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पीएम मोदी का सवाल- 'क्या फोन पर तीन तलाक से हमारी मुस्लिम बेटियों की जिंदगी चलेगी?'

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 October 2016, 14:45 IST
(ट्विटर)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के महोबा में बुंदेलखंड परिवर्तन महारैली को संबोधित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने विवादित तीन तलाक के मसले का जिक्र करते हुए मुस्लिम महिलाओं को समान हक दिलाने की बात कही.

पीएम नरेंद्र मोदी ने सवालिया लहजे में कहा, "क्या टेलीफोन पर तीन तलाक देकर हमारी मुस्लिम बेटियों और महिलाओं की जिंदगी आगे चलेगी?"  

'मुस्लिम महिलाओं को समानता का हक मिले'

पीएम मोदी ने महोबा रैली में कहा, "मुसलमान माताओं और बहनों को समानता का अधिकार मिलना चाहिए, मुसलमान माताओं और बहनों पर किसी भी प्रकार का अत्याचार नहीं होना चाहिए."

पढ़ें: तीन तलाक़: सरकार के शपथपत्र से सरगर्म हुई मुस्लिम राजनीति

इस दौरान पीएम मोदी ने तीन तलाक के मुद्दे पर मीडिया को तूल न देने की अपील की. पीएम ने कहा, "मैं मीडिया से आग्रह करता हूं कि ट्रिपल तलाक को सत्ता और विपक्ष का मुद्दा ना बनाएं."

तीन तलाक के खिलाफ हलफनामा

मोदी सरकार ने हाल ही में तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था. इस हलफ़नामे में कहा गया है कि भारतीय मुस्लिम समाज में चल रही तीन तलाक़ की व्यवस्था महिला अधिकारों के खिलाफ है, लिहाजा इसे ख़त्म किया जाना चाहिए.

वहीं उलेमाओं और इस्लाम के विद्वानों ने इसे मज़हबी मामलों में दख़लअंदाज़ी मानते हुए अपनी भौंहे चढ़ा ली हैं. इस्लामिक क़ानून की भारत में सर्वोच्च संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सरकार के शपथपत्र का पुरज़ोर विरोध करते हुए इसे मुसलमानों के निजी मसाइल पर हमला बताया है. 

वोट बैंक की राजनीति के लिए हलफनामा

बोर्ड की कार्यकारी समिति के सदस्य और ऐशबाग़ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली कहते हैं, "यह मुसलमानों पर सीधा हमला है और हम संविधान के दायरे में रहते हुए इसकी पुरज़ोर मुख़ालिफ़त करेंगे. जब कुछ राज्यों में जन जातियों के लिए संविधान में संशोधन हो सकता है तो मुसलमानों का अपना पर्सनल लॉ क्यों नहीं हो सकता?."

पढ़ें: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का हलफनामा- तीन तलाक को चुनौती देना गलत

फिरंगी महली के मुताबिक़ सरकार ने यह हलफ़नामा वोट बैंक की राजनीति को ध्यान में रखते हुए दाख़िल किया है. उनका कहना है, "इस्लाम में औरतों की बराबरी पर गलत तस्वीर पेश की जा रही है. हमारा मज़हब मर्द और औरत, दोनों को बराबर का हक़ देता है. अगर सरकार समान नागरिक संहिता का मुद्दा उठाना चाहती है, तो साफ़-साफ़ बोले. और फिर उन हिंदू औरतों का क्या होगा जो पिछले 10 साल से अदालत में तलाक़ का अधिकार हासिल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं?"

First published: 24 October 2016, 14:45 IST
 
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