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यादव महल में तख़्तापलट: बाप बेदख़ल, चाचा के पर कतरे

अतुल चंद्रा | Updated on: 2 January 2017, 8:05 IST
(फ़ाइल फोटो )

राजनीति में ऐसे भूचाल लाने वाले परिवर्तन बहुत कम आते हैं. नव वर्ष के पहले दिन आए इस भूचाल में मुलायम सिंह यादव उस समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिए गए जिसे उन्होंने 25 साल तक अपने खून-पसीने से सींचा था.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के अनुसार अब पार्टी की कमान 43 वर्षीय मुख्यमंत्री पुत्र अखिलेश यादव के हाथों में होगी. जब 4 अक्टूबर 1992 में मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बने, तब उनकी उम्र 52 वर्ष थी.

अधिवेशन में मुलायम सिंह यादव को एक सजावटी पद रहनुमा का दे दिया गया. मुलायम सिंह अब पार्टी के रहनुमा और मार्गदर्शक होंगे. वहीं मुलायम सिंह यादव ने इस अधिवेशन को ही असंवैधानिक बताते हुए प्रतिक्रिया में रामगोपाल यादव को तीसरी बार पार्टी से निकाल दिया. रामगोपाल को पिछले तीन माह से कम समय में तीसरी बार पार्टी से निकाला गया है. रामगोपाल को पहली बार 23 अक्टूबर को पार्टी से निकाला गया था.

इतना ही नहीं इस अधिवेशन मेें बाग लेने वाले राज्यसभा सांसद किरणमय नंदा औऱ नरेश अग्रवाल को भी मुलायम सिंह ने पार्टी से निष्कासित करने का ऐलान कर दिया है.

पार्टी की संसदीय दल की बैठक के बाद उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक अब 5 जनवरी को आयोजित होगी.

शिवपाल यादव की छुट्टी

मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव, जिन्होंने मुलायम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी को खड़ा किया, इतने भाग्यशाली नहीं रहे. पार्टी विरोधी और अखिलेश विरोधी गतिविधियां चलाने के आरोप में शिवपाल यादव को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया. अधिवेशन में प्रस्ताव पारित किया गया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में वे पार्टी के संसदीय बोर्ड और दूसरे संगठनों को पुनर्गठित करें.

यह सुनिश्चित करने के लिए मुलायम सिंह की जगह उनका स्थान लेने को गलत नहीं समझा जाए, मुख्यमंत्री ने सफाई दी कि, नेताजी हमारे पिताजी हैं और रहेंगे. मैं पिता जी की बहुत इज्जत करता हूं और करता रहूंगा. हमारे बीच में कोई नहीं आ सकता. इसके बाद अधिवेशन में आए प्रतिनिधियों ने शिवपाल को पार्टी अध्यक्ष से हटाने के लिए दूसरी बार हाथ उठाए. 

तीसरे प्रस्ताव में अमर सिंह को खलनायक बनाते हुए फिर से पार्टी से बाहर निकाल दिया गया. इन दो नेताओं पर पार्टी के हितों को आघात पहुंचाने का आरोप लगाया गया. नवनिर्वाचित अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, इन दोनों ने मिलकर पार्टी के खिलाफ साजिश रचीं और मेरे पिता नेताजी के लिए कठिन स्थिति खड़ी कर दी.

सलाहकार रामगोपाल यादव?

अखिलेश ने उस दिन को याद किया जब उन्हे अक्टूबर 2016 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया था. अखिलेश ने बताया तब अमर सिंह ने विशेष रूप से कार्यालय से वह टाइपराइटर मंगाया था जिससे उनको हटाने का लेटर टाइप हो जाए. अखिलेश ने सावधान करते हुए कहा कि अगले दो माह पार्टी के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं.

पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव तो यहां तक कह गए कि शिवपाल यादव ने नेताजी के आदेश की अवहेलना करते हुए उनके नाम का गलत इस्तेमाल करते हुए लोगों को टिकट दिए. रामगोपाल यादव ने कहा, 'वे नहीं चाहते थे कि पार्टी फिर से सत्ता में आए. अधिवेशन में ये सभी प्रस्ताव रामगोपाल यादव ने पेश किए. रामगोपाल अब षड्यंत्रकारियों के खिलाफ संघर्ष में अखिलेश के मुख्य राजनीतिक सलाहकार के रूप में उभरे हैं.'

वैधता पर सवाल

रविवार को लखनऊ के जनेश्वर पार्क में आयोजित किए गए इस अधिवेशन को मुलायम सिंह यादव ने एक घंटे पूर्व ही अवैध घोषित कर दिया था. 29 दिसंबर को अखिलेश और रामगोपाल यादव को पार्टी से निकालते हुए भी मुलायम सिंह यादव ने इस कन्वेंशन को अवैध बताया था.

मुलायम सिंह यादव के अनुसार यह कन्वेंशन बिना उनकी अनुमति के बुलाई गई है इसलिए वैध नहीं है और इसमें भाग लेना अनुशासनहीनता माना जाएगा. ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी.

लेकिन अधिवेशन में अधिकांश प्रमुख नेताओं की मौजूदगी यह बता रही थी कि नेताओं ने मुलायम सिंह की बात को गंभीरता से नहीं लिया है. अधिवेशन में नरेश अग्रवाल,किरणमय नंदा तथा अधिकांश मंत्रियों ने हिस्सा लिया. अपने कहे अनुसार अधिवेशन में भाग लेने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय अब मुलायम ने इसी सप्ताह दूसरे राष्ट्रीय कन्वेंशन को बुलाने की घोषणा की है. 

वहीं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद शिवपाल अपने कुछ समर्थकों के साथ लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे. माना जा रहा है कि शिवपाल जल्द ही जवाबी हमला बोलेंगे.

पिछले कुछ घंटों में पार्टी में जिस तरह के मोड़ और रास्ते में बदलाव आए हैं उसने राजनीतिक विश्लेषकों को सोच में डाल दिया है. इस बीच में दो ऐसे मौके आए जब शिवपाल ने आगे बढ़कर प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की. लेकिन मुलायम सिंह ने कन्वेंशन आरंभ होने के पहले इस इस्तीफे को स्वीकार करने इंकार कर दिया.

अब क्या करेंगे मुलायम

इन सब स्थितियों को देखते हुए अब नजर इस पर होगी कि आगे इस फैमिली ड्रामा में मुलायम की क्या भूमिका होगी. शुक्रवार को मुलायम सिंह ने रामगोपाल यादव और अखिलेश को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया था. 

लेकिन शनिवार को अखिलेश ने अधिकांश विधायकों को साथ लाकर अपनी जो ताकत दिखाई, उसे देखते हुए मुलायम 24 घंटे के अंदर दोनों को पार्टी में वापस लेने के लिए मजबूर हो गए. यह माना गया कि मुलायम ने दोनों को वापस आजम खान के कहने पर लिया. अमर सिंह के पक्के विरोधी माने जाने वाले आजम राज्य की सरकार में नगर विकास मंत्री हैं.

दोनों को पार्टी से निकाले जाने को रद्द किए जाने की घोषणा पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने उदास दिख रहे शिवपाल यादव ने की थी. शिवपाल ने कहा था, 'पार्टी में सब ठीक है और आप सब लोग वापस जाओ और चुनाव की तैयारियों में जुट जाओ.'

लेकिन यह सब करके भी अखिलेश को इस बात के लिए नहीं मनाया जा सका कि अधिवेशन नहीं बुलाया जाए. रामगोपाल यादव ने स्पष्ट कर दिया कि अधिवेशन पूर्व घोषणा के अनुसार ही होगा. और अधिवेशन हुआ, जो कि मुलायम और शिवपाल के लिए अच्छा नहीं रहा.

First published: 2 January 2017, 8:05 IST
 
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