Home » उत्तर प्रदेश चुनाव » In gorakhpur, 20 candidates of Hindu Yuva Vahini and 8 rebels of BJP may halt Victory Rath
 

20 हिंदू युवा वाहिनी और 8 बागी उम्मीदवारों ने गोरखपुर में कस रखी है भाजपा की नकेल

अतुल चौरसिया | Updated on: 27 February 2017, 0:16 IST
(आर्या कुमार शर्मा/कैच न्यूज़)

'योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में चार साल दस महीने जातिवाद की राजनीति करते हैं और चुनाव के वक्त दो महीने हिंदुत्व की राजनीति करने लगते हैं. यह हथकंडा हर बार काम नहीं आता है. इस बार उनके खुद के चेलों ने उन्हें सिरे से दबोच लिया है. इस चक्कर में योगी की अपनी राजनीति संकट में फंस गई है. इस चुनाव के नतीजे भाजपा में उनके कद का निर्णय करेंगे,' एक राजनीतिक विश्लेषक यह बात कहने के साथ इस बात की ताकीद भी करते हैं कि उनका नाम न छपने पाए वरना युवा वाहिनी के लोग उन्हें परेशान करेंगे.

गोरखपुर और बस्ती मंडल में भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद हिंदू युवा वाहिनी ने 14 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं, छह सीटों पर बागियों को समर्थन किया है. उन्होंने नामांकन वापसी के बाद भी अपना टिकट वापस नहीं लिया है. कुछ इसी तरह की स्थिति भाजपा के अपने बागियों ने भी कर रखी है.

गोरखपुर मंडल के चार जिलों की कुल आठ विधानसभा सीटों पर भाजपा का सामना सपा-कांग्रेस और बसपा के अलावा अपने ही बागी उम्मीदवारों से है. जाहिर है ये उम्मीदवार मिलकर भाजपा की उम्मीदें कम करने का काम कर रहे हैं. नामांकन वापसी की तिथि खत्म होने के बाद भी पर्चा वापस नहीं लेकर इन उम्मीदवारों ने भाजपा का गणित गड़बड़ कर दिया है.

योगी आदित्यनाथ ने बयान देकर कहा था सारे लोग परचा वापस ले लें. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जवाब में योगी आदित्यनाथ ने वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह समेत कई पदाधिकारियों को वाहिनी से बाहर निकाले जाने का फरमान जारी कर दिया.

पार्टी बाहर करने के खिलाफ सुनील सिंह ने बगावती तेवर दिखाते हुए कहा मैं पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष हूं

इस फरमान के खिलाफ सुनील सिंह ने लगभग बगावती तेवर दिखाते हुए कैच से कहा, 'मैं पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष हूं. वाहिनी एक रजिस्टर्ड राजनीतिक संस्था है जिसका एक संविधान है. इसमें किसी शीर्ष स्तर के पदाधिकारी को बाहर करने का एक नियम कायदा है. सिर्फ एक प्रेस नोट जारी करके कोई मुझे पार्टी से नहीं निकाल सकता. पार्टी के महासचिव, महामंत्री और सभी पदाधिकारी मेरे साथ चुनाव मैदान में कैंपेन कर रहे हैं.'

वाहिनी की पूरी राजनीति के दो ध्रुव हैं. एक तो हिंदुवादी राजनीति और दूसरा इलाके की जातीय राजनीति जिसमें योगी युवा वाहिनी के माध्यम से ठाकुर राजनीति को आगे बढ़ाते हैं. शुरुआत में राजनीतिक विश्लेषक ने जिस जातिवादी राजनीति की तरफ इशारा किया है वह योगी और युवा वाहिनी की इसी ठाकुरवादी राजनीति की बात कर रहे थे. युवा वाहिनी के संगठन में ऊपर से नीचे तक राजपूत नेताओं और कर्मचारियों की नियुक्ति इसका एक प्रमाण है.

2002 से अस्तित्व में आने के बाद युवा वाहिनी लगातार चुनावों के इर्द-गिर्द अपनी ताकत दिखाती रही है. योगी आदित्यनाथ ने अक्सर इसका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग टूल के तौर पर भी किया. मसलन अपने लोगों को टिकट दिलाने आदि का. लेकिन एक हद से ज्यादा उन्हें इस काम में सफलता नहीं मिल सकी. दूसरे बार-बार वे अंत समय में पार्टी के दबाव के आगे झुकते भी रहे.

इस दोतरफा खेल में उनकी अपनी विश्वसनीयता पर भी संकट पैदा हो गया. जिन युवाओं की फौज उन्होंने वाहिनी के जरिए खड़ी की थी उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं लगातार सिर उठाती रही. चुनाव दर चुनाव वे तैयारी करते और अंत समय में योगी पार्टी के दबाव में चुनाव मैदान से हट जाते. राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं, 'योगी की दो नावों की सवारी (भाजपा ओर वाहिनी) के चलते वाहिनी के कार्यकर्ताओं की निराशा बढ़ती गई (2002, 2007 और 2012 विधानसभा चुनाव). आज उसी महत्वाकांक्षा ने खुद अपने ही रचयिता के खिलाफ सिर उठा लिया है.'

योगी की दो नावों की सवारी (भाजपा ओर वाहिनी) के चलते वाहिनी के कार्यकर्ताओं की निराशा बढ़ती गई है.

