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राजनाथ सिंह: जीत की उम्मीद है मगर दावा नहीं

भारत भूषण | Updated on: 2 March 2017, 18:52 IST

वे हमेशा की तरह सफेद कड़क धोती-कुर्ते में थे, पर उनका चेहरा दिनभर की थकान से स्याह पड़ गया था. भारत के गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह पूरे दिन की कैंपेनिंग के बाद थके हुए लग रहे थे. चेहरे से दिन भर की थकान को पोंछते और मुस्कराते हुए वो कहते हैं, ‘आज मैंने चुनाव कैंपेन की 111वीं जनसभा संबोधित की है.’ उनका दावा है कि भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलेगा. राज्य में पार्टी के सबसे बड़े नेता से चुनाव के बीच कुछ और कहने की भला क्या उम्मीद की जा सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मऊ में मतदाताओं को अपनी रैली में आगाह किया था कि वे त्रिशंकु विधानसभा को वोट नहीं दें, इसके बावजूद सिंह कहते हैं कि बंटे हुए मत का कोई प्रश्न ही नहीं उठता. वे घोषणा करते हैं, ‘यूपी विधानसभा त्रिशंकु नहीं होगी. मैं यह साफ देख सकता हूं.’

आम चुनाव जैसा उत्साह

आप निश्चित तौर पर कैसे कह सकते हैं? ‘बतौर राजनेता मैं भीड़ के उत्साह से भांप सकता हूं. हमारी जनसभाएं निर्वाचन क्षेत्रों के हिसाब से संगठित हैं और लोगों की ऊर्जा और नारेबाजी आपको काफी कुछ कह सकती है. मैं 2014 (के आम चुनाव) जैसा ही उत्साह देख रहा हूं. कुछ नहीं बदला है.’

राजनाथ कहते हैं कि चुनाव भाजपा के पक्ष में जा रहा है क्योंकि सभी गैर-यादव ओबीसी या अति-पिछड़ा और अति दलित भारी संख्या में पार्टी को वोट कर रहे हैं. वे इस बात पर जोर देते हैं, ‘भाजपा मेरे फार्मूले पर लौट आई है. 2001 में बतौर मुख्यमंत्री मैंने अति-पिछड़ा के लिए ओबीसी कोटे में नौकरियों के लिए आरक्षण और एससी/एसटी कोटे में अति-दलित के लिए आरक्षण शुरू किया था. मैंने सरकारी नौकरियों में नए मानदंडों पर लोगों का चुनाव किया है, पर तब मायावती (राज्य में) सत्ता में आ गई और फैसला उलट दिया. आज वे सब हमारे साथ हैं.’

जब उनसे नरेंद्र मोदी की संप्रदायों में फूट डालने वाली भाषा पर सवाल किया, तो वे जवाब में कोई चूक नहीं करते, ‘वे यह कहना चाहते थे कि हम जाति, समुदाय या धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेंगे. हमारे और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए यह भ्रांति तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियों ने फैलाई है. आप देखेंगे कि समय के साथ यह भी गायब हो जाएगी,’ सिंह का चेहरा बिल्कुल सपाट था.

अल्पसंख्यकों से एलर्जी नहीं

अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी पर आरोप कि उसने अल्पसंख्यकों के त्योहारों पर ज्यादा और हिंदू त्योहारों पर कम बिजली दी. क्या यह आरोप मतदाताओं में सांप्रदायिक फूट डालने की मंशा से नहीं है? राजनाथ सिंह हंसते हैं और सवाल को मोड़ देते हैं, ‘अरे भाई, अखिलेश ने बिजली दी किसको है? पर लोगों का मानना है कि वे अल्पसंख्यकों का वोट पाने की कोशिश कर रहे हैं. हम यह जोर देकर कहना चाहते हैं कि हम किसी के साथ भेदभाव नहीं करेंगे. हम अपना यही नजरिया रखना चाहते हैं.’

आपने यूपी में एक भी मुसलमान उम्मीदवार खड़ा नहीं किया? सिंह कहते हैं, ‘हमें अल्पसंख्यकों से एलर्जी नहीं है. शुरू में चुनाव थोड़े मुश्किल लगे इसलिए उस समय (उम्मीदवार के चुनाव का) मुख्य मानदंड यह था कि उसे खड़ा करेंगे, जिसमें जीतने की सामर्थ्य है.’ शुरू में चुनाव मुश्किल क्यों लगा? ‘क्योंकि मीडिया ने सपा-कांग्रेस के लिए काफी हल्ला मचा दिया था. पर जब फील्ड में गए तब पता चला कि चुनाव हमारे पक्ष में था.’

सिंह नोटबंदी का भी जबर्दस्त पक्ष लेते हैं. कहते हैं, ‘नोटबंदी से हमें मदद मिली है. यह राजनीतिक फैसला बिलकुल नहीं था, पर हमारे विपक्षियों ने उसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया. लोग हमारा समर्थन करते हैं. वे समझते हैं कि नोटबंदी काला धन, भ्रष्टाचार और आतंकियों को आर्थिक मदद करने के खिलाफ है.’

तभी वहां एक टीवी पत्रकार आए, जो राज्य में काफी समय से चुनावी कैंपेन को कवर कर रहे थे. राजनाथ सिंह उनका अभिवादन करते हैं और भाजपा की जीत के बारे में कुछ कहने से पहले पूछते हैं, ‘दौरे के बाद आपका क्या आकलन है?’ जाहिर है, अनुभवी राजनेता भी इस बार के नतीजों के बारे में पहले से कुछ नहीं बता पा रहे हैं.

First published: 3 March 2017, 7:29 IST
 
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