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रामपुर: जहां आज़म ख़ान का काम बोलता है

सादिक नकवी | Updated on: 16 February 2017, 8:06 IST

 


रविवार को इस संवाददाता ने पूरे मुरादाबाद शहर के चक्कर काटे. ज्यादातर एटीएम के शटर बंद थे. उनमें से जो कुछ खुले भी थे, वहां तैनात गार्ड दूर से ही हाथ हिलाकर बता दे रहा था कि एटीएम में पैसे नहीं हैं. पैसों के लिए अपनी मोटरसाइकिल से पूरे शहर के एटीएम खंगाल चुके एक स्थानीय नौजवान ने कहा, 'साब, मैंने पूरे शहर के एटीएम छान डाले हैं. किसी में भी नोट नहीं हैं.'


जेब में पैसे न होने से लोगों में बेचैनी है और इससे भाजपा के खिलाफ उनका गुस्सा, नाराज़गी बढ़ी है. आज 15 फरवरी को मुरादाबाद और उससे सटे जिलों अमरोहा, सम्भल, रामपुर, बिजनौर आदि में दूसरे चरण का मतदान हुआ है. लोगों के गुस्से का असर मतदान पर दिख सकता है.

ज्वैलरी की दुकान चलाने वाले हरप्रीत कहते हैं कि ज्वैलर्स और ट्रेडर्स आपसे यह कह सकते हैं कि भाजपा के साथ उनका कोई मामला या दुराव नहीं है लेकिन वे भाजपा से नाराज हैं. उनका ज्वैलरी स्टोर प्रतिष्ठित रज़ा लाइब्रेरी से ज्यादा दूर नहीं है. वह सिलसिलेवार बताते हैं कि किस तरह उनका व्यापार बर्बाद हो गया. पहले तो एक फीसदी एक्साइज ड्यूटी से, जो राज्य सरकार के खाते में गई और इसके बाद नोटबंदी ने इसमें और इजाफा कर दिया.

 

शहर में कपड़े की दुकान चलाने वाले इकबाल खान, जिनका मुख्य काराबोर जरी का है, की तरह ही अन्य लोग भी नोटबंदी से त्रस्त हो गए हैं. इकबाल खान दावा करते हुए कहते हैं कि नोटबंदी के चलते हमें समय पर बैंकों से पैसा नहीं मिल सका. ऐसे में हम कारीगरों को कहां से उनकी मजदूरी देते. कई फैक्ट्रियां तो तभी से बंद पड़ी हुईं हैं.

 

आज़म ख़ान से टक्कर?


मुस्लिम बाहुल्य इस क्षेत्र में भाजपा बड़े खिलाड़ी के रूप में नहीं है. इस सीट से आजम खां विधायक हैं. वह राज्य सरकार में वरिष्ठ मंत्री भी हैं. आजम की पहचान मीडिया में अपनी विवादित और भड़काऊ टिप्पणियों के लिए भी है. वह खुद को मुस्लिम नेता कहते हैं. वह यहां बसपा के तनवीर खान की कड़ी चुनौती से जूझ रहे हैं.

हालांकि, हरप्रीत यह स्वीकार करते हैं कि आजम ने क्षेत्र में ढेर सारे काम कराए हैं. शहर में चौबीसों घंटे बिजली रहती है और सड़कें भी बेहतर हैं. उनके इन विचारों का समर्थन उनकी दुकान पर आए अन्य ग्राहक भी करते हैं. रफीक अहमद कहते हैं कि उन्होंने गरीबों को रिक्शे दिए हैं. अन्य योजनाओं के साथ ही पेंशन योजना, गरीबों के लिए आवासीय योजनाओं से लोग लाभान्वित तो हुए ही हैं.

हालांकि वह नवाब रजा अली खान के कार्यकाल की तरह से रोजगार के उतने साधन उपलब्ध नहीं करा सके हैं. खान के कार्यकाल में औद्योगिक इकाइयां शहर में आईं थीं. ठीक उसी तरह से जिस तरह से मोदी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स लगा रहे हैं.