सुनील सिंह कहते हैं, 'योगीजी हमारे नेता थे. हमने भाजपा में उनके अपमान के कारण युवा वाहिनी का गठन किया. उन्हें चुनाव लड़ने के काबिल बनाया. 2002 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर सदर सीट से हमारे उम्मीदवार राधा मोहन अग्रवाल ने भाजपा के उम्मीदवार को हराया था. हमने भाजपा द्वारा योगीजी के अपमान के कारण युवा वाहिनी का गठन किया था. अब भाजपा ने उनके ऊपर जाने कौन सा काला जादू कर दिया है.'

सुनील सिंह योगी के जिस अपमान की बात करते हैं वह युवा वाहिनी और योगी के समर्थकों में एक आम धारणा है. सिंह के मुताबिक खुद योगी भी गाहे-बगाहे इस बात को व्यक्तिगत बातचीत में स्वीकार करते हैं. एक दिलचस्प वाकया है. मनोज तिवारी जो कि मौजूदा वक्त में दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं.

ज्यादा पुरानी बात नहीं है, साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मनोज तिवारी सपा के टिकट पर गोरखपुर से योगी के खिलाफ चुनाव लड़कर हार चुके हैं. आज वे भाजपा के एक प्रदेश के अध्यक्ष और सांसद भी हैं. इसी तरह तमाम ऐसे नए नवेले नेता हैं जिन्हें मोदी सरकार में मंत्री पद से नवाजा गया है जबकि योगी आदित्यनाथ पांच बार सांसद रहने के बावजूद सिर्फ एक सांसद हैं.

सिंह के शब्दों में, 'हिंदुओं को एकजुट करने का काम योगी करेंगे और उनके वोट पर राज भाजपा करेगी. वाहिनी की उत्पत्ति ही भाजपा के विरोध पर हुई है. आज योगीजी जाने किस दबाव में ऐसी बात कर रहे हैं.' हालांकि लगे हाथ सिंह यह भी जोड़ते हैं कि योगीजी हमारे गुरू थे और रहेंगे लेकिन उन्हें भाजपा से अलग होना पड़ेगा.

भाजपा का अपना सरदर्द

दूसरी तरफ भाजपा अपने बागी उम्मीदवारों से भी परेशान है. शीर्ष नेतृत्व की बात नकारने वाले आधा दर्जन से ज्यादा नेताओं को पार्टी से बाहर निकाला जा चुका है. इनमें पडरौना, सिसवा और शोहरतगढ़ से चुनाव लड़ रहे भाजपा के पूर्व कार्यकर्ता भी शामिल हैं.

टिकट वितरण में असंतोष के सुर भाजपा में पहले से ही दिख रहे हैं. तकरीबन हर सीट से भाजपा के बागी प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर गए हैं. इसकी एक बड़ी वजह दूरे दलों से भाजपा में आए नेताओं को टिकट देना है. दूसरी तरफ हिन्दू युवा वाहिनी ने अपने सरपरस्त योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बगावत करते हुए 14 स्थानों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं और छह स्थानों पर बागियों को अपना समर्थन दिया है.

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अखिरी समय तक बागियों को मनाने की कोशिश भी की लेकिन सफलता नहीं मिली. भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष अमित शाह, ओम माथुर, प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य ने तमाम बागी नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए कहा, लेकिन ज्यादातर नेता तैयार नहीं हुए.

हालांकि कुछ नेताओं ने जरूर अपना नामांकन वापस लिया. इसमें गोरखपुर के सहजनवा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे अश्विनी त्रिपाठी प्रमुख हैं. बरहज से पूर्व मंत्री के बेटे दीपक मिश्र भी मान गए. लेकिन कुशीनगर जिले की तमकुही सीट से नन्द किशोर मिश्र और श्रीकांत मिश्र को भाजपा नेतृत्व मना नहीं पाया. दोनों मजबूती से चुनाव लड़ रहे हैं. इसी जिले की पडरौना सीट से पूर्व सांसद रामनगीना मिश्र के बेटे परशुराम मिश्र, हिन्दू युवा वाहिनी के नेता पप्पू पांडेय भी चुनाव लड़ रहे हैं. खड्डा में हिन्दू युवा वाहिनी के अजय गोविन्द राव शिशु बागी बन गए. यह सूची काफी लंबी है.

भाजपा के बागी प्रत्याशी

  • कैम्पियरगंज- गोरख सिंह
  • पिपराइच- अनीता जायसवाल
  • नौतनवा- सदामोहन उपाध्याय
  • तमकुही- नन्द किशोर मिश्र , श्रीकांत मिश्र
  • खलीलाबाद- गंगा सिंह सैंथवार
  • पडरौना- परशुराम मिश्र
  • सिसवा- आरके मिश्रा
  • शोहरतगढ़- राधा रमण त्रिपाठी

हिन्दू युवा वाहिनी के उम्मीदवार

  • गोंडा सदर- महेश तिवारी
  • बस्ती सदर- सुधा ओझा
  • चौरीचौरा- वीरेन्द्र तिवारी
  • फरेन्दा- जितेन्द्र शर्मा
  • पनियरा- श्यामसुन्दर दास
  • खड्डा- अजय गोविंद राव शिशु
  • पडरौना- अजय कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय
  • हाटा- वृजमोहन वर्मा उर्फ कवि जी
  • रामपुर कारखाना- आनन्द शाही
  • मधुबन- देवेन्द्र सिंह परिहार
First published: 26 February 2017, 12:55 IST
 
अतुल चौरसिया @beechbazar

एडिटर, कैच हिंदी, इससे पूर्व प्रतिष्ठित पत्रिका तहलका हिंदी के संपादक के तौर पर काम किया

पिछली कहानी
अगली कहानी