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सपा के रजत जयंती समारोह में अमर सिंह को बुलाना क्यों भूले नेताजी?

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 November 2016, 15:46 IST
(फाइल फोटो)

समाजवादी पार्टी अपनी स्थापना के 25 साल पूरे होने पर लखनऊ में बड़ा समारोह आयोजित कर रही है. रजत जयंती कार्यक्रम लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में मनाया जा रहा है.

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को अग्निपरीक्षा मानकर चल रहे हैं. ऐसे में इस आयोजन से चंद रोज़ पहले ही उन्होंने यूपी में कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ अमर सिंह की मौजूदगी में महागठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा की.

पार्टी की 25वीं सालगिरह को यादगार और शानदार बनाने के लिए मुलायम सिंह यादव ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. जिस जनेश्वर मिश्र पार्क में समारोह हो रहा है, उसे एशिया के सबसे बड़े पार्क में से एक कहा जाता है.

अखिलेश अपने जिन कामों को गिनाना नहीं भूलते हैं, उसमें छोटे लोहिया (जनेश्वर मिश्र) के नाम पर बना यह पार्क भी शामिल है. इस आयोजन में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी अखिलेश के चाचा शिवपाल को मिली है.

हालांकि समारोह के मंच पर जनता परिवार का जमावड़ा तो जरूर जुटा, लेकिन नेताजी जिस अमर सिंह के एहसान तले खुद को दबा बताते हैं, वही अमर सिंह अब तक इस आयोजन से नदारद नजर आए.

24 अक्तूबर को जब अखिलेश ने सरेआम अमर सिंह को झगड़े के लिए मुजरिम ठहराया था, उस वक्त भी नेताजी की अमर प्रेम जुबान पर छलक उठा था. मुलायम सिंह ने कहा था कि अमर सिंह मेरे भाई हैं और अखिलेश तुम्हारी हैसियत क्या है?

मुलायम ने इस दौरान यह भी कहा था कि शिवपाल और अमर सिंह को वह कभी नहीं छोड़ सकते. नेताजी ने कहा था कि वह एहसानफरामोश नहीं हैं और अमर सिंह की वजह से ही वह जेल जाने से बचे थे.

जाहिर है नेताजी अगर अमर सिंह को इतना चाहते हैं कि अखिलेश यादव के साथ ही आजम खान जैसे कद्दावर नेता के विरोध के बावजूद उन्हें राज्यसभा पहुंचाने के साथ ही राष्ट्रीय महासचिव के ओहदे से नवाज दिया. 

इस वजह से नहीं आए अमर सिंह

मुलायम और अमर का याराना सियासी गलियारों की सुर्खियों में रहता है, तो फिर उनका सपा के 25 साल के समारोह में न पहुंचना आखिर क्या संकेत देता है? कैच ने इस बारे में पड़ताल करने की कोशिश की कि आखिर अमर के इस समारोह से दूर रहने की वजह क्या है?

द हिंदू के पूर्व ब्यूरो चीफ और लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार जेपी शुक्ला का कहना है कि अमर सिंह ने खुद ही इस आयोजन से दूर रहने का फैसला लिया है. हाल ही में सपा के पारिवारिक घमासान में नाम आने से वो आहत भी हैं. हाल ही में अमर ने इस दर्द को यह कहकर बयां किया था कि अखिलेश के शादी की हर तस्वीर में यह दलाल मौजूद है.

अमर सिंह ने समारोह में न पहुंचने के संकेत पहले ही दे दिए थे. दरअसल अमर को लग रहा था कि अगर वह रैली के मंच पर पहुंचे और वहां अखिलेश से आमना-सामना होने पर अगर बात बिगड़ गई, तो यादव परिवार में फिर तल्खियां बढ़ सकती हैं. 

वरिष्ठ पत्रकार जेपी शुक्ला का मानना है कि अमर सिंह को यह भी लग रहा था कि अगर उन्होंने समारोह में शामिल होने का फैसला किया, तो अखिलेश इस आयोजन से दूर रह सकते थे. इसकी एक वजह यह भी थी कि अखिलेश की समाजवादी विकास रथ यात्रा में कयासों पर ब्रेक लगाते हुए शिवपाल पहुंचे थे.

अमर सिंह दरअसल नहीं चाहते थे कि अगर संबंध पहले के मुकाबले सुधर रहे हैं, तो उनके समारोह में पहुंचने पर अगर बात बिगड़ी तो एक बार फिर उन्हीं पर सवाल उठाए जाते. ऐसे में अमर सिंह नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से कोई विवाद पैदा हो, इसी के चलते उन्होंने खुद ही आयोजन से दूरी बना ली.

