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मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी: शार्प शूटर अब सियासी मैदान में

आवेश तिवारी | Updated on: 7 February 2017, 7:40 IST

वो 1947 में भारत पाकिस्तान के युद्ध में देश का नाम रोशन करने वाले महावीर चक्र विजेता ब्रिग्रेडियर उस्मान के खानदान से हैं. वो देश के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के खानदान से भी ताल्लुक रखते हैं. और वो कई हत्याओं, अपहरण और आपराधिक वारदातों के आरोपी और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के बेटे भी हैं.

पिता मुख्तार अंसारी की पहचान से अलग उनके बेटे अब्बास अंसारी की अपनी अलग पहचान भी है. वो चार बार स्कीट शूटिंग में जूनियर और सीनियर नेशनल लेवल चैम्पियन रह चुके हैं. जर्मनी और फिनलैंड में 2013 में हुई वर्ल्ड शाटगन चैम्पियनशिप में वो टॉप टेन में अपनी जगह बनाने में सफल रहे लेकिन रियो ओलम्पिक से ठीक पहले हुई सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद वो रियो जाने से रह गए.

प्रबंधशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएट अब्बास अंसारी इधर बीच टोकियो में 2020 में होने वाले ओलम्पिक की तैयारी शुरू कर पाते, इससे पहले ही पिता ने उन्हें विधानसभा के चुनाव लड़ने का फरमान सुना दिया. अब वो बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर यूपी की घोसी सीट से चुनाव मैदान में हैं.

माफिया मुख्तार भी थे तेज धावक

शर्मीले लेकिन बुलंद आवाज वाले अब्बास आजकल मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार करते देखा जा सकता है. गहरी दाढ़ी, लम्बा कद और चेहरे पर हमेशा मुस्कान रखने वाले अब्बास को उम्मीद है कि वो चुनाव जीतेंगे तो घोसी की जनता के लिए काम करेंगे लेकिन शूटिंग करना नहीं छोड़ेंगे. 2011 में जब अब्बास ने शूटिंग में अपना हाथ आजमाना शुरू किया था तब किसी को इस बात का इल्म नहीं था कि वो इस हद तक सफल होंगे. शौकिया शुरू हुआ सफर जल्द ही पेशेवर शूटिंग में बदल गया.

उनके पिता मुख्तार अंसारी को भी बेहतरीन शूटर माना जाता है. कम लोगों को यह बात पता है कि बचपन में मुख्तार अंसारी खुद बेहद तेज धावक थे. आज भी मऊ के पुराने लोगों में कहा-सुना जाता है कि अगर मुख्तार माफिया न होता तो धावक होता, लेकिन जरायम की दुनिया में आने के बाद मुख्तार के एथलीट बनने के सारे सपने खत्म हो गए. मुख्तार ने अपने बेटे अब्बास को आगे बढाने में अपनी रजामंदी दी और उन्हें अपनी दुनिया से दूर रखकर शूटिंग पर ध्यान लगाने के लिए प्रेरित किया.

यूपी नहीं पंजाब से खेलते हैं अब्बास

1994 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता मनशेर सिंह, अब्बास अंसारी की तारीफ़ करते हुए कहते हैं कि जब वो निशानेबाजी के लिए रेंज में होता था तो वो घंटों खामोश रहकर केवल टारगेट के बारे में ही सोचा करता था. गजब का आत्मविश्वास है उसमें. दिलचस्प है कि मनशेर सिंह से खरीदी गई गन से अब्बास ने 2012 में नेशनल चैम्पियनशिप में कई जूनियर और सीनियर गोल्ड मैडल जीते थे.

यह भी काबिलेगौर है कि अब्बास उत्तर प्रदेश से नहीं बल्कि पंजाब से खेलते रहे हैं. केवल शूटिंग में ही नहीं राजनीति में भी अब्बास अपने पिता मुख्तार अंसारी को अपना कोच और गुरु मानते हैं. अब्बास कहते हैं, 'मैंने देखा है मेरे पिता उड़ती चिड़िया को एक बार में नीचे मार गिराते थे, राजनीति भी उन्होंने जम कर की है तभी जनता उन्हें इतना प्यार करती है.' अब्बास आगे बताते हैं, 'पिता ने कहा था देश के लिए खेलो, मैंने खेला अब मैं घोसी की जनता के लिए कुछ करना चाहता हूं इसलिए चुनाव मैदान में आ गया.'

देखना है मुख्तार के लिए लकी साबित होता रहा मऊ जिला उनके बेटे के बारे में क्या सोचता है.

First published: 7 February 2017, 7:40 IST
 
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