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शिवपाल यादव ने खारिज की लोक दल के टिकट पर चुनाव लड़ने की ख़बर

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 January 2017, 20:46 IST
(फाइल फोटो )

सोमवार शाम से लखनऊ समेत पूरे उत्तर प्रदेश में एक अफवाह तेजी से उड़ी कि अखिलेश के चाचा और सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव सपा छोड़ लोक दल के टिकट पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे. देर शाम शिवपाल यादव जो इस समय अपने निर्वाचन क्षेत्र जसवंतनगर में मौजूद हैं, ने यह बयान देकर इन अफवाहों को खारिज किया कि, 'मेरे लोक दल में जाने की खबर पिछले कई घण्टे से कुछ छुटभैय्या चैनल और कुछ वाट्सऐप ग्रुप चला रहे हैं. ये खबर पूरी तरह से शरारत पूर्ण है.'

शिवपाल यादव ने आगे कहा, 'मैं समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार हूं. कल मैं जसवंतनगर विधानसभा से अपना नामांकन करूंगा. समाजवादी पार्टी मेरी अपनी पार्टी है. मैं साइकिल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ूंगा. इसके अलावा किसी दल से चुनाव लड़ने की मैं सोच भी नहीं सकता. उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने जा रही है. मैं जनता से अपील कर रहा हूं कि वो किसी तरह की भी अफवाहों पे ध्यान न दे.'

शिवपाल यादव 31 तारीख को इटावा की जसवंतनगर सीट से अपना नामांकन दाखिल करने वाले हैं

सोमवार की शाम शिवपाल यादव के लोक दल के टिकट पर चुनाव लड़ने की खबर उड़ने के बाद ऐसा लगा कि मुलायम सिंह के कुनबे में लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए शिवपाल यादव के लोक दल के टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ने की अटकलें तेजी से पूरे प्रदेश के मीडिया और कुछ सोशल सर्किल में तैरने लगी थीं.

गौरतलब है कि शिवपाल यादव 31 तारीख को इटावा की जसवंतनगर सीट से अपना नामांकन दाखिल करने वाले हैं. शिवपाल यादव ने बयान देकर इस अफवाह को खारिज किया है. लेकिन लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में और सपा को नजदीक से जानने-समझने वाले इसकी संभावना जता रहे हैं.

समाजवादी पार्टी पर पूरी तरह अखिलेश यादव का कब्ज़ा होने के बाद उनके पिता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और उनके भाई शिवपाल यादव पार्टी पूरी तरह से पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं. पार्टी की कमान संभालने के बाद अखिलेश ने शिवपाल के ज़्यादातर समर्थकों को टिकट से वंचित कर दिया है. बताया जा रहा है कि शिवपाल इससे खासे नाराज हैं. हालांकि शिवपाल को इटावा की जसवंत नगर सीट से सपा का आधिकारिक उम्मीदवार बनाया गया है लेकिन इसी बीच यह नई हलचल शुरू हो गई.

'मुलायम के लोग'

शिवपाल यादव ने हालांकि लोक दल के टिकट पर चुनाव की अफवाहों को खारिज कर दिया है लेकिन उनके समर्थकों ने इटावा में डेरा डालना शुरू कर दिया है. बताया जाता है कि शिवपाल के समर्थकों ने इटावा में समाजवादी पार्टी के कार्यालय के पास ही एक नया दफ्तर शुरू कर दिया है. यहां शिवपाल के समर्थक उठ बैठ रहे हैं. 'मुलायम के लोग' नाम से इस नए दफ्तर में एक नया संगठन शुरू हो गया है जिसे शिवपाल यादव का समर्थन बताया जा रहा है. कहा जा रहा है कि मुलायम के नाम की आड़ में असल में यह शिवपाल का इटावा यानी मुलायम सिंह के पैतृक जिले में शक्ति प्रदर्शन है. 

कहा यह भी जा रहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक बदनाम युवा अमित जॉनी भी शिवपाल यादव से जुड़ चुके हैं. जॉनी शिवपाल यूथ ब्रिगेड के नाम से एक नया संगठन शुरू करने जा रहे हैं. जिसे शिवपाल यादव का समर्थन हासिल है. अमित जॉनी वही शख़्स हैं जिनपर लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती की मूर्ति तोड़ने का आरोप है. पिछले साल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कथित तौर पर हुए देशद्रोह विवाद के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कन्हैया को जान से मारने की धमकी भी दी थी.

मुलायम सिंह ने लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह से दिल्ली स्थित अपने आवास पर मुलाकात की थी

समाजवादी पार्टी में पिता-पुत्र के बीच जब पार्टी सिंबल को लेकर घमासान चल रहा था और चुनाव आयोग 16 जनवरी को फैसला देने वाला था, इसके ठीक दो दिन पहले मुलायम सिंह ने लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह से दिल्ली स्थित अपने आवास पर मुलाकात की थी. तब वहां विस्तार से चर्चा हुई थी कि अगर चुनाव आयोग समाजवादी पार्टी और उसके चुनाव निशान का फैसला अखिलेश के हक में देता है तो लोक दल के टिकट पर यूपी विधानसभा चुनाव में उतरा जा सकता है. लोकदल का चुनाव चिन्ह है हल चलाता हुआ किसान.

हालांकि 16 जनवरी की शाम फैसला अखिलेश के पक्ष में जाने के बाद से इस पहलू पर सुगबुगाहट नहीं हुई मगर अब समाजवादी पार्टी में हलचल तेज़ी से बढ़ती जा रही है. रविवार को मुलायम सिंह यादव ने पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन को ग़ैरज़रूरी करार देते हुए कहा कि वह चुनाव प्रचार में नहीं उतरेंगे. वहीं लोक दल के टिकट पर शिवपाल के लड़ने की अफवाह ने अचानक से सपा की अंदरूनी लड़ाई को फिर से सतह पर ला दिया था.

लोक दल की स्थापना देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने की थी. तब इस पार्टी में चौधरी देवी लाल, बीजू पटनायक, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, शरण यादव, रामविलास पासवान जैसे समाजवादी नेता हुआ करते थे. बाद में ज़्यादातर नेता लोक दल से अलग होकर अपनी पार्टियां बनाते गए या फिर किसी दूसरी पार्टी से जुड़ गए.

(यह ख़बर सोमवार रात 11 बजे संशोधित की गई है)

First published: 30 January 2017, 20:46 IST
 
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