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बंगाल में आरएसएस के स्कूलों की बाढ़ से तनाव में तृणमूल कांग्रेस

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 3 March 2017, 19:21 IST

ममता बनर्जी भाजपा से नोटबंदी के खिलाफ लड़ रही हैं. अब संघ ममता को बंगाल में एक नए मोर्चे पर घेरने की कोशिश कर रहा है. यह मोर्चा है शिक्ष का. राज्य में संघ और इसके संगठनों द्वारा संचालित स्कूलों की संख्या 2016 से अब तक काफी बढ़ गई है-315 से 326. राज्य में संघ से जुड़े तीन संगठन स्कूल चला रहे हैं- विवेकानंद विद्या भारती, अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, कल्याण आश्रम और विश्व हिंदू परिषद. बंगाल के विभिन्न जिलों में ये स्कूल संघ की राष्ट्रवादी और हिंदूवादी विचारों को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं.

भ्रष्टाचार के आरोप

तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को जानकारी जुटाने को कहा है कि कहीं इन स्कूलों में गलत काम तो नहीं हो रहा. यदि ऐसा हुआ, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. टीएमसी के सूत्रों के मुताबिक पार्टी, भाजपा और आरएसएस को स्कूल खोलने की अनुमति देने से सीधा मना करने की बजाय उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की कोशिश कर रही है ताकि लोगों का भी सहयोग मिल सके.

हाल ही में राज्य की सीआईडी ने भाजपा की महिला मोर्चा नेता जूही चौधरी को गिरफ्तार किया है. उनके उत्तर बंगाल में चल रहे बच्चों के अवैध व्यापार के रैकेट के साथ संबंध पाए गए. इस मामले में भाजपा नेता कैैलाश विजयवर्गीय और भाजपा सांसद रूपा गांगुली का नाम भी उछला.

पिछले कुछ दिनो में बंगाल भाजपा के वरिष्ठ सदस्यों के खिलाफ 13 आपराधिक मामले दर्ज किए गए. उन पर बच्चों का अवैध व्यापार करने वालों से संपर्क और सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने का आरोप है. टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘बंगाल में आरएसएस से संबद्ध स्कूल हमारे सशक्त नेतृत्व के कारण अपना आधार मजबूत करने में विफल रहे हैं. इन संगठनों ने अपनी विचारधारा का प्रचार करने और समाज को प्रभावित करने की कोशिश की. पर वे विफल रहे क्योंकि ममता बनर्जी ने समुदाय के विभिन्न वर्गों के लिए गरीबों के हित में योजनाएं शुरू की हैं. इससे लोगों की मानसिकता बदलने में मदद मिली. नतीजतन छात्रों, खासकर जनजातीय क्षेत्रों के छात्रों पर, अभी आरएसएस की विचारधारा का असर नहीं हुआ है.’

अपने पक्ष में

आरएसएस के सदस्यों का कहना है कि वे मानवीय कारणों से स्कूल चलाते हैं और समाज की उन्नति के लिए काम करते हैं. एक स्थानीय स्कूल के अध्यापक ने बताया कि पश्चिम बंगाल में इन संगठनों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों की बढ़ती संख्या के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं है. यहां के टीचर्स ज्यादातर महंत हैं और उन्होंने गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाने के लिए खुद को समर्पित किया है. वे मंदिरों में पूजा करते हैं और खाली समय में इन छात्रों को पढ़ाते हैं. सामान्य पाठ पढ़ाने के अलावा वे इन छात्रों को प्रार्थना करना भी सिखाते हैं.

तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने कहा, ‘हम प्रतिहिंसा की राजनीति में यकीन नहीं करते. बंगाल सरकार राज्य में विभिन्न इकाइयां स्थापित करने के लिए सभी लोगों को सक्रिय सहयोग करती रही है. हमारी मुख्यमंत्री काफी सक्रिय हैं और उन सभी व्यक्तियों को सहयोग करती हैं, जो समुदाय के कल्याण के लिए स्कूल चला रहे हैं.’

आरएसएस के प्रवक्ता जिशनु बोस ने कहा, ‘हमारे स्कूलों में कोई तय समय नहीं है और ये पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, दोनों से संबद्ध हैं. बोर्ड के अधिकारी स्कूलों का अक्सर निरीक्षण करते हैं. हम सीमित व्यवस्थाओं में इन गरीब बच्चों को पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.’ बोस ने आगे कहा कि चित्रकूट, मध्यप्रदेश में आरएसएस द्वारा शुरू किए गए इन स्कूलों की तारीफ राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम तक ने की थी. ये स्कूल ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए हैं ताकि उन बच्चों को विस्तार से मूल्य-परक शिक्षा दी जा सके, जो अच्छी और ज्यादा महंगी स्कूलों में नहीं जा पाते हैं.

सीपीआई (एम) सांसद मोहम्मद सलीम ने इस विषय में अपनी बात रखते हुए कहा, ‘तृणमूल ने बंगाल में आरएसएस को आगे बढ़ने दिया क्योंकि वह चुपचाप भाजपा का समर्थन करती है. इसीलिए टीएमसी ने अभी तक इन स्कूलों के लाइसेंस निरस्त नहीं किए हैं. हालांकि उन्हें यह रिपोर्ट मिल गई थी कि वे ज्यादातर स्कूल गैरकानूनी ढंग से चला रहे हैं. टीएमसी सरकार ने उन्हें बढ़ने में मदद की है.’

First published: 4 March 2017, 7:53 IST
 
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