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अखिलेश से आहत मुलायम रो पड़े, कहा- 'जो बाप का नहीं वो बात का क्या होगा?'

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 October 2016, 22:30 IST
(फाइल फोटो)
QUICK PILL
  • समाजवादी पार्टी के इतिहास में 23 अक्तूबर 2016 का दिन याद रखा जाएगा. इस दिन अखिलेश यादव और शिवपाल यादव का विवाद अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया. 
  • सीएम अखिलेश यादव ने कैबिनेट मंत्री और अपने चाचा शिवपाल यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया. वहीं शिवपाल भी सरकारी गाड़ी त्यागते हुए अपनी निजी गाड़ी में सवार होकर निकले. 
  • पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह के आदेश पर राष्ट्रीय महासचिव और अखिलेश के करीबी प्रोफेसर रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया. 
  • रामगोपाल यादव ने रविवार सुबह लिखी चिट्ठी में शिवपाल यादव को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि एक धड़ा ऐसा है जो नहीं चाहता कि अखिलेश चुनाव जीतें. ये लोग भ्रष्टाचार और व्यभिचार में लिप्त हैं.

रविवार का दिन समाजवादी पार्टी के 25 साल के इतिहास में तमाम उलटफेर और सियासी दांव-पेंच से सराबोर रहा. सबसे पहले प्रोफेसर रामगोपाल यादव का चिट्ठी बम फटा. इसके बाद भतीजे सीएम ने मंत्री चाचा की कुर्सी छीन ली. शाम होते-होते भतीजे के करीबी चाचा को पार्टी से छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. 

हालांकि इस दौरान समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का कोई बयान नहीं सामने आया. लखनऊ में मुलायम के आवास पर मिलने के लिए सपा के वरिष्ठ नेता पहुंचे. इसके अलावा बर्खास्त शिवपाल यादव के अलावा नारद राय और ओमप्रकाश सिंह भी नेताजी से मिले.  

अजीत सिंह से बात करते रो पड़े

सूत्रों के मुताबिक जब सपा नेताओं के साथ मुलायम की बातचीत चल रही थी, उसी दौरान राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह का मुलायम सिंह के पास फोन आया. सपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस दौरान जब अजीत सिंह ने मुलायम को सांत्वना देने की कोशिश की, तो अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए. 

सपा के सूत्र बताते हैं कि रोते हुए मुलायम ने इस दौरान अजीत सिंह से कहा कि जो अपने बाप का नहीं हुआ वो अपनी बात का क्या होगा? दरअसल पांच कालिदास मार्ग पर रविवार सुबह विधायकों की बैठक में अखिलेश ने कहा था कि उनका पार्टी तोड़ने का कोई इरादा नहीं है, पार्टी उनके पिता ने बनाई है.  

अखिलेश से आहत मुलायम के आंसू

माना जा रहा है कि अखिलेश यादव के रवैए से मुलायम काफी आहत हैं. उनका शिवपाल को बर्खास्त करना और अमर सिंह को दलाल कहना भी मुलायम को पसंद नहीं आया है. हालांकि मुलायम ने रविवार को अपनी तरफ से पत्ते नहीं खोले. केवल रामगोपाल को छह साल के लिए पार्टी से निकाला जाना ही एक जवाबी प्रतिक्रिया माना गया.

कहा जा रहा है रामगोपाल यादव की चिट्ठी से मुलायम बेहद नाराज हैं. हालांकि मुलायम ने दिनभर आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया. कैमरे पर चेहरा निराश नजर आया. शाम को जब घर से बाहर निकले तो प्रेस के सवालों पर कहा कि आज कुछ नहीं बोलूंगा. जो भी बोलना है वो सोमवार को  ही बोलूंगा. 

'धर्मयुद्ध में अखिलेश के साथ'  

वहीं रामगोपाल ने पार्टी से निकाले जाने के बाद एक और चिट्ठी जारी कर दी. इसमें रामगोपाल ने लिखा है कि नेताजी को देर-सवेर गलती का एहसास होगा. अभी वे आसुरी प्रवृत्तियों से घिरे हुए हैं.  

रामगोपाल ने एक बार फिर अखिलेश का पूरा समर्थन करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी में रहूं न रहूं कोई बात नहीं, लेकिन इस धर्मयुद्ध में वह अखिलेश के पूरी तरह साथ हैं. 

पांच नवंबर को समाजवादी पार्टी अपने 25 साल पूरे करने वाली है. रजत जयंती समारोह में शामिल होने की अखिलेश ने हामी तो भरी, लेकिन सपा के अंदर जिस तरह की उठापटक चल रही है उससे सैफई का यादव परिवार दो अलग-अलग सियासी धाराओं में बहता दिख रहा है. ऐसे में अगर समाजवादी पार्टी अखंड रहते हुए रजत जयंती मना लेती है, तो उसके लिए बड़ी उपलब्धि होगी.  

First published: 23 October 2016, 22:30 IST
 
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