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मेरठ-मुज़फ़्फ़रनगर के सर्राफ़ा बाज़ार में नोटबंदी ने बिगाड़ रखी है भाजपा की बयार

सादिक़ नक़वी | Updated on: 10 February 2017, 7:53 IST

मेरठ के सर्राफ़ा बाज़ार में विनोद कुमार अपनी जूलरी शॉप पर खाली बैठे हैं. 8 नवंबर यानी कि नोटबंदी लागू होने के बाद से यहां के सर्राफ़ा बाज़ार का कारोबार मंदा पड़ गया है. विनोद कहते हैं कि हमने हमेशा भाजपा को वोट दिया लेकिन इस बार हम किसी दूसरे को वोट देने के लिए मजबूर हो गए हैं. 

सर्राफ़ा बाज़ार मेरठ विधानसभा सीट में है जहां से भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी विधायक हैं. इस बार समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रफीक़ अंसारी से उन्हें तगड़ी टक्कर मिल रही है. कारोबारी संजय अग्रवाल कहते हैं, 'यहां ज़्यादातर चुनाव में ध्रुवीकरण हो जाता है. वजह यहां दंगों का इतिहास है. इसी आधार पर यहां के लोग अपने-अपने धर्म के आधार पर मतदान करते हैं.' 

वह आगे कहते हैं, 'चूंकि अंसारी अकेले मज़बूत मुस्लिम उम्मीदवार हैं और दूसरी तरफ हिंदू उम्मीदवार बाजपेयी समेत कई हैं. ऐसी स्थिति में हिंदू वोटों का बंटवारा होगा और अंसारी की जीत की संभावना बढ़ जाएगी.' अग्रवाल बताते हैं, 'पिछले विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटर बंट गए थे और जीत बाजपेयी की हुई थी. मगर अब लोगों को एहसास हो गया है कि जीत के बावजूद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने आम आदमी के लिए कुछ नहीं किया.' 

नोटबंदी हराएगी?

इस बार बाजपेयी के लिए मज़बूत वोट बैंक जो कि कारोबारी वर्ग है, उसे बचाए रख पाना मुश्किल होगा. बिल्कुल यही हालात मुज़फ्फरनगर में भाजपा उम्मीदवार कपिल देव अग्रवाल के लिए देखने को मिला. यहां उनकी टक्कर वैश्य समाज के ही गौरव स्वरूप से है जो सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार हैं. मेरठ और मुज़फ़्फ़रनगर, दोनों ज़िले बुरी तरह से ध्रुवीकरण की चपेट में हैं और यहां मतदान 11 फरवरी यानी कि पहले चरण में किया जाएगा. 

मुज़फ़्फ़रनगर के कारोबारी सोमांश प्रकाश कहते हैं कि नोटबंदी के बाद से सवर्ण मतदाताओं में भी भाजपा के प्रति थोड़ा मोह कम हुआ है. इसका सीधा फायदा स्वरूप को जाएगा. स्वरूप के पिता इस विधानसभा का प्रतिनिधित्व पहले भी कर चुके हैं, इसका फायदा भी उन्हें ज़रूर मिलेगा. सदर बाज़ार के कारोबारी दीपक टंडन कहते हैं कि नोटबंदी की वजह से बड़े कारोबारी ज़्यादा गुस्से में हैं. 

वह कहते हैं, 'कारोबारियों में इस बात का भय है कि अगर भाजपा जीती तो जूलरी, संपत्ति आदि पर उनकी नीति कारोबारियों को फिर से परेशान कर सकती है.' काराबोरी भारत गर्ग कहते हैं कि स्वरूप की उम्मीदवारी की वजह से यहां का वैश्य समाज बंट गया है. 

पिछले चुनाव में स्वरूप इसलिए हार गए थे क्योंकि कांग्रेस के सलमान सईद ने अच्छा वोट हासिल कर लिया था. सईद कहते हैं कि इस बार उनका बेस वोट भी स्वरूप को जाएगा. इस सीट से हुए उप चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी. उप चुनाव में बसपा ने उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था और भाजपा को दलितों के वोट भी मिल गए थे. प्रवीण कश्यप कहते हैं कि इस बार बसपा के दलित वोटर भी भाजपा को झटका देंगे. 