हालांकि, रामपुर नवाबों का राज्य रहा है. अब यह रामपुरी चाकू के लिए जाना जाता है. आजम खां के क्षेत्र से भी इसे जाने जाना लगा है. वह रामपुर से ही विधायक हैं. स्थानीय लोगों का एक बड़ा वर्ग उनके द्वारा कराए गए कामों से उनका समर्थन करता है, पर एक वर्ग में उनकी गैर जिम्मेदाराना गतिविधियों के कारण भय का माहौल भी बना है.


सार्वजनिक रूप से नवाबों के परिवार, पूर्व सांसद नूरबानो तथा उनके पुत्र स्वार टांडा से विधायक काजिम अली खान को लेकर अनाप-शनाप उनकी टिप्पणियों को भी स्थानीय लोगों ने पसन्द नहीं किया है. समाजवादी पार्टी ने यहां से आजम खां के पुत्र अब्दुल्लाह आजम खां को खड़ा किया है.

ऐसे में जब काजिम अली खां के पुत्र हमजा अली खां ने शहर के किला इलाके में एक सार्वजनिक सभा में आजम खान की जड़ों पर हमला किया कि आजम खां के पिता नवाबों के घुड़साल में काम किया करते थे, तो सभा में मौजूद लोगों में से एक वर्ग ने उनकी काफी प्रशंसा की. सभा में मौजूद लोगों में से एक व्यक्ति ने कहा कि हमजा के भाषण ने रामपुर के लोगों के मन में बैठा डर निकाल दिया है.

आजम ने नवाबों के काल में शहर में बने कई गेटों की मरम्म्त कराने के बजाए उन गेटों को गिरवा दिया.


नवाब परिवार को लेकर आजम खान की नापसंदगी इतनी गहरी है कि शहरी विकास मंत्री का पद भार संभालने के बाद आजम ने नवाबों के काल में शहर में बने कई गेटों की मरम्म्त कराने के बजाए उन गेटों को ही गिरवा दिया. और वहां अपने नाम की पट्टिका के साथ नए गेट लगवाए. पश्चिम उप्र के एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता कहते हैं कि आजम तो रामपुर के नए नवाब हो गए हैं.

आजम की सबसे पसंदीदा परियोजना शहर के बाहरी इलाके की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनीवर्सिटी है. इस यूनीवर्सिटी ने शहर का नक्शा ही बदल दिया है. खां ने खुद को इस यूनीवर्सिटी का आजीवन चांसलर नियुक्त कर लिया है.


इस संवाददाता ने आजम खां के घर जाने का रास्ता एक स्थानीय व्यक्ति से पूछा तो उसने कहा कि आजम खां ने सभी सड़कों के नाम बदल दिए हैं. पुराने स्मारकों को गिरवा दिया है. संकेतों की तरफ आप आगे बढ़ते जाइए. इस व्यक्ति ने यह भी कहा कि सभी अच्छी सड़कें यूनीवर्सिटी की ओर जाती हैं. और यूनीवर्सिटी की ओर जाने वाला रास्ता शहर में से ही होकर गुजरता है जिस पर सभी मंत्रियों का ध्यान रहता है.

 

आज़म को क्यों पसंद करते हैं


अधिकांश लोग आजम के तौर-तरीकों को पसन्द नहीं करते. इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनका व्यापार आजम खाम के निर्देश पर शहर में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए जाने के कारण खत्म हो गया है.

मतदाताओं का यह वर्ग लम्बे समये से सत्तारूढ़ विधायक को पराजित करने के लिए बसपा प्रत्याशी की ओर देख रहा है. लेकिन लगता है कि यह आस आस ही रह जाएगी. शहर की जामा मस्जिद के बिल्कुल निकट एक साइकिल की दुकान पर साइकिल मरम्मत करने वाले हफीज खान की तरह लोग कहते हैं कि यदि हम अन्य दल के प्रत्याशी को शहर से चुनते हैं तो रामपुर में जो सहूलियतें मिली हैं, उससे हम सब हाथ धो बैठेंगे क्योंकि आजम उप्र कैबिनेट में ताकतवर मंत्री हैं.


वह यह भी कहते हैं कि बाजार की संकरी गलियों से एक मोटरसाइकिल रैली निकाली गई थी. रैली में शामिल लोग नारे लगा रहे थे-हर वोट पर लिख दो नाम, जय श्री राम, जय श्री राम. जीतने के बाद ये लोग पता नहीं क्या करेंगे और ऐसे लोगों को आज़म ख़ान ही काबू कर सकते हैं. 

