औद्योगिक शहर है और यहां ज्यादातर फर्म सार्वजनिक क्षेत्र के हैं. बेरोजगारी यहां बड़ा मुद्दा है और लोग इस समस्या से निजात पाना चाहते हैं. इकॉनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार काम की तलाश में हजारों लोग आगरा से बाहर पलायन कर जा रहे हैं, क्योंकि यहां सेवा क्षेत्र में नौकरियों के अवसर काफी कम हैं और अकुशल कामगारों के लिए तो काफी कम.

आगरा के वोटरों को लगता है कि भाजपा बेरोजगारी की समस्या भी दूर कर देगी. रईस कहते हैं कि नरेंद्र मोदी गुजरात की ही तरह यूपी को भी विकसित कर देंगे. वे कहते हैं, ‘गुजरात को मोदी ने समृद्ध बना दिया. हम चाहते हैं मोदी यहां आएं और यूपी को भी समृद्ध बनाएं. इसीलिए हम मोदी को वोट देंगे.’

मुसलमान वोटों का बंटवारा

उत्तर प्रदेश के 18 फीसदी मुसलमान आबादी हैं और इनमें से अधिकतर राज्य के पश्चिमी भाग में रहते हैं. यहां ज्यादातर इलाकों में पहले चरण में ही मतदान होगा. जाहिर है, मुसलमान वोटों की बड़ी भूमिका होगी नतीजे तय करने में. पिछले 25 सालों से मुसलमान परंपरागत तौर पर सपा के साथ खड़ा रहा है.

मुस्लिम मतदाताओं में ज्यादातर का मानना है कि उनके वोट के असल हकदार अखिलेश ही हैं क्योंकि वे साफ छवि वाले नेता हैं, उनका ध्यान विकास पर केंद्रित रहा है. हालांकि बहुत से ऐसे भी हैं, जिन्होंने सपा के बारे में राय बदल ली है. इनका आरोप है कि सपा सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगों और दादरी में अखलाक की हत्या के बाद समुचित कानूनी कार्रवाई नहीं की.

आगरा के ही इतिमाद-उद-दौला निवासी फिरोज खान कहते हैं अखिलेश अल्पसंख्यक विरोधी हैं. सपा सरकार ने हमारे लिए कुछ खास नहीं किया है. हम सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए वोट नहीं करेंगे. हमारा वोट बहनजी (मायावती) के लिए है.

अगस्त 2016 में इतिमाद-उद-दौला के मुसलमानों ने आरोप लगाया था कि सपा ने भू-माफियाओं का समर्थन किया था जिन्होंने मुस्लिमों पर अपनी संपत्ति बेचने का दबाव बनाया था. उन्होंने आरोप लगाया कि भू-माफिया उन्हें परेशान करते रहे और प्रशासन व पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कुछ नहीं किया. फिरोज कहते हैं इतिमाद-उद-दौला से कई लोग पलायन कर चुके हैं और कई अब करेंगे.

आगरा (दक्षिण) विधानसभा सीट पर 2015 में विश्व हिन्दू परिषद के एक नेता अरुण महोर की हत्या के बाद हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे. सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा ने एक बार फिर यहां से मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा किया है जबकि भाजपा ने इस सीट से एक बार फिर अपनी पार्टी के निवर्तमान विधायक योगेन्द्र उपाध्याय को खड़ा किया है. ब्राह्मण उपाध्याय को पिछली बार मुस्लिम वोटों के विभाजन से फायदा मिला था.

इस विधानसभा क्षेत्र में 23 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है व 17 फीसदी दलित. हालांकि भाजपा का अपना गणित यह है कि उसे समाज के सभी वर्गों का कुला मिलकर लगभग 58 फीसदी हिन्दू वोट मिलेगा. कड़े मुकाबले के बीच बसपा को उम्मीद है कि एक बार फिर मुस्लिम वोटों का बंटवारा होगा. बसपा प्रमुख मायावती हर रैली में मुसलमानों को हिदायत देती दिख रही हैं कि वे समाजवादी पार्टी को अपना वोट देकर ‘बर्बाद’ न करें.

महिला वोट

2012 में पहली बार पुरुषों के मुकाबले महिला वोटरों की संख्या ज्यादा थी. आगरा में महिला वोटरों की संख्या में 23 फीसदी का इजाफा देखा गया, जो इस बार और बढ़ सकता है. यहां सपा को अपना खोया आधार महिला वोटरों की वजह से वापस मिल सकता है जो ‘अखिलेश की घरवाली’ डिम्पल यादव से खासी प्रभावित हैं और उनके आकर्षण के बारे में बातें करती हैं. 

पिछले बुधवार को जैतपुर कलां के रामपुर गांव में डिम्पल की रैली में जिले भर से सैंकड़ों लड़कियां और महिलाएं आई थीं. डिम्पल ने आगरा में तीन महिला उम्मीदवारों के समर्थन में तीन जगह रैलियां कीं और सारी रैलियों में अच्छी खासी महिलाओं की भीड़ देखने को मिली.

आगरा की एक कॉलेज छात्रा भारती यादव कहती हैं वे डिम्पल की वजह से ही सपा के लिए वोट करेंगी. वो यह भी कहती हैं कि ‘काश राहुल गांधी की भी डिम्पल जैसी ही प्यारी पत्नी  होती.’ कुछ महिला मतदाताओं ने नोटबंदी के कारण भाजपा से मुंह फेर लिया है. मनोला से शीला देवी कहती हैं, ‘हम हिन्दू हैं और भाजपा के लिए वोट करते आए हैं लेकिन नोटबंदी के चलते मेरे पति और दो बेटे बेरोजगार हो गए हैं. वे चमड़ा उद्योग में मजदूर हैं. मैं भाजपा को वोट नहीं दूंगी.'

मोटे तौर पर भले ही लग रहा हो कि आगरा में लहर भाजपा के पक्ष में है लेकिन मुसलमान वोटों के बंटवारे और महिला वोटों की अनिश्चितता के चलते आगरा भाजपा के हाथ से निकल सकता है. जो भी हो, आगरा का मुकाबला रोचक और देखने लायक होगा.

First published: 11 February 2017, 7:43 IST
 
प्रियता ब्रजबासी @PriyataB

Priyata thinks in words and delivers in pictures. The marriage of the two, she believes, is of utmost importance. Priyata joined the Catch team after working at Barcroft Media as a picture desk editor. Prior to that she was on the Output Desk of NDTV 24X7. At work Priyata is all about the news. Outside of it, she can't stay far enough. She immerses herself in stories through films, books and television shows. Oh, and she can eat. Like really.

पिछली कहानी
अगली कहानी