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केशव प्रसाद मौर्या: 'बीमारों की मौत पर भी लोग हल्ला कर रहे हैं कि नोटबंदी से मरे'

अतुल चौरसिया | Updated on: 19 November 2016, 7:20 IST
QUICK PILL
  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी ने सूबे में अपना प्रचार अभियान तेज़ कर दिया है. 
  • पार्टी के यूपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ज़्यादा से ज़्यादा रैलियों में शामिल होकर पार्टी की जीत का मार्ग प्रशस्त करने में लगे हुए हैं. 
  • नोटबंदी पर तमाम घेराबंदी के बावजूद केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि हम इसे चुनावी मुद्दा बनाकर ज़मीन पर ले जाएंगे. 

उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव मौर्या इन दिनों बेहद व्यस्त है. प्रदेश में आसन्न चुनावों के चलते उनकी गतिविधियां बढ़ गई हैं. प्रदेश के चार हिस्सों में चल रही परिवर्तन यात्राओं ने उनकी व्यस्तता को और बढ़ा दिया है. अमूमन हर मंच से वो सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी के फैसले का जिक्र कर लोगों को खींचने की कोशिश कर रहे है. 

आजमगढ़ में अमित शाह की रैली में उन्होंने शहर को आतंक का अड्डा बता दिया. उनके पूरे चुनावी अभियान में एक छुपा हुआ कम्युनल टोन है. आजमगढ़ को आतंकवाद का अड्डा बताकर वो हिंदुओं को गोलबंद करना चाहते हैं. उनकी पार्टी ने एक नया इतिहास ढूंढ़ निकाला है जिसके मुताबिक आज़मगढ़ का पुराना नाम आर्यमगढ़ था, जिसे फिर से बहाल करने की जरूरत है. नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक समेत तमाम मुद्दों पर केशव मौर्या से अतुल चौरसिया की बातचीत.

साक्षात्कार

नोटबंदी के बाद लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. जनता का गुस्सा भी बढ़ रहा है. ऐसे में तो उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में आपके लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है.

जनता में कोई गुस्सा नहीं है. मैं दावे से कह रहा हूं कि मोदीजी के इस फैसले ने देशवासियों में खुशी पैदा की है. जिस दिन ईवीएम से वोटों का नतीजा निकलेगा तब आप देखेंगे कि इस फैसले का हमें कितना फायदा मिला है.

नोटबंदी से देश को कई स्तरों पर फायदा हुआ है. एक तो विदेशी आतंकवादी जिन्हें पाकिस्तान भारत भेजता है उनकी कमर टूट गई है, दूसरा नकली नोट चलाने वालों का धंधा बंद हो गया है, तीसरा काला धन रखने वाले सामने आ गए हैं.

कालेधन को लेकर आपकी पार्टी पर भी आरोप लग रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि प्रधानमंत्री की गाजीपुर रैली में जितने बड़े पैमाने पर खर्च हुआ वह नोटबंदी के इस माहौल में काले धन के बिना संभव ही नहीं है.

मैं सिर्फ एक लाइन में कहूंगा कि खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे. भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है. उसे काले धन की जरूरत नहीं है.

चुनाव से पहले नोटबंदी का असर आपके चुनावी अभियान पर भी पड़ सकता है. कुछ लोगों का आरोप है कि भाजपा ने अपने लोगों को पहले ही जानकारी दे दी थी और चुनावों के लिए अच्छा-खासा फंड जमा कर रखा है?

यह गलत बात है. चुनाव पर असर पड़ता है तो अच्छा है. पहली बार काले धन के बिना चुनाव होंगे. इससे अच्छा क्या होगा.

नोटबंदी की खबर सुनकर गोरखपुर में एक महिला की हार्ट अटैक से मौत हो गई. इस तरह की खबरें देश भर से आ रही हैं. क्या आपकी पार्टी ने उस परिवार से मुलाकात की या उसे किसी तरह की सहायता मुहैया करवाई?

पहली बात तो यह काम संबंधित राज्य सरकार का है. दूसरी बात किसी की मौत किसी भी वजह से होती है तो लोग कह देते हैं कि नोटबंदी की वजह से मौत हुई. किसी को हार्ट की बीमारी है, उसे हार्ट अटैक आया, उसकी मौत हो गई. इसका नोटबंदी से क्या मतलब?

तो आप कह रहे हैं कि उस महिला की मौत नोटबंदी के कारण नहीं हुई किसी और वजह से हुई?

देखिए जिनकी आप बात कर रहे हैं, उस मामले के बारे में मुझे ज्यादा कुछ नहीं पता है इसलिए मैं उस मामले पर कुछ नहीं कहूंगा लेकिन लोग किसी भी मौत को नोटबंदी से जोड़ दे रहे हैं. यह गलत है.