 

स्वार टांडा विधान सभा क्षेत्र में स्थित सरस्वती शिशु मंदिर, टांडा में केन्द्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को सुनने आए हिन्दू जागरण मंच के एक कार्यकर्ता सुरेश सिंह कहते हैं कि हमने लोगों को पलायन के बारे में बताया है, आजम खां के जुल्मों के बारे में बताया है.

भाजपा को यहां उम्मीद है कि मुस्लिम वोटों के बंट जाने के कारण उसे भारी लाभ मिलेगा. सुरेश सिंह कहते हैं कि पड़ोसी स्वार टांडा क्षेत्र से चुनाव लड़ना तो और रुचिकर है. यहां आजम खां के पुत्र अब्दुल्लाह आजम और पूर्व
नवाब परिवार तथा पूर्व मंत्री काजिम अली खां के वंशज आमने-सामने हैं. 

अब्दुल्लाह के तेवर


इस बीच अपने पिता की तरह ही अब्दुल्लाह आजम भी नवाब परिवार को निशाने पर ले रहे हैं. नवाब काल के एक अर्दली का हवाला देते हुए अब्दुल्लाह दावा करते हैं कि रामपुर में कम साक्षरता के लिए नवाब जिम्मेदार हैं. उनके अनुसार कक्षा 8
के बाद पढ़ाई पूरी तरह प्रतिबंधित थी. इसीलिए उन्होंने यूनीवर्सिटी की शुरुआत की.

युवा और स्पष्ट रूप से अपनी बात कहने वाले अब्दुल्लाह ने इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. राजनीति में आने से पहले वह अपने पिता की यूनीवर्सिटी से सीईओ के रूप में जुड़ गए. नवाबों की तरह से अब्दुल्लाह भी ऑल इंडिया मज्लिस ए इत्तेहदुल मुसलमीन के असादुद्दीन ओवैसी से नाइत्तफाक रखते हैं.


वह कहते हैं कि उनकी पार्टी का क्या नाम है. मुझे तो पूरी तरह याद भी नहीं है. वह सवाल करते हैं कि ओवैसी ने उन
क्षेत्रों को ही क्यों चुना जहां पहले से ही मुस्लिम आबादी ज्यादा है. वह ऐसी सीट से चुनाव क्यों नहीं लड़ सकते जहां मुसलमानों की आबादी पांच फीसदी से भी कम है.

अब्दुल्लाह आगे कहते हैं कि दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम अब्दुल्लाह बुखारी ने भी बसपा को समर्थन देने की बात कही है. वह समय-समय पर सभी दलों को समर्थन देते रहे हैं. ऐसे में उनकी प्रासंगकिता में कमी आई है.

 

स्वार में आजम को चार बार विधायक रहे काजिम अली खान से कड़ी टक्कर मिली है. वह इस समय बसपा से उम्मीदवार हैं. स्वार के एक स्थानीय नागरिक रफीक अंसारी कहते हैं कि काजिम अली खान की आजम खां से अच्छी छवि है. वह आजम
खां की तरह अनाप-शनाप नहीं बोलते. हरेक के साथ सम्मान से पेश आते हैं और हमेशा सुलभ रहते हैं. बसपा के वोट बैंक का साथ उन्हें मिलता दिख रहा है.

 

रफीक अंसारी कहते हैं कि हाल में हुई अखिलेश यादव की रैली को मिलाकर आजम खां अभी तक अपने पुत्र के लिए केवल तीन बार ही रैली करने आए हैं. आजम को क्यों वोट देंगे, यह बताते हुए लकड़ी का काम करने वाले एक स्थानीय व्यवसायी तसलीम अहमद कहते हैं कि मुख्यमंत्री की यह घोषणा कि वे स्वार टांडा क्षेत्र को गोद लेंगे, स्थानीय लोगों में उम्मीद बंधी है.


कुछ लोगों का विश्वास है कि यदि वे आजम खां को चुनते हैं तो कस्बे का और विकास हो जाएगा. तसलीम यह भी कहते हैं कि स्वार के लोग तो यही चाहते हैं कि यह रामपुर बन जाए.

First published: 16 February 2017, 8:06 IST
 
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