'कुछ लोगों को विरासत में मिल जाता है'

शिवपाल इस आयोजन को अपने शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं. शिवपाल से करीबी के चलते अखिलेश ने जिन तीन मंत्रियों को निकाला था, उनमें से दो (ओमप्रकाश सिंह और नारद राय) की शिवपाल यादव ने अपने संबोधन के दौरान शिवपाल ने तारीफ की.

वहीं निकाले गए तीसरे मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति इस समारोह के संयोजक हैं. दूसरी ओर शिवपाल ने भी अखिलेश के जिन करीबियों को निकाला था, उनमें से ज्यादातर रजत जयंती समारोह में नजर आए.

संबोधन में शिवपाल यादव ने कहा, "जिन्होंने कुर्बानी दी, उन्हें कुछ नहीं मिला. कुछ लोगों को विरासत में मिल जाता है और कुछ लोग जिंदगीभर मेहनत करते रह जाते हैं, कुछ नहीं मिलता. कुछ लोगों को जरा सी चापलूसी करने पर सत्ता का मजा मिल जाता है."

चाचा-भतीजे के विवाद पर वैसे अभी ब्रेक लगता नहीं दिख रहा है. अखिलेश के समर्थन में बोल रहे सपा नेता जावेद आबिदी को शिवपाल यादव ने इस दौरान मंच से जबरन हटा दिया.

अखिलेश बोले- तलवार दोगे तो चलाएंगे

यूपी के सीएमं अखिलेश यादव ने भी इशारों में शिवपाल पर निशाना साधा. अखिलेश ने कहा, " कुछ लोग सुनेंगे लेकिन सपा के बिगड़ने के बाद. पहले हमें तलवार देते हो और फिर कहते हो कि तलवार ना चलाओ. तलवार दोगे तो चलाएंगे ही."

अखिलेश ने आगे कहा, "हमारे जितनी चाहे परीक्षा ले लो. हम सब लोगों ने मेहनत की है, तब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है. 2017 में तो सरकार बनेगी ही, हम चाहते हैं कि 2019 में भी यूपी से ऐतिहासिक फैसला हो."

सीएम ने इस दौरान कहा, "यूपी में सपा की सरकार लौटेकर आएगी. साढ़े चार साल में हमने देश में उदाहरण पेश किया. चुनाव भारत का भविष्य तय करेगा. बीजेपी ने लोगों में दूरियां पैदा की. समाजवादी कम्प्यूटर और अंग्रेजी के खिलाफ नहीं. हम भाषा के खिलाफ नहीं हैं. हमारे बारे में कहा जाता था कि हम अंग्रेजी और कंप्यूटर के खिलाफ है, लेकिन हमने लोगों को लैपटॉप बांटे."

नेताजी ने निकाला बीच का रास्ता

वहीं सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने संबोधन के दौरान बीच का रास्ता चुना. नेताजी ने अखिलेश के काम की तारीफ तो की, लेकिन शिवपाल के संघर्षों और योगदान को भी याद किया. 

मुलायम सिंह यादव ने कहा, "हम सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं हैं. हम महिलाओं, गरीबों और किसानों के लिए हैं. हम सांप्रदायिक ताकतों को बाहर रखने के लिए एक. ये ठीक है कि सरकार ने अच्छा काम किया है, लेकिन कई काम करने हैं."

मुलायम ने साथ ही कहा, "देश में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है. हमारी सरकार को तय करना होगा कि ऐसा ना हो. समाजवादी आंदोलन भेदभाव मिटाने के लिए है. हमारा सभी वर्ग ने साथ दिया है."

नेताजी का 'अमरप्रेम'

समाजवादी पार्टी में चाचा और भतीजे के बीच मचे पारिवारिक घमासान के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अमर सिंह को जिम्मेदार ठहराया था. लेकिन नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव की राय इससे बिल्कुल जुदा थी.

24 अक्तूबर को लखनऊ में समाजवादी पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक के दौरान अखिलेश, शिवपाल और मुलायम तीनों ने कार्यकर्ताओं के सामने अपनी बात रखी. इस दौरान अखिलेश ने अपनी बात पर कायम रहते हुए कहा कि अमर सिंह ही कलह के लिए जिम्मेदार हैं. हालांकि नेताजी ने कहा था कि अमर और शिवपाल को वह नहीं छोड़ सकते.

भरी सभा में अखिलेश ने कहा था कि अमर की वजह से ही एमएलसी आशु मलिक ने एक अंग्रेजी अखबार में उन्हें औरंगजेब और नेताजी को शाहजहां जैसा बताने वाला लेख छपवाया था. हालांकि अमर सिंह ने अपनी सफाई में कहा था कि बाप और बेटे में लड़ाई करवाकर उन्हें क्या हासिल होगा?

First published: 5 November 2016, 15:46 IST
 
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