आपके सांसद योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र से वो महिला आती थीं. क्या पार्टी को पीड़ित परिवार के लिए कुछ नहीं करना चाहिए था?

हमारे यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. यह सरकार की जिम्मेदारी है.

कुछ दिन पहले तक सर्जिकल स्ट्राइक आपके लिए मुद्दा थी, अब नोटबंदी मुद्दा बन गई है. चुनाव में कौन सा मुद्दा प्रमुख रहेगा?

सर्जिकल स्ट्राइक हमारे लिए चुनावी मुद्दा नहीं है. यह हमारे देश के स्वाभिमान का मुद्दा है. मोदीजी के नेतृत्व में देश ने पाकिस्तान को करारा जवाब दे दिया है. हां, निश्चित रूप से हम नोटबंदी को लेकर जनता के बीच जाएंगे. सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में प्रधानमंत्रीजी ने भी कहा था कि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं हैं.

लेकिन आपने उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री के कहने के बावजूद रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर का अभिनंदन समारोह आयोजित किया. रैली आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया. यह चुनावी फायदा उठाने की नीति नहीं तो क्या है?

वह राजनीतिक आयोजन नहीं था. इतने साहसिक फैसले के लिए किसी को सम्मानित करना था. अब प्रधानमंत्रीजी हर आयोजन में आ नहीं सकते. सेनाध्यक्ष को हम पार्टी के मंच पर बुला नहीं सकते. लिहाजा रक्षामंत्री को हमने सम्मानित करने का निर्णय किया था.

दो दिन पहले आजमगढ़ में आपने अमित शाह के साथ रैली की. आपने कहा कि आज़मगढ़ पाकिस्तानी आतंकियों का गढ़ है. आपके पास इस बात का कोई सबूत है?

देखिए मैंने कहा था कि पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री है. वह हमारे देश में आतंकवादियों को भेजता है. उसका एक बड़ा अड्डा आज़मगढ़ है. मैंने यह नहीं कहा की पूरा आज़मगढ़ आतंकवाद का गढ़ है.

हां लेकिन आज तक आज़मगढ़ से गिरफ्तार एक भी युवक का संबंध पाकिस्तान से सिद्ध नहीं हुआ है. आप एक पूरे इलाके को आतंकवाद की फैक्ट्री के रूप में बदनाम कर रहे हैं इसके खतरे कितने बड़े हैं, आपको पता हैं. आप जैसे लोगों के बयान से वहां के अनगिनत लोग जो देश के दूसरे हिस्सों में, विदेशों में रहते हैं, उनके लिए जिंदगी दुश्वार हो जाती है.

मुझे आतंकवाद के मामलों के अदालती स्थिति के बारे में पता नहीं है. मैं केवल आजमगढ़ पर आरोप नहीं लगा रहा हूं. ऐसे तमाम इलाके हैं जहां पाकिस्तान से जुड़े आतंकी पनाह लिए हुए हैं. मैं सिर्फ आजमगढ़ को नहीं कह रहा.

क्या राम मंदिर आपके चुनावी अभियान का हिस्सा रहेगा.

राम मंदिर हमारे चुनाव अभियान में शामिल नहीं होगा. यह हमारी आस्था का मुद्दा है. हम चाहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो. चाहे अदालत के फैसले के जरिए हो या फिर आपसी समझौते के जरिए हो.

क्या आपकी पार्टी ने इस दिशा में कोई पहल की है?

नहीं हमने कोई पहल नहीं की है. लेकिन अगर मंदिर के पक्ष में आम सहमति से कोई फैसला आएगा तो हम उसे स्वीकार करेंगे. हम कोई पहल नहीं करेंगे.

क्या आप अपनी पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे?

हमारी कार्यकर्ता आधारित पार्टी है. यहां सभी फैसले के लिए संसदीय बोर्ड है. वही तय करता है कि पार्टी चुनाव में किसी चेहरे के साथ उतरेगी या बिना चेहरे के. यह परिस्थितियों पर निर्भर है, पार्टी समय और माहौल के हिसाब से रणनीति तय करती है. हमें लगा कि बिना चेहरे के हम जीत सकते हैं तो हमने महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में बिना मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चुनाव लड़ा. हमने असम में सर्बानंद सोनोवाल को चेहरा बनाकर भी चुनाव लड़ा. यह निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है. 

First published: 19 November 2016, 7:20 IST
 
अतुल चौरसिया @beechbazar

एडिटर, कैच हिंदी, इससे पूर्व प्रतिष्ठित पत्रिका तहलका हिंदी के संपादक के तौर पर काम किया

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