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मनोज सिन्हा इन 10 वजहों से बन सकते हैं यूपी के नए मुख्यमंत्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 March 2017, 11:10 IST
(फाइल फोटो)

गाजीपुर से सांसद और केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा यूपी के मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं. तीसरी बार सांसद बनने वाले मनोज सिन्हा अभी केंद्र सरकार में रेल राज्यमंत्री के साथ-साथ संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के ओहदे पर हैं. आख़िर मनोज सिन्हा का दावा क्यों पक्का माना जा रहा है इसके लिए ज़रा इन तथ्यों पर गौर कीजिए: 

1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के चहेतों में मनोज सिन्हा की गिनती होती है. पीएम मोदी पूर्वांचल इलाके में कई बार रैली के मंच से उनकी तारीफ़ कर चुके हैं. जब पीएम मोदी आरएसएस के प्रचारक थे, उस वक्त मनोज सिन्हा के गांव आते-जाते थे. इसके अलावा बतौर गुजरात सीएम पीएम मोदी ने गाजीपुर में उनका प्रचार किया था.

2. मोदी सरकार में सबसे पहले उन्हें रेल राज्यमंत्री बनाया गया था. उनके कामकाज से खुश होकर जुलाई 2016 में पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान संचार राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का अतिरिक्त जिम्मा भी उन्हें सौंपा.

3. पूर्वांचल को यूपी की सत्ता की सीढ़ी माना जाता है. मनोज सिन्हा इसी इलाक़े से आते हैं. पूर्वांचल के लिए पीएम मोदी और अमित शाह ने खास तौर पर मनोज सिन्हा को जिम्मेदारी सौंपी थी. पूर्वांचल के 25 जिलों की 141 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने इस चुनाव में 111 सीटों पर कब्जा जमाया है. 25 में से 10 ज़िले तो ऐसे हैं, जहां बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने सभी सीटों पर परचम लहराया है. 

4. पूर्वांचल ने प्रदेश को अब तक 11 मुख्यमंत्री दिए हैं. ज़ाहिर है इस इलाक़े से ही सूबे के ज़्यादातर मुख्यमंत्री बने हैं. यूपी में आख़िरी बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री रहे राजनाथ सिंह भी पूर्वांचल (चंदौली ज़िला) से ही आते हैं. राजनाथ ने अब तक साफ़ तौर पर सीएम की रेस में होने से इनकार किया है.

5. पूर्वांचल से एक नाम गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ का भी रहा है. हालांकि माना जा रहा है कि विवादित छवि की वजह से उन पर दांव खेलना बीजेपी पसंद नहीं करेगी. ऐसे में इस बार ग़ाज़ीपुर के मनोज सिन्हा की दावेदारी मजबूत लगती है.

6. मनोज सिन्हा लंबे अरसे से संघ के साथ-साथ बीजेपी के काडर से जुड़े रहे हैं. 1989 से वे भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं. ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी दोनों को उनके नाम पर दिक्कत नहीं है. 

7. मनोज सिन्हा निर्विवाद छवि के नेता माने जाते हैं. पिछले ढाई साल के दौरान बिना किसी विवाद में फंसे हुए मनोज सिन्हा ने मंत्री के रूप में काम किया है. माना जाता है कि पीएम मोदी ने उनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर काम करने की खुली छूट दी हुई है. पूर्वांचल में उन्होंने रेलवे से जुड़े हुए कई विकास कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है.

8. पीएम मोदी यूपी में जातिवादी राजनीति को तिलांजलि देने की अपील करते रहे हैं. मनोज सिन्हा भूमिहार जाति से आते हैं, जिसकी तादाद यूपी में ज्यादा नहीं है. हरियाणा में गैर जाट, महाराष्ट्र में गैर मराठा और झारखंड में गैर आदिवासी सीएम के बाद अब यूपी में मनोज सिन्हा को सीएम बनाकर बीजेपी और पीएम मोदी नया संदेश दे सकते हैं. 

9. मनोज सिन्हा साफ़-सुथरी छवि के हैं. गाजीपुर के मोहम्मदाबाद तहसील के मोहनपुरा गांव में जन्मे सिन्हा बेहद साधारण परिवार से आते हैं. कोई सियासी विरासत नहीं रही है. किसानों के बीच और पिछड़े इलाकों में काम का अच्छा-खासा अनुभव है. 

10. मनोज सिन्हा उच्च शिक्षित हैं. बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा एमटेक भी हैं. छात्र राजनीति से सियासत का ककहरा सीखने वाले मनोज सिन्हा 1982-83 में बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं. लिहाजा युवाओं की नब्ज को पकड़ने में माहिर हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी एक बार फिर यूथ पर फोकस कर रही है. ऐसे में यूपी के लिए मनोज सिन्हा तुरुप का इक्का हो सकते हैं.

First published: 18 March 2017, 10:35 IST
 
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