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संघ-भाजपा मिलन: उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले गोरक्षा, राम मंदिर और दलितों के मुद्दे पर विमर्श

अतुल चौरसिया | Updated on: 6 November 2016, 7:49 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • उत्तर प्रदेश चुनाव के मद्देनज़र संघ और भाजपा ने महाराष्ट्र सदन में एक हाई प्रोफाइल बैठक की. 
  • इस बैठक में राम मंदिर समेत उन सभी संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई जिनके सहारे वोटों का ध्रुवीकरण करने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सकता है. 

चार नवंबर की दोपहर नई दिल्ली के कस्तूरबा गांधी रोड पर स्थित महाराष्ट्र सदन में गहमा गहमी तेज थी. यूं तो इंडिया गेट से लगा यह पूरा इलाका ही वीआईपी है लेकिन चार नवंबर को महाराष्ट्र सदन में वीआईपी हस्तियों की आमदरफ़्त आम दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा था. आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और कृष्णकांत (ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी) के सामने भाजपा नेताओं और मंत्रियों ने अब तक की उपलब्धियों और आगामी चुनावों से जुड़ी रणनीतियों की चर्चा की.

बैठक का महत्व इसकी टाइमिंग और इसको लेकर दोनों पक्षों द्वारा की जा रही परदेदारी के कारण और बढ़ गया. पांच नवंबर को भाजपा अपने उत्तर प्रदेश अभियान की शुरुआत सहारनपुर से कर रही है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सहारनपुर से पहली परिवर्तन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इसके ठीक एक दिन पहले उनकी संघ नेताओं के साथ लंबी बैठक के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं.

इस मौके पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री महेश शर्मा, संगठन प्रमुख राम लाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे के साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी संघ नेताओं के समक्ष उपस्थित हुए.

संघ और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बैठक को दोनों ही पक्षों ने गोपनीय बनाए रखने की हरचंद कोशिश की. हालांकि संघ और भाजपा से जुड़े सूत्रों से दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां सामने निकल कर आई हैं. इनमें से कुछ जानकारियां चौंकाने वाली हैं, कुछ उत्तर प्रदेश चुनावों से जुड़ी हैं और कुछ संघ के अपने एजेंडे को समर्पित हैं.

1966 के हिंसक गौरक्षा आंदोलन की 50वीं सालगिरह पर उत्सव

मीटिंग में संघ ने आगामी सात नवंबर को साल 1966 में हुए गौरक्षा आंदोलन की पचासवीं बरसी के कार्यक्रम को अंतिम रूपरेखा दी. संघ ने विश्व हिंदु परिष्द के माध्यम से गौरक्षा आंदोलन की 50वीं बरसी को पूरे देश में आयोजित करने और गौरक्षा आंदोलन को तेज करने की योजना बनाई है. संघ का निर्देश है कि इस काम में भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को पूरे जीजान से हिस्सा लेने और सफल बनाने के लिए भेजे.

पार्टी ने इसके लिए हामी भरी है. गौरतलब है कि साल 1966 गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने संसद भवन को घेरने का अभियान चलाया था. सात नवंबर 1966 को स्वामी करपात्री महाराज, शंकराचार्य निरंजनदेव तीर्थ आदि के नेतृत्व में साधुओं की एक बड़ी भीड़ ने संसद भवन पर कब्जा करने की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साधुओं की बात मानने से इनकार कर दिया था. 

इस पर उग्र साधुओं ने पूरे दिल्ली शहर में तोड़फोड़ की. दिल्ली में कर्फ्यू लगा दिया गया. साधुओं ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष के कामराज के घर को आग लगा दी. पुलिस की फायरिंग में कई साधुओं की मौत भी हुई थी. अब संघ उस घटना की पचासवीं बरसी के बहाने गोरक्षा आंदोलन को धार देना चाहता है.

बैठक में दूसरी महत्वपूर्ण चर्चा सरकार के तमाम मंत्रियों को सौंपे गए संघ के विभिन्न लक्ष्यों पर की गई. इस समीक्षा रिपोर्ट को गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्तमंत्री अरुण जेटली के जरिए संघ नेताओं के सामने रखा गया. राजनाथ सिंह और अरुण जेटली संघ नेताओं से अलग से मिले.

दलित प्रेम को धक्का

सूत्रों के हवाले से एक और महत्वपूर्ण बात निकल कर आई है. बैठक में संघ नेताओं ने भाजपा नेताओं से पूछा है कि उना, रोहित वेमुला जैसी देश के अलग-अलग हिस्सों में घटी घटनाओं से निपटने के लिए भाजपा क्या कर रही है. संघ का अपना आकलन है कि इन घटनाओं से भाजपा की चुनावी संभावनाएं तो कमजोर हुई ही हैं लेकिन बड़ी बात यह है कि इन घटनाओं ने संघ की दलितों के प्रति जो रणनीति थी उसे भी गहरा धक्का पहुंचाया है.

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद संघ और भाजपा दोनों ने दलितों को अपने पक्ष में करने के लिए अलग-अलग स्तर पर कई योजनाएं शुरू की थी. लेकिन इसी दौरान गोकशी को लेकर गुजरात समेत देश भर में दलितों पर हुए हमले और हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला की मौत से पैदा हुए हालात में संघ की रणनीति को भारी धक्का लगा है.

खुद भाजपा भी उत्तर प्रदेश चुनावों के मद्देनजर सुहेलदेव जयंती से लेकर आंबेडकर जयंती तक के उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित कर दलितों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है. ताजा हालात ऐसे हैं जिसमें दलितों का भाजपा और संघ से जुड़ना कठिन लगता है. इस संकट से निपटने के उपायों पर गंभीर विमर्श हुआ.

राम मंदिर पर कशमकश क्यों?

संघ-भाजपा नेताओं की बैठक में उत्तर प्रदेश चुनावों के लिहाज से एक और अहम चर्चा अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे को लेकर हुई. सूत्रों के मुताबिक संघ इस बात को लेकर बेहद मुखर था कि उत्तर प्रदेश का चुनाव सिर पर आ चुका है लेकिन भाजपा राम मंदिर के मुद्दे पर अपना रुख अभी तक साफ नहीं कर पायी है.

माना जा रहा है कि संघ ने विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के अपना समर्थन दिया है लेकिन साथ ही भाजपा नेताओं को स्पष्ट कर दिया है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण जैसे उसके कोर मुद्दे को चुनाव के दौरान छोड़ा नहीं जा सकता. भाजपा को इस संबंध में अपनी रणनीति जल्द से जल्द स्पष्ट करने को कहा गया है.

इन महत्वपूर्ण मसलों के अलाव पंजाब, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनावों पर भी विमर्श हुआ. मंत्रियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रगति से भी संघ नेताओं को अवगत कराया.

First published: 6 November 2016, 7:49 IST
 
अतुल चौरसिया @beechbazar

एडिटर, कैच हिंदी, इससे पूर्व प्रतिष्ठित पत्रिका तहलका हिंदी के संपादक के तौर पर काम किया

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