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चाचा-भतीजा संग्राम पार्ट-टू: अखिलेश यादव ने मुलायम को सौंपी 403 उम्मीदवारों की लिस्ट

रंजीव | Updated on: 26 December 2016, 9:18 IST

लखनऊ में रविवार की दोपहर क्रिसमस की धूम के बीच शहर के गिरजाघरों में रौनक बढ़ रही थी अौर लोग पादरियों से अार्शीवाद ले रहे थे तो वहीं विधान भवन के ठीक उलटी अोर राज्य सरकार के नए बने सचिवालय लोक भवन में बड़ी संख्या में भगवाधारी साधु-संतों का जमावड़ा लगा था. ये सभी साधु मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बुलावे पर अाए थे.

मौका था इलाहाबाद के संगम क्षेत्र में कुम्भ, अर्द्धकुम्भ व माघ मेला के अवसर पर तीर्थयात्रियों के लिए फोर-लेन सेतु व पहुंच मार्ग के शिलान्यास का. महामंत्र दास, सतुआ महाराज, महन्त हरिगिरि महाराज व नरेन्द्र गिरि महाराज समेत इलाहाबाग के अन्य साधुअों ने अखिलेश यादव के काम की खूब तारीफ करते हुए उन्हें न केवल अगले चुनाव में भी जीत कर मुख्यमंत्री बनने बल्कि भविष्य में प्रधानमंत्री बनने का भी आशीर्वाद दिया.

कार्यक्रम के कुछ घंटों के भीतर ही अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलकर उन्हें प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों की सूची सौंप दी. गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव यादव अब तक 175 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर चुके हैं.

लिहाजा पूर्व में जारी की गई सूची के समानांतर मुख्यमंत्री की अोर से अपनी पसंद के नामों की सूची राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपे जाने से पार्टी में विवाद का एक नया अध्याय शुरू हो गया है. इसे कई सीटों पर अखिलेश अौर शिवपाल के प्रत्याशियों के बीच चुनावों में मुकाबले की संभावना के रूप में भी देखा जा रहा है.

विवाद की यह अाहट इसलिए भी तेज है क्योंकि अखिलेश की अोर से अपनी सूची सौंपे जाने की घटना उनकी अोर से 'बाहरी व्यक्ति' बताए जा चुके सपा महासचिव अमर सिंह के लखनऊ अाकर मुलायम अौर शिवपाल से मिलने के एक दिन के बाद ही हो गई.

टकराव तय है

यह लड़ाई सुलह-समझौते से खत्म होगी, यह कहना मुश्किल है, क्योंकि अखिलेश की अोर से अपनी सूची सौंपे जाने के थोड़ी ही देर बाद शिवपाल यादव ने ट्वीट किया कि ‘पार्टी में किसी प्रकार की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाएगा उस पर कार्रवाई होगी. टिकट का बंटवारा जीत के अाधार पर होगा. 175 लोगों को टिकट दिया जा चुका है.’

यह समझना मुश्किल नहीं कि शिवपाल का यह ट्वीट अखिलेश की सूची के जवाब में आया है. अखिलेश ने अपनी पसंद के नामों की जो सूची राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपी है उसकी प्रतिक्रिया और भी कई रूपों में सामने आ सकती है. शिवपाल की अोर से यह भी दोहराया गया कि पार्टी की सरकार बनने की स्थिति में मुख्यमंत्री का फैसला विधायकों की बैठक में ही होगा.

अखिलेश बनाम शिवपाल धड़े के बीच शुरू हुई रार के टिकट बंटवारे के दौरान फिर सतह पर आने के कयास लग रहे थे

दरअसल सिंतबर में सपा के भीतर अखिलेश बनाम शिवपाल धड़े के बीच शुरू हुई रार के चुनावों से ठीक पहले टिकट बंटवारे के दौरान फिर सतह पर अाने के कयास लगाए जा रहे थे. मौजूदा घटनाक्रम उन कयासों की ही पुष्टि कर रहा है. प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव की अोर से करीब पौने दो सौ सीटों के लिए सपा प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया जा चुका हैै. इनमें ज्यादातर वे सीटें हैं जहां सपा 2012 में जीत नहीं पाई थी. हारी हुई सीटों के प्रत्याशियों की सूची में हाल में शिवपाल ने कई नामों को बदलते हुए नए नामों को टिकट दिए जाने की घोषणा की. जो नाम कटे उनमें से कई अखिलेश यादव के खेमे के माने जाते हैं.

उनके टिकट काटे जाने की प्रतिक्रिया में अखिलेश यादव ने सभी 403 सीटों के लिए अपनी पसंद के नामों की सूची सौंप दी है. इनमें कई नाम वैसे हैं जो शिवपाल की अोर से जारी सूची में नहीं हैं. अखिलेश की सूची में कई मौजूदा विधायकों, जिनमें कुछ मंत्री भी शामिल हैं, के भी टिकट काट कर दूसरे को प्रत्याशी बनाया गया है. इतना ही नहीं जिन हारी सीटों पर शिवपाल ने अखिलेश समर्थकों का टिकट काट कर दूसरे को प्रत्याशी बनाया है उन सीटों पर अखिलेश की सूची में काटे गए नाम ही बतौर प्रत्याशी रखे गए हैं. मुख्यमंत्री की सूची में अतीक अहमद अौर अमनमणि त्रिपाठी समेत वे विवादित नाम भी शामिल नहीं हैं जिन्हें टिकट दिए जाने के पक्ष में अखिलेश नहीं थे.

पार्टी में सर उठा रही चाचा-भतीजे के विवाद पार्ट 2 से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव कैसे निपटेंगे यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि अब किसी भी समय चुनावों की घोषणा हो सकती है. ऐसे में प्रत्याशियों के नामों पर अाम राय न होने का संदेश अच्छा नहीं जाएगा. अखिलेश अौर शिवपाल के बीच मुलायम किसी तरह संतुलन बनाए रख कर युद्ध विराम की स्थिति चाहते हैं. हालांकि यह अासान नहीं होगा क्योंकि न सिर्फ टिकटों के मुद्दे पर बल्कि कांग्रेस व राष्ट्रीय लोकदल से चुनावी गठजोड़ के मामले में भी सपा को जल्दी ही अंतिम फैसला लेना होगा.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार कांग्रेस से गठजोड़ की वकालत कर रहे हैं जबकि मुलायम इस मामले में खामोशी ही अोढ़े हैं. गठजोड़ न होने की सूरत अौर अखिलेश की अोर से भी अपने प्रत्याशियों की अलग सूची सौंपे जाने के मद्देनजर सियासी हलकों में यह चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगीं हैं कि क्या कई जगहों पर चाचा अौर भतीजे के प्रत्याशी अलग-अलग होंगे जिनका चुनाव में सामना होगा?

First published: 26 December 2016, 9:18 IST
 
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