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जो सूची अखिलेश ने मुलायम को सौंपी और जो सूची मुलायम ने जारी की उनका फ़र्क

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 29 December 2016, 8:23 IST
(फाइल फोटो )

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 के लिए समाजवादी पार्टी ने 325 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. इन नामों के ऐलान से ठीक एक दिन पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के घर 5, विक्रमादित्य मार्ग पर दिग्गज नेताओं का तांता लगा था. यहां मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव, मंत्री आज़म ख़ान, बेनी प्रसाद वर्मा वग़ैरह ने बारी-बारी मुलायम से मुलाक़ात की थी. महज तीन दिन पहले ही अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह को अपने 403 उम्मीदवारों की एक लिस्ट भी सौंपी थी जिसमें ज़बरदस्त फ़ेरबदल हो गया है. 

अखिलेश यादव की सूची से कम से कम 65 ऐसे उम्मीदवार हैं जिनके नाम काट दिए गए हैं. इनमें वो 26 विधायक भी शामिल हैं जिन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. पार्टी ने मुरादाबाद ज़िले के 4 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया है. अमरोहा, सुल्तानपुर, औरैया, कानपुर देहात, बाराबंकी और बरेली के दो-दो विधायकों को टिकट नहीं देने का फ़ैसला किया गया है. 

अखिलेश पर भारी शिवपाल

मुख्यमंत्री अखिलेश के लिए सबसे बड़ा झटका अपने उन समर्थकों का टिकट कट जाना है जो पिछले दिनों पार्टी पर वर्चस्व की लड़ाई में उनकी तरफ़ से खुलकर मोर्चा संभाले हुए थे. इनमें अयोध्या से कैबिनेट मंत्री पवन पांडे, राम नगर से विधायक अरविंद सिंह गोप और बांसडीह से विधायक रामगोविंद चौधरी शामिल हैं. प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव इन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं करते. 

दूसरी तरफ़ शिवपाल कैंप के कहे जाने वाले उन सभी आठ मंत्रियों के नाम मुलायम की सूची में मौजूद हैं जिन्हें अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इनमें ओम प्रकाश सिंह, नारद राय, अंबिका चौधरी, शादाब फातिमा, शिव कुमार बेरिया, राजकिशोर सिंह, अरिदमन सिंह और योगेश प्रताप सिंह शामिल हैं. इन्हें टिकट देने के लिए अखिलेश समर्थकों के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं. बस्ती ज़िले की रुधौली विधानसभा सीट से राजकिशोर सिंह के भाई बृजकिशोर उर्फ डिंपल सिंह को भी टिकट दिया गया है.  

पूर्व राजस्व मंत्री अंबिका चौधरी बलिया की फेफना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. अखिलेश ने इस सीट के लिए बलिया के ज़िलाध्यक्ष संग्राम सिंह का नाम प्रस्तावित किया था.

शिवपाल कैंप के सभी 8 मंत्रियों के नाम मुलायम की सूची में मौजूद हैं जिन्हें अखिलेश यादव ने सरकर से बाहर किया था

शिवपाल चाहते थे कि संग्राम इसी ज़िले की बांसडीह विधानसभा से लड़ें जहां से अखिलेश ने रामगोविंद चौधरी का नाम सुझाया था. मगर संग्राम के मना करने पर यह सीट भी अखिलेश गुट के हाथ से निकल गई और चौधरी की जगह नीरज सिंह गुड्डू का नाम का लिस्ट में डाल दिया गया. बाराबंकी की रामनगर सीट ने अरविंद सिंह गोप का टिकट काटकर बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है. हालांकि सूत्र यह भी कहते हैं कि अरविंद इस सीट से चुनाव लड़ना ही नहीं चाहते थे. 

अखिलेश ने महाराजगंज ज़िले की नौतनवा विधानसभा सीट से कांग्रेस एमएलए कौशल किशोर सिंह उर्फ मुन्ना का नाम सुझाया था लेकिन सूची में उनका नाम नहीं है. इसी तरह सीतापुर की विसवां सीट से रामपाल यादव के नाम की घोषणा हुई है. रामपाल, शिवपाल यादव के ख़ासम-ख़ास कहे जाते हैं. फिलहाल ये पार्टी से निष्काषित चल रहे थे. मगर दो दिन पहले सपा में इनकी वापसी हुई और अखिलेश यादव के प्रस्तावित नाम बुनियाद हुसैन अंसारी की जगह इन्हें उम्मीदवार बना दिया गया. 

जौनपुर की बदलापुर विधानसभा सीट पर ओमप्रकाश उर्फ बाबा दुबे की छवि ठीक-ठाक नेता की है. इनका नाम भी अखिलेश ने सुझाया था लेकिन पार्टी ने बाबा दुबे की जगह संगीता यादव को उम्मीदवार बनाया है. संगीता यादव पार्टी के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम करती थीं और शिवपाल यादव की करीबी हैं.

अखिलेश के बेहद ख़ास अतुल प्रधान का टिकट मेरठ की सरधना विधानसभा सीट से काटकर मैनपाल सिंह उर्फ पिंटू राणा को दिए जाने का ऐलान हुआ है. 325 उम्मीदवारों की सूची में इस तरह के उदाहरण भरे पड़े हैं जहां अखिलेश पर शिवपाल हावी हैं.

जवाबी कार्रवाई की तैयारी

चाचा शिवपाल का दबदबा लिस्ट में देखकर अखिलेश ने 5, कालिदास मार्ग पर आज सुबह 11 बजे एक बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि इस बैठक में वो सभी नेता शामिल होंगे जिनके टिकट कटे हैं, या जिन्हें टिकट नहीं मिले हैं या फ़िर जिनके नाम अभी होल्ड पर हैं.

इससे पहले मुलायम सिंह द्वारा 325 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होने के बाद देर शाम अखिलेश यादव ने अपने कुछ खास समर्थकों के साथ एक बैठक अपने निवास स्थान पर की. इसमें अरविंद सिंह गोप, पवन पांडेय, अभिषेक मिश्रा समेत अखिलेश के कई करीबी लोग शामिल हुए.

बैठक के बाद अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की उपाध्यक्ष सुरभि शुक्ला को पद से बर्खास्त कर दिया. सुरभि के साथ ही उनके पति संदीप शुक्