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रामगोपाल यादव की सपा में वापसी, मुलायम ने सभी पदों पर किया बहाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 November 2016, 10:12 IST
(एएनआई)

समाजवादी पार्टी के पारिवारिक विवाद में नया मोड़ आ गया है. पिछले महीने पार्टी से छह साल के लिए निकाले गए प्रोफेसर रामगोपाल यादव की सपा में वापसी हो गई है. सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने खुद चिट्ठी लिखकर इसका एलान किया है.

सपा के राज्यसभा सदस्य रामगोपाल यादव को उनकी चिट्ठी के बाद पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. इस चिट्ठी में रामगोपाल यादव ने इशारों में सपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव पर निशाना साधा था.

'नेताजी की कृपा से वापसी'

रामगोपाल ने फैसले पर खुशी जताते हुए समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "ये तो होना ही था, पार्टी में वापसी नेताजी की कृपा है. नेताजी कभी मेरे खिलाफ नहीं थे."

पार्टी के फैसले पर प्रसन्न प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने कहा, "मैं तो घर में ही था. टेक्निकली पार्टी से निकाल दिया गया था पर मैं तो पार्टी में हमेशा से था."

इसके साथ ही रामगोपाल यादव ने यह भी कहा है कि उन्होंने कभी पार्टी विरोधी कोई काम नहीं किया. रामगोपाल यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 23 अक्तूबर को निकाल दिया गया था. शिवपाल यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका एलान किया था.

शिवपाल: बीजेपी से मिले हैं रामगोपाल

रामगोपाल यादव ने कहा, "मैं कभी भी पार्टी लाइन के खिलाफ न तो कुछ किया है और न ही कहा है." रामगोपाल को पार्टी से निकालते वक्त शिवपाल यादव ने कहा था कि उन्होंने सीबीआई से बचने के लिए बीजेपी के बड़े नेता से मुलाकात की थी.

यही नहीं शिवपाल यादव ने रामगोपाल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा था कि उनके बेटे और बहू भी नोएडा के यादव सिंह मामले में फंसे हैं, इसीलिए रामगोपाल ने बीजेपी से हाथ मिलाकर सपा के खिलाफ साजिश रची है.

एएनआई

मुलायम की चिट्ठी

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने 17 नवंबर को प्रेस विज्ञप्ति के रूप में जारी इस चिट्ठी में लिखा, "प्रोफेसर रामगोपाल यादव का समाजवादी पार्टी से किया गया निष्कासन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है."

इस चिट्ठी में आगे लिखा गया है, "प्रोफेसर रामगोपाल यादव राज्यसभा में समाजवादी पार्टी संसदीय दल के नेता, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव/प्रवक्ता तथा पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड सदस्य के रूप में कार्य करते रहेंगे."

रामगोपाल यादव की इस चिट्ठी आने के बाद 23 अक्तूबर की शाम को उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था. (ट्विटर)

चिट्ठी से उठा था तूफ़ान

इससे पहले रामगोपाल की 23 नवंबर को लिखी चिट्ठी के बाद परिवार का विवाद बढ़ गया था. रामगोपाल यादव ने चिट्ठी में लिखा था कि अखिलेश विरोधी विधानसभा की चौखट तक नहीं पहुंच पाएंगे. रामगोपाल लिखा, "अखिलेश की यात्रा विरोधियों के गले की फांस बन गई है. मध्यस्थता करने वाले दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं. जहां अखिलेश हैं, जीत वहीं है."

चिट्ठी में शिवपाल यादव पर जमकर निशाना साधा गया था. रामगोपाल यादव ने लिखा, "हम चाहते हैं कि राज्य में समाजवादियों की सरकार बने, जबकि वो यानी (शिवपाल और उनके समर्थक) चाहते हैं कि हर हाल में अखिलेश चुनाव हारें. हमारी सोच पॉजिटिव है, जबकि उनकी सोच नकारात्मक है."

रामगोपाल ने लिखा, "अखिलेश के साथ वो लोग हैं, जिन्होंने पार्टी के लिए खून-पसीना बहाया है, अपमान सहा है, जबकि उधर के लोग वो हैं, जिन्होने हजारों करोड़ रुपया कमाया है, व्यभिचार किया है और सत्ता का दुरुपयोग किया है."

First published: 17 November 2016, 10:12 IST
 
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