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समाजवादी 'दंगल': 20 साल में चौथी बार नहीं हुआ सैफई महोत्सव

सुधाकर सिंह | Updated on: 3 January 2017, 11:58 IST
(फाइल फोटो)

तेरी चाहत में ऐ मुलायम हम दर-बदर हो गए...अपनी हस्ती से ही बेखबर हो गए...तुम संवरकर सनम सैफई हो गए और हम उजड़कर मुजफ्फरनगर हो गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना अमीर राशिद ने मुलायम सिंह के आजमगढ़ से चुनाव लड़ने के एलान के बाद इस शेर के जरिए विरोध जताया था. 

तकरीबन ढाई साल बीत चुके हैं, और सैफई के सनम यानी मुलायम सिंह यादव अपने राजनीतिक जीवन के ऐसे दौर में पहुंच चुके हैं जब यादव परिवार में मची सियासी अदावत के चर्चे सूबे के गली-चौराहों में हो रहे हैं. सैफई इटावा जिले का वह गांव जो मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव के रूप में तो जाना जाता है. साथ-साथ यह अपनी सियासी ताकत का अक्सर इजहार करता रहा है. 

सैफई की अहमियत साल में एक बार तो जरूर दिख जाती थी, जब दिसंबर महीने में होने वाला सैफई महोत्सव नेताजी के राजनीतिक और सामाजिक हैसियत का सबसे बड़ा गवाह बनता था. लेकिन 20 साल में ऐसा चौथी बार है कि सैफई महोत्सव नहीं हो रहा है. 

'छोटे लोहिया' के निधन पर रद्द हुआ था महोत्सव

2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता की वजह से सैफई महोत्सव रद्द हुआ था. इसके अलावा 1997 से चल रहे यादव परिवार के इस सबसे बड़े सांस्कृतिक और समाजिक आयोजन में दो बार और ऐसे मौके आए जब इसे रद्द करना पड़ा हो. 

2010 में छोटे लोहिया यानी जनेश्वर मिश्र के निधन के अलावा एक बार और विधानसभा चुनाव की वजह से महोत्सव को रद्द कर दिया गया था. 22 जनवरी 2010 को जनेश्वर मिश्र के निधन के बाद 24 जनवरी 2010 को सैफई महोत्सव का प्रस्तावित समापन रद्द हुआ था. इस लिहाज से चौथी बार सैफई महोत्सव आयोजित नहीं हो सका. 

चुनाव या यादव परिवार की जंग वजह?

यादव परिवार के लिए सैफई महोत्सव समाज के अलग-अलग वर्गों में अपनी पैठ दिखाने का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु रहा है. माना जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव के परिवार में वर्चस्व को लेकर चल रही जंग इसकी सबसे बड़ी वजह है. हालांकि चुनावी साल की होने की वजह से इसे टालने की बात आयोजकों की तरफ से कही जा रही है. 

हालांकि 2012 में मामला दूसरा था. तब सैफई महोत्सव के शुरुआत की तारीख (26 दिसंबर) से पहले विधानसभा चुनाव का एलान हो गया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है. सैफई में हर बार सियासी दिग्गजों के साथ ही बॉलीवुड से लेकर कारोबार जगत की हस्तियां मौजूद रहती थीं.

इस बार नेताजी के सैफई की फिजाओं में महोत्सव की रंगीनियत नहीं है, क्योंकि परिवार के बीच संगीनें खिची हैं और इसकी तस्वीर हर कोई देख रहा है. शायद मुलायम ने भी नहीं सोचा होगा सियासत इस कदर करवट लेगी कि अपनी ही साइकिल की सवारी करने के लिए उन्हें बेटे के खिलाफ दिल्ली दरबार में हाजिरी लगानी पड़ेगी.

फाइल फोटो

1997 में रणवीर सिंह ने की शुरुआत

सैफई महोत्सव का इतिहास 20 साल पुराना है. महोत्सव की शुरुआत मैनपुरी के वर्तमान सांसद तेजप्रताप यादव के पिता दिवंगत रणवीर सिंह ने साल 1997 में की थी. रणवीर सिंह मुलायम के भाई रतन सिंह यादव के पुत्र थे.

साहित्य-कला और संस्कृति प्रेमी रणवीर सिंह इसके संस्थापक थे, लेकिन साल 2002 में रणवीर का असमय निधन हो गया था. इसके बाद 2003 में यूपी में सपा की सरकार बनने पर सैफई महोत्सव का नाम बदलकर “रणवीर सिंह स्मृति सैफई महोत्सव” कर दिया गया था. 

मुलायम के समाजवाद के सबसे बड़े गढ़ सैफई में हर साल यह भव्य आयोजन होता है. सपा प्रमुख मुलायम सिंह सहित उनका पूरा परिवार इसके आयोजन में अहम भूमिका निभाता है. मुलायम के भाई अभयराम यादव के बेटे और बदायूं से सांसद धर्मेंद्र यादव सैफई महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं. अभयराम यादव सियासत से दूर सैफई में खेती-किसानी में मसरूफ रहते हैं. 

सैफई महोत्सव के समापन पर बाॅलीवुड स्टार नाइट सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहती है. (फाइल फोटो)

2015 में उद्घाटन में नहीं पहुंचे थे अखिलेश

हालांकि सैफई महोत्सव क्यों रद्द किया गया है, इसको लेकर आयोजकों के तर्क समझ से परे हैं. आयोजकों के मुताबिक प्रदेश में चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने की संभावना की वजह से सैफई महोत्सव इस बार नहीं आयोजित किया गया है. 

लेकिन अंदरखाने से पता चल रहा है कि आयोजक चाहते थे कि मुलायम सिंह यादव के परिवार में एकजुटता होती तो इसका एलान हो सकता था, लेकिन 26 दिसंबर से पहले ही सपा में टिकटों को लेकर घमासान शुरू हो गया. शिवपाल यादव की पसंद के उलट अखिलेश यादव ने जो 403 लोगों की सूची मुलायम के पास भेजी उसमें दागियों को दरकिनार कर दिया गया.  

पिछले साल भी सैफई महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम से पहले सपा में घमासान मच गया था. उस वक्त अपने करीबियों को पार्टी से निकाले जाने की वजह से अखिलेश यादव उद्घाटन समारोह में नहीं पहुंचे थे. 

अखिलेश यादव की कोर टीम से जुड़े दो नेताओं सुनील यादव 'साजन' और आनंद भदौरिया को मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. अपने चहेतों की बहाली के बाद ही अखिलेश यादव कार्यक्रम में शामिल हुए थे. 

26 दिसम्बर से 8 जनवरी तक आयोजन

हर साल 26 दिसम्बर से 8 जनवरी तक चलने वाले इस महोत्सव की धूम पूरे देश में रहती है, हालांकि विपक्ष कई बार इस आयोजन को सरकारी पैसे की फिजूलखर्ची बताते हुए सवाल खड़े करता रहा है. 

महोत्सव के समापन पर बाॅलीवुड स्टार नाइट सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहती है. लेकिन समाजवादी दंगल ने इस बार सैफई को महोत्सव की रौनक से दूर कर दिया है. जाहिर है इस जंग के बाद आने वाले वक्त में यादव परिवार अब शायद ही एक साथ सैफई महोत्सव के मंच पर नजर आए.

First published: 3 January 2017, 11:58 IST
 
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