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मुलायम प्रचार करेंगे कहां, एक भी जिला इकाई ने प्रचार के लिए उनकी मांग नहीं की है

फ़ैसल फ़रीद | Updated on: 3 February 2017, 7:53 IST

उत्तर प्रदेश के इस विधानसभा चुनाव में अगर किसी राजनेता ने मीडिया को ठीक से काम पर लगाये रखा तो वो हैं मुलायम सिंह यादव. समाजवादी पार्टी के सियासी ड्रामे जिसमे अंत में अखिलेश यादव नए राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुलायम संरक्षक बन गए और इसमें मुलायम सिंह ने कितनी बार पलटी मारी, ये अब लोगों की समझ से बाहर हो गया है.

उनका ताजा बयान आया कि वो सपा-कांग्रेस गठबंधन से नाराज़ हैं और वो इसका विरोध करते हैं. मुलायम ने सख्त लहजे में कहा कि वो इस गठबंधन का प्रचार नहीं करेंगे. ज़ाहिर-सी बात हैं मुलायम अगले दिन सुर्खियों में थे. लेकिन दो दिन में वो तैयार भी हो गए कि सपा का प्रचार करेंगे और कुछ खबरों में तो 9 फरवरी की तारीख भी आ गयी कि इस दिन मुलायम सभा करेंगे.

मुलायम की उलटबासियों का जो भी मतलब हो लेकिन फिलहाल वो सपा के संरक्षक हैं और प्रचार करने का अधिकार भी है उनके पास. खुद अखिलेश ने कहा है कि वो नेताजी को प्रचार के लिए मना लेंगे. उनका नाम सपा की स्टार प्रचारक की सूची में मौजूद है.

कहां करेंगे प्रचार

फिलहाल सपा कार्यालय पर अभी भी किसी उम्मीदवार ने, जिनका चुनाव पहले और दूसरे फेज़ में है, मुलायम की सभा की डिमांड नहीं की है. सपा कार्यालय के लोग भले दावा करें कि नेताजी कहीं भी जा सकते हैं, लेकिन कोई कैंडिडेट उनको बुला ही नहीं रहा है. अलबत्ता मांग अखिलेश यादव और डिंपल यादव की मांग हर इकाई से आ रही है. सभी जगह उनको बुलाया जा रहा है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक शायद यह अहसास होने के बाद ही मुलायम सिंह ने अपने बयान में बदलाव किया है. यह बात आम है कि चुनावों के दौरान हर प्रत्याशी अपने निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के स्टार प्रचारकों द्वारा प्रचार करने का निवेदन पार्टी को भेजता है. इसके आधार पर पार्टी संंबंधित क्षेत्र में प्रचारकोंं के कार्यक्रम तय करती है. इस लिहाज से देखा जाय तो मुलायम सिंह यादव औऱ उनके भाई शिवपाल यादव के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है. पार्टी के एक करीबी सूत्र बताते हैं कि दोनों की सभा के लिए अब तक किसी प्रत्याशी ने मांग नहीं भेजी है.

मुलायम सिंह यादव को फिलहाल सपा ने अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल रखा है. लेकिन लिस्ट में पूरे यादव परिवार का नाम होने के बावजूद सिर्फ शिवपाल यादव का नाम गायब है. फिलहाल पार्टी ने मुलायम की किसी सभा की कोई जानकारी नहीं दी है.

जिस तरह से सपा का प्रचार चल रहा हैं उसमें भी मुलायम के लिए कोई ज्यादा गुंजाइश नहीं बचती. ये 2017 का चुनाव है जो पूरी तरह से अखिलेश पर केन्द्रित है. अखिलेश एक दिन में 4-5 सभा कर रहे हैं. वो अकेले जाते हैं, स्थानीय नेताओ को मंच पर जगह दी जाती है और लोकल कांग्रेस के नेताओं को भी बुलाया जाता है. अखिलेश हालांकि मुलायम का नाम लेते हैं और कहते हैं कि सरकार बनने पर वही सबसे ज्यादा खुश होंगे.

इससे पहले परंपरागत रूप से सपा में चुनाव प्रचार का शुभारंभ मुलायम ही किया करते थे. सन 2012 में वो आजमगढ़ में बारिश की वजह से सभा नहीं कर पाए तो बाराबंकी में अगली सभा में पहुंचे. इसके बाद 2014 के लोक सभा चुनाव में मुलायम ज़्यादातर आज़म खान के साथ 'देश बचाओ, देश बनाओ' रैली करने गए. इनमें से कई रैलियों में अखिलेश आज़म खान से पहले बोले इससे आजम का कद और बढ़ गया. चुनाव का चेहरा मुलायम ही होते थे.

वहीं इस बार भी नवम्बर 2016 में मुलायम सिंह ने चुनाव प्रचार की शुरुआत कर दी थी और एक रैली गाजीपुर फिर बरेली में संबोधित की. बस उसके बाद से सपा का झगड़ा बढ़ा और मुलायम की सभाएं भी ख़त्म हो गईं. बीच-बीच में खबर आती हैं कि मुलायम मंडल स्तर पर रैली करेंगे पर अबी तक एक भी नहीं हुई है.

अब जबकि पहले चरण की पोलिंग 11 फरवरी को है और मुलायम ने अभी तक कोई रैली भी नहीं की है. वो जाएं भी तो कहां जाएं क्योंकि उनकी मांग भी नहीं आ रही. हालांकि मुलायम अपने गढ़ इटावा, मैनपुरी वग़ैरह में प्रचार कर सकते हैं. दूसरी ओर वो अपनी बहु अपर्णा के लिए भी लखनऊ कैंट में वोट मांग सकते हैं.

अखिलेश-राहुल के रोड शो

सपा-कांग्रेस गठबंधन में ज्यादा जोर अखिलेश के साथ राहुल गांधी की सभा और रोड शो करवाने का है. पहला रोड शो लखनऊ में हो चुका है और दूसरा अगले दो दिन में आगरा में होगा. इसके अलावा ज्यादातर इलाकों से डिंपल और प्रियंका गांधी की मांग हो रही है. 

कहना ग़लत नहीं होगा कि समाजवादी पार्टी में लोकप्रिय नेता का चेहरा बदल चुका है और 25 साल की हो चुकी सपा में अब पोस्टर भी बदल गए हैं. ज्यादातर होर्डिंग्स अब अखिलेश और डिंपल की हैं. सोशल मीडिया पर भी मुलायम का ज़िक्र तभी हो रहा हैं जब वो अखिलेश के समर्थन में कुछ बोलते हैं. ऐसे में मुलायम का सभा न करना समझ में आता हैं क्योंकि शायद सपा अब अपने नए चेहरे के साथ जवान हो चुकी है.

First published: 3 February 2017, 7:53 IST
 
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