सर्राफ़ा बाज़ार में भाजपा के ख़िलाफ़ गुस्सा साफ दिखता है. जूलर ओमप्रकाश अपनी दुकान में सो रहे थे और रिपोर्टर को देखकर बैठ गए. उन्होंने कहा, 'अच्छे दिन किसके आए. अगर मेरे पास काम होता तो क्या मैं इस वक्त सो रहा होता?' वह रिपोर्टर से पूछते हैं, 'आप यहां आधे घंटे से बैठे हैं, क्या आपने किसी ग्राहक को आते हुए देखा. ख़रीदना तो छोड़िए कोई दाम पूछने तक के लिए दुकान पर नहीं चढ़ रहा?

एक और जूलर बिहारी लाल कहते हैं, 'कारोबार के लिहाज़ से पिछला साल हमारा बेहद ख़राब गया है. पहले एक्साइज़ ड्यूटी के मुद्दे पर एक महीने तक अखिल भारतीय हड़ताल चली, और अब पिछले तीन महीने से नोटबंदी की मार झेल रहे हैं. यह शादी का सीज़न है लेकिन कारोबार कहां से करें?'

फायदा किसको, सपा या बसपा?

पिछले हफ्ते भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मेरठ में थे. उन्हें एक पदयात्रा में हिस्सा लेने के अलावा सर्राफ़ा बाज़ार में कारोबारियों को संबोधित करना था. बिहारी लाल एक चौक की तरफ़ इशारा करते हुए कहते हैं, 'वह गलियों में नहीं आए थे. वह बाज़ार में प्रवेश करने के बाद सीधे निकल गए थे क्योंकि इसी चौक पर उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी हो रही थी. लोकल मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष को फूलों का गुलदस्ता फेंकना पड़ गया था जो वह भाजपा अध्यक्ष का स्वागत करने के लिए हाथ में लिए हुए थे.'

बिहारी लाल कहते हैं,  'इसका सीधा फायदा सपा के उम्मीदवार को होगा. आधा कारोबारी समुदाया या तो सपा को वोट देगा या फिर कोई अन्य विकल्प तलाशेगा.' ओमप्रकाश कहते हैं, 'उन्हें लगा था कि नोटबंदी की योजना सफल साबित होगी लेकिन यह औंधे मुंह गिर गई है. सरकार को इतना बड़ा फैसला करने से पहले तैयारी करनी चाहिए थी.' ओमप्रकाश इस बात से भी दुखी हैं कि आखिर मेरठ में विकास के काम क्यों नहीं हुए.' 

जूलर मुन्ना लाल कहते हैं कि लोग बाजपेयी से भी नाराज़ हैं जिन्होंने एमएलए और भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अपने लोगों का ख्याल नहीं रखा. पहले जहां भी समस्या होती थी, वह नज़र आते थे लेकिन अब बुलाने पर भी वह कहीं दिखाई नहीं देते. 

योगी का सहारा?

इस बीच, मुज़फ़्फ़रनगर में भाजुा सांसद ने टाउन हॉल में एक भीड़ को संबोधित किया और कहा कि ज़रूरत है पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कश्मीर बनने से रोकने के लिए. बहुसंख्यक समुदाय का वोट अपनी तरफ खींचने के लिए भाजपा योगी का पूरा इस्तेमाल कर रही है लेकिन उनका असर सिर्फ उन्हीं इलाक़ों में दिख रहा है जहां लोग पहले से बंटे हुए हैं. 

वहीं कारोबारी रवि कश्यप कहते हैं, 'आमतौर पर लोग अच्छी चीज़ को आसानी से नहीं पचा पाते. सभी निचली जातियां, खटीक, कश्यप वगैरह भाजपा को वोट देंगे. हम नहीं चाहते कि हमारी औरतों का सड़कों पर उत्पीड़न हो.' कारोबारी प्रवीण कुमार सैनी कहते हैं कि नोटबंदी पूरी तरह सफल है. परेशानी बैंक के कर्मचारियों की वजह से उठानी पड़ी है. मोदीजी की इस पहले से काला धन ख़त्म हो गया है.' 

विनोद कहते हैं कि जब भी सपा उम्मीदवार ख़ासकर वह मुसलमान है और जीतता है तो अपराध बढ़ जाता है. वो ना तो पुलिस को कुछ समझते हैं और ना ही प्रशासन को. वो खुलेआम पुलिस को धमकियां देते हैं. प्रवीण कश्यप कहते हैं, 'सच यही है कि सिर्फ भाजपा ही व्यापारी वर्ग का ध्यान रखती है और हमारे पास भाजपा ही एक विकल्प है. 

First published: 10 February 2017, 7:53 IST
 
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