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मोदी के शासनकाल में मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा: महंत नृत्य गोपाल दास

सादिक़ नक़वी | Updated on: 8 November 2016, 7:47 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अब महज़ कुछ महीने बाक़ी हैं. इससे पहले केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने अयोध्या का दौराकर यहां का राजनीतिक तापमान थोड़ा बढ़ा दिया है. उनके बाद विजयदशमी के मौक़े पर लखनऊ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंच से जय श्री राम के नारे लगाए.

उनके नारों के राजनीतिक मायने तलाशे जा रहे हैं. अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं कि क्या बीजेपी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से पहले राम मंदिर का मुद्दा उछालेगी? सवाल यह भी है कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद कोर्ट में होने के बावजूद क्या बीजेपी इस पर चुप्पी मारेगी या फिर मंदिर निर्माण के सपने फिर से दिखाएगी. 

कैच न्यूज़ ने इस सिलसिले में राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख मंहत नृत्य गोपाल दास और हनुमान गढ़ी के महंत ज्ञान दास से बातचीत की है. दोनों की राय जुदा है मगर बिल्कुल साफ़. बिना किसी लागलपेट के उन्होंने बीजेपी से उम्मीदें और मंदिर निर्माण की राजनीति पर खुलकर बात की. 

सोमनाथ मंदिर की तर्ज़ पर रास्ता निकलेगा: नृत्य गोपाल

क्या रामायण म्यूजियम से लोगों को फायदा होगा? 

रामायण म्यूजियम से लोगों को नहीं बल्कि रामायण म्यूजियम को फायदा होगा. अयोध्याजी तो अपने में परिपूर्ण हैं. हां, नए काम के होने से लोगों को अच्छा लगेगा.  

चुनाव आते ही मंदिर मुद्दे को हवा दी जाती है. कुछ कहना चाहेंगे? 

अयोध्याजी के लिए चुनाव के नाम पर ही सही, अगर कोर्इ काम हो रहा है तो वो अच्छा है. इसी बहाने कोर्इ इस मामले में आगे काम तो करेगा. 

क्या मंदिर-मस्जिद विवाद कोर्ट के बाहर नहीं सुलझाया जा सकता? इस पर क्या सोचते हैं आप? 

हम कोर्इ भी काम ऐसा नहीं करना चाहते जो कोर्ट के विपरीत हो. मोदीजी से आशा करते हैं कि सोमनाथ के मंदिर की तरह ही इस मामले में भी सरकार कोर्इ रास्ता निकलेगी. 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी हार्इकोर्ट की तरह आया जिसमें तीन हिस्से में जमीन का बंटवारा होगा, तब क्या करेंगे? 

फैसला कोर्इ भी आए, राम लला की पूजा अर्चना आज भी हो रही है. तथाकथित ढांचा जिसे बाबरी मस्जिद कहते थे, वो तो अब है नहीं. फिर भगवान महल में रहें या कपड़े के घर में, उनकी पूजा होनी ज़रूरी है. भगवान को तो इसका असर नहीं पड़ता है, लेकिन हिंदू जनता को सोचना चाहिए कि वो महलों में रहें और भगवान झोपड़ी में. अच्छा होगा कि न्यायालय से बात करके इस मसले को सुलझाया जाए. 

यूपी चुनाव में यह मुद्दा फिर ज़ोर पकड़ेगा? 

यह एक चुनावी मुद्दा है लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोर्इ पार्टी इस मामले को चुनाव में उठाकर आपत्ति मोल लेना चाहेगी. 

मलिक/कैच न्यूज़

...तो कोर्ट भी मामला नहीं सुलझा पाएगा: महंत ज्ञान दास

रामायण म्यूजियम की घोषणा को आप कैसे देखते हैं? राजनीति से जोड़ के देखते हैं? 

रामायण म्यूजियम की घोषणा चुनावी है. जब चुनाव के दो तीन महीने बचे हैं तो ये सारी घोषणाएं होनी शुरू हो गर्इं हैं. महेश शर्माजी ने जो घोषणा की है, उससे अयोध्या का विकास नहीं होगा. ऐसा करना भी था तो पहले करते. अयोध्या का विकास अगर कभी होगा तो वो मंदिर मस्जिद के मुद्दे के सुलझने से होगा. 

रास्ता क्या है सुलझाने का? 

कोर्ट में तो हो नहीं सकता है. लिहाज़ा, मंदिर-मस्जिद का मामला आपसी सहमति से सुलझेगा. जब सभी पार्टी इस पर एक साथ सहमति से बात करेंगी, तब ये मामला संभलेगा वरना कोर्ट के ऑर्डर आ जाने के बाद भी ये मुद्दा नहीं सुलझ सकता है. 

आपसी बातचीत की गुंजाइश कितनी है? 

बातचीत करवाने के हम मुखिया हैं. अंसारीजी थे जिनका स्वर्गवास हो गया तो वो हमारे पास आते थे और बातचीत करके मामला शांत करने का प्रयास करते थे. 2010 में जब कोर्ट का फैसला आया था, तब हम सबने मिलकर तय कर लिया था कि अब मामला खत्म. सभी पार्टी से बातचीत भी हो गर्इ, लेकिन प्रक्रिया जैसी होनी थी, वैसी हो नहीं सकी. 

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी तब इसके लिए तैयार हो गर्इ थी? 

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी नहीं तैयार हुर्इ थी लेकिन इसके मुख्य मुद्दर्इ हाशिम अंसारी और जो मुख्य पार्टियां हैं, वो तैयार हो गई थीं. हम लोग आपस में ऐसा समझौता करने जा रहे थे कि सभी खुश रहते. हमने रास्ता भी निकाल लिया था. हमें कोर्ट का आधार भी मिल गया था, रामलला प्रमाणित हो गए थे कि जहां विराजमान हैं वहीं उनका जन्म हुआ था.

यह पूरी जमीन 70 एकड़ में है. हम लोग सोच रहे थे जहां रामलला हैं वो वहां बन जाएं और एक किमी दूर कहीं मिस्जद बन जाए. लेकिन वो लोग इस पर भी नहीं माने और मामला लटकते हुए सुप्रीम कोर्ट चला गया और फिर से स्टे लग गया. 

मोदी सरकार इस मसले को सुलझा सकेगी? 

मोदी में वो क्षमता है कि वो इस समस्या को सुलझा दें लेकिन अभी इस मसले को वो हाथ नहीं लगा रहे हैं. वो हमारे देश की शान आगे बढ़ा रहे हैं. 

First published: 8 November 2016, 7:47 IST
 
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