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राहुल गांधी का देसी अवतार: जे हुई ना बात भैया

भारत भूषण | Updated on: 3 March 2017, 18:54 IST

लाउडस्पीकरों पर चुनावी संगीत गूंज रहा है- ‘जे हुई ना बात भैया, जे हुई ना बात! अब तो अखिलेश का है साथ भैया, जे हुई ना बात.’ सभास्थल के मंच पर लगे बैनरों पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव की तस्वीरें नहीं हैं, सोनिया गांधी और मुलायम सिंह यादव की हैं. साथ में नारा भी कि यूपी को ये साथ पसंद है! पोस्टरों के नीचे राहुल गांधी और अखिलेश की तस्वीरें हैं.

मंच पर राहुल गांधी के आते ही लोग चुप हो जाते हैं. नारों का बजना भी बंद हो जाता है. राहुल गांधी अपनी बात शुरू करते हैं, 2014 में एक फिल्म लॉन्च हुई थी. जिसे ‘अच्छे दिन’ कहा गया था. ढाई साल बाद जब फिल्म पूरी हुई, उसका नाम बदल कर ‘शोले’ रख दिया गया. और तब हम समझे कि ‘अब तो गब्बर सिंह आ गया.’ तालियों और ठहाकों से सभास्थल गूंज उठता है.

राहुल गांधी पिंडरा में बोल रहे थे. यह निर्वाचन क्षेत्र बनारस से सटा हुआ है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, अजय राय के लिए कैंपेनिंग कर रहे हैं, जो कांग्रेस-समाजवादी पार्टी गठबंधन के उम्मीदवार हैं. जैसे ही गांधी बोलचाल की हिंदी बोलते हैं, लोग सम्मोहित हो जाते हैं. राहुल कहते हैं, ‘जब आप फिल्म बनाते हैं, तो उसके लिए निर्देशक, हीरो, हीरोइन और गायक कलाकार लेते हैं. उसके लिए शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और कोई गायक हो सकता है. पर एक आदमी है, जो ऐसी फिल्म बनाता है, जिसमें वो ही हीरो, वो ही निर्देशक, वो ही फोटोग्राफर और वो ही गाना भी गाता है.’ राहुल की बात पर लोग फिर हंसने लगते हैं.

राहुल लोगों से पूछते हैं, ‘नोटबंदी के लिए मोदीजी का क्या सिद्धांत था?’ और फिर खुद ही लोगों की प्रसन्नता के लिए जवाब देते हैं, ‘गरीबों से पैसा खींचो और अमीरों को सींचो.’

राहुल का कायाकल्प

साल भर पहले तक कोई नहीं सोच सकता था कि कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से इस तरह के व्यंग्य भी कर सकते हैं और लोग उनकी बातें सुन कर ठहाके भी लगा सकते हैं. राहुल गांधी में यह असाधारण बदलाव आया है. उनकी कैंपेन की स्टाइल पहुंच से बाहर नहीं है. भाषा में गहराई है, स्थानीय मुहावरों, हाव-भाव और उनके नजरिए से संपन्न है.

आज वे अपनी बात को ग्रामीणों और अर्ध शहरी श्रोताओं के सामने पहले से ज्यादा असरदार तरीके से रखने में समर्थ हैं. राजनीतिक बातों की अभिव्यक्ति असरदार बनाने के लिए अपने भाषणों में प्रचलित सांस्कृतिक संदर्भों का समावेश बखूबी करते हैं. राजनीतिक संदेश के लिए प्रचलित संस्कृति का इस्तेमाल भारतीय राजनीति में नया नहीं है. यह राहुल गांधी के लिए नया है.

राहुल कहते हैं, ‘जब मोदी को लगता है कि वे चुनाव हारने वाले हैं, तो लोगों में फूट डालने वाली बातें करने लगते हैं और वे ऐसा उत्तर प्रदेश में कर रहे हैं.’ राहुल लोगों को आश्वस्त करते हैं कि यह रणनीति यूपी में नहीं चलेगी और साहिर लुधियानवी का गीत गुनगुनाने लगते हैं, ‘ना हिंदू बनेगा, ना मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा.’ और उनकी बात पर लोग फिर हंसने लगते हैं.

मोदी का मज़ाक

भाजपा की धार्मिक असहिष्णुता पर आधारित संकुचित नजरिए के विपरीत साहिर लुधियानवी का गीत सहिष्णु और मानवता की पहचान का जरिया बन जाता है. 2014 के आम चुनाव के नरेंद्र मोदी के दावे का मजाक उड़ाते हुए राहुल गांधी कहते हैं कि उन्होंने खुद को ‘मां गंगा’ का बेटा बताया और कहा कि मां गंगा ने उन्हें बनारस बुलाया है. राहुल ने पूछा, ‘पूरे हिंदुस्तान में मां गंगा को एक ही बेटा मिला क्या? और वो भी गुजरात से? बाकी लोग मां गंगा के बेटे नहीं हैं क्या?’

वे आगे कहते हैं, ‘और फिर इस बेटे ने मां गंगा के साथ ‘सौदेबाजी’ शुरू कर दी. उन्होंने मां गंगा से कहा, एक सौदा करते हैं. आप मुझे पहले प्रधानमंत्री बना दें, फिर मैं आपको साफ करूंगा.’ ‘सौदेबाजी’ शब्द के इस्तेमाल में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की छवि चलते पुर्जे की बना दी. इससे फर्क नहीं पड़ता कि यह सच है या नहीं, पर यह निश्चित रूप से चतुराई भरी राजनीति है. अंतत: राहुल गांधी ने बड़े ही प्रभावी ढंग से व्यक्तिगत तानों पर आ गए हैं, जो पहले मोदीजी उन पर कसते रहे हैं.

राहुल गांधी ने मोदीजी के एक और दावे की धज्जियां उड़ा दी कि वे यूपी के दत्तक पुत्र हैं. उन्होंने बॉलीवुड संवाद लेखक के अंदाज में कहा, ‘रिश्ता जताने से नहीं, निभाने से बनता है!’ एक बार फिर भीड़ करतल ध्वनि के साथ राहुल की जय-जयकार कर रही थी. सार्वजनिक रूप से जिस तरह से उन्होंने राजनीतिक भाषण दिया, उससे लगता है कि चुनावों के अंत में राहुल गांधी पहले से कहीं ज्यादा परिपक्व और प्रभावी राजनीतिक वक्ता के रूप में उभर रहे हैं, भले ही यूपी में नतीजे कुछ भी रहें.

जैसे ही राहुल गांधी ने अपना भाषण पूरा किया, लाउडस्पीकरों का संगीत फिर शुरू हो जाता है, ‘जे हुई ना बात भैया, जे हुई ना बात भैया’. और लोग उन नारों को गाते-नाचते सभा स्थल से निकल रहे हैं.

First published: 4 March 2017, 8:19 IST
 
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