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जानिए 'समाजवादी दंगल' में किसके लिए दौड़ेगी 'साइकिल'

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 January 2017, 15:01 IST

समाजवादी पार्टी का दंगल अब लखनऊ से शिफ्ट होकर दिल्ली पहुंच गया है. जहां अगली लड़ाई साइकिल के लिए लड़ी जा रही है. पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह ने कहा है कि समाजवादी पार्टी मेरी है और इसका निशान भी मेरा है. हालांकि मामला इतना सीधा नजर नहीं आ रहा है. 

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक अब नई पार्टी के रजिस्ट्रेशन का वक्त निकल चुका है. कैच को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तीन-चार महीने पहले सपा के कुछ लोगों ने नई पार्टी के पंजीकरण के लिए संपर्क किया था, लेकिन मामला बाद में ठंडे बस्ते में चला गया.  

रविवार को रामगोपाल यादव के आपातकालीन राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन के बाद अब साफ हो गया है कि साइकिल पर एक नहीं दो दावे हैं. एक गुट वो है जो अखिलेश और रामगोपाल के समर्थन में है जबकि दूसरा गुट मुलायम और शिवपाल का है. हालांकि संख्याबल में अखिलेश साफ तौैर पर बहुमत में हैं, लेकिन मामला थोड़ा तकनीकी भी है. एक नजर कुछ संभावनाओं पर:

तो किसी को नहीं मिलेगी साइकिल?

1. मुलायम सिंह यादव चूंकि अब इस मामले को चुनाव आयोग ले जा चुके हैं, लिहाजा अब आयोग की तय प्रक्रिया के मुताबिक मामला आगे बढ़ेगा. 

2. इसके साथ ही चुनाव आयोग इस बात की जांच परख भी करेगा कि पार्टी राष्ट्रीय कार्यकारिणी या संसदीय बोर्ड के कितने सदस्य, विधायक, सांसद के अलावा पार्टी के कितने उम्मीदवार साथ हैं? चूंकि मुलायम की लिस्ट के समानांतर अखिलेश ने भी सूची जारी की. इसलिए यह भी तथ्य ध्यान में रखाी जाएगा. हालांकि अखिलेश के यहां ज्यादातर विधायक और उम्मीदवार पहुंचे थे.  

3. रामगोपाल यादव के आपातकालीन अधिवेशन के बाद अब सवाल ये है कि असली समाजवादी पार्टी कौन है, वह जिसके अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं या वह जिसका दावा मुलायम सिंह यादव कर रहे हैं. चुनाव आयोग इसका फैसला करेगा. लेकिन पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी का कहना है कि ऐसे में सिंबल फ्रीज होने के ज्यादा आसार हैं.

4. इस मामले में दोनों पक्ष कोर्ट भी जा सकते हैं. एस वाई कुरैशी का कहना है कि ऐसे मामलों का निपटारा करने में आयोग को तकरीबन चार से पांच महीने लग सकते हैं, यानी यूपी विधानसभा चुनाव के बाद ही अंतिम फैसला मुमकिन है. 

5. एसवाई कुरैशी के मुताबिक चूंकि अब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में अस्थाई नाम और सिंबल के साथ अखिलेश और मुलायम गुट को चुनाव में उतरना पड़ सकता है. कुरैशी का कहना है कि दोनों धड़ों को समाजवादी पार्टी (अखिलेश) और समाजवादी पार्टी (मुलायम) के नाम से चुनाव में उतरना पड़ सकता है और ऐसी सूरत में साइकिल चुनाव चिह्न से मुलायम और अखिलेश दोनों को महरूम रहना पड़ेगा.

First published: 2 January 2017, 15:01 IST
 
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