Home » उत्तर प्रदेश चुनाव » Just before voting in eastern UP, High court ordered CBI probe in Jawaharbagh case
 

पूर्वांचल में मतदान से पहले निकला जवाहरबाग का जिन्न, सीबीआइ जांच का आदेश

अभिषेक श्रीवास्तव | Updated on: 3 March 2017, 12:52 IST
कैच न्यूज़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में छठवें चरण के मतदान से ठीक पहले गुरुवार को इलाहाबाद उच्च न्यादयालय ने मथुरा के जवाहरबाग कांड के सिलसिले में दाखिल एक याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए इस घटना की जांच सीबीआइ से कराने को मंजूरी दे दी है. पिछले साल जून में जवाहरबाग नामक सरकारी उद्यान में रह रहे जय गुरुदेव के हज़ारों अनुयायियों पर पुलिस ने कार्रवाई की थी जिसमें बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और कई लोग मारे गए थे. राज्य सरकार ने इसकी सीबीआइ जांच कराने की सिफारिश करने से इनकार कर दिया था.

अधिवक्ता व भारतीय जनता पार्टी दिल्ली प्रदेश के प्रवक्ता अश्विनी उपाध्यापय और मथुरा के वकील विजयपाल सिंह तोमर की याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने लंबी सुनवाई के बाद 20 फरवरी को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था. अब ठीक चुनावों के बीच आए इस फैसले को न केवल राज्य सरकार बल्कि पीड़ितों की ओर से भी संदेह की नज़र से देखा जा रहा है.

जवाहरबाग में जुटे हज़ारों लोगों के स्वयंभू नेता गाज़ीपुर निवासी रामवृक्ष यादव के वकील तरणी कुमार गौतम इस फैसले से बहुत उत्साहित नहीं है. उन्होंने बताया, 'हम लोग लंबे समय से पीड़ितों की ओर से मुकदमा लड़ रहे हैं. अब तक कई लोग अपने परिजनों से मिल नहीं पाए हैं. जाने कितने लापता हैं. जिन लोगों ने याचिका दायर की थी, उनकी राजनीतिक मंशा है. हमारी याचिकाओं को ठुकरा दिया गया.' पुलिस के मुताबिक रामवृक्ष यादव हिंसा में मारे गए थे.

अनुयायी सपा के पक्ष में

दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा चुनाव में जय गुरुदेव के अनुयायी समाजवादी पार्टी के पक्ष में काफी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं. सपा की किसी भी रैली और जनसभा में इन्हीं जय गुरुदेव के नारे वाली बंडियां पहने देखा जा सकता है. आज़मगढ़-मऊ के बीच सठियांव में राजमार्ग के किनारे जय गुरुदेव के एक अनुयायी मुरारी पान की गुमटी लगाते हैं. उनकी गुमटी पर समाजवादी पार्टी का बैनर टंगा है. पूछने पर वे बताते हैं, 'हम लोग पंकज बाबा के आदमी हैं.'

पंकज यादव और रामवृक्ष यादव दोनों ही जय गुरुदेव के शिष्य थे. मथुरा की हिंसा में रामवृक्ष की कथित मौत हुई जबकि पंकज यादव का आज मथुरा स्थित जय गुरुदेव के विशाल आश्रम पर कब्ज़ा है. उन्हीं के लोग सपा के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं. इनमें कोई भी रामवृक्ष गुट का नहीं है. मुरारी कहते हैं, ''रामवृक्ष लुटेरा था.'' यह पूछने पर कि वे लोग सपा का समर्थन क्यों कर रहे हैं, वे कहते हैं, ''सब लुटेरे हैं. शिवपाल भी लुटेरा है. हम लोग पंकज बाबा के कहे अनुसार काम कर रहे हैं. हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं.''

सच्चाई यह है कि जय गुरुदेव के ये दो धड़े शुरू से ही प्रदेश की राजनीति में लिप्त रहे हैं. रामवृक्ष यादव ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने लोगों के साथ फिरोज़ाबाद क्षेत्र में सपा के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव के पक्ष में प्रचार किया था. अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का मानना है कि पंकज यादव ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव की शह पर जय गुरुदेव की हजारो करोड़ की लागत वाली चल-अचल संपत्तियों पर कब्ज़ा किया. ध्यान रहे कि जय गुरुदेव के अंतिम संस्कार में पूरा समाजवादी कुनबा मौजूद था.

सीबीआइ की दो टीमें करेंगी जांच

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सीबीआइ की दो टीमें बनाने का निर्देश दिया है. एक टीम 2 जून को हुई हिंसा की घटना की जांच करेगी और दूसरी टीम जवाहरबाग की 300 एकड़ सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े की जांच करेगी. हिंसा के तुरंत बाद गौतम ने मथुरा के एसएसपी के समक्ष जो तहरीर पेश की थी और याचिकाएं दायर की थीं, उनमें पुलिस गोलीबारी में 600 लोगों के मारे जाने की बात की गई थी. इसके उलट मौजूदा याचिका में 300 लोगों की मौत की बात कही गई है.

मथुरा प्रशासन के मुताबिक 2 जून की हिंसक घटना में केवल 28 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन कैच न्यूज़ ने घटना के बाद पीड़ितों से मिलकर जिन रिपोर्टों की श्रृंखला प्रकाशित की थी उससे हकीकत कुछ और ही सामने आई थी. घटना के बाद कैच न्यूज़ पर रामवृक्ष यादव की पत्नी के प्रकाशित एक्सक्लूसिव साक्षात्का‍र में उन्होंने कहा था कि ''पुलिस ने मेरे पति के अस्तित्व को ही संदेह के घेरे में ला दिया है''. मथुरा की एक अदालत ने भी पुलिस से यह साबित करने को कहा था कि जिस लाश को वह रामवृक्ष यादव का बता रही है, उसका डीएनए मिलान करवाए.

मतदान पर असर?

ग़ाज़ीपुर में मतदान आखिरी चरण में 8 मार्च को है. अहम बात ये है कि जवाहरबाग में मारे गए ज्यादातर लोग पूर्वांचल के ही रहने वाले थे. पूर्वांचल में समाजवादी पार्टी के लोग इस विषय पर चर्चा करने से बच रहे हैं. ग़ाजीपुर सदर सीट पर सपा के लिए बूथ प्रबंधन के काम में लगे एक नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ''अगर इस जांच की आंच आएगी तो शिवपाल या रामगोपाल पर, इससे अखिलेश का क्या लेना-देना.''

अब तक जवाहरबाग कांड की कई गुत्थियां अनसुलझी हैं लेकिन सीबीआइ जांच का आदेश शायद कुछ हकीकत को सामने ला सके. इस फैसले का बचे हुए दो चरण के चुनाव पर कोई असर हो या नहीं, लेकिन चुनाव के बाद बहुत संभव है कि कुछ अहम पुलिसवाले और नेता जांच की चपेट में आ जाएं.

First published: 3 March 2017, 15:08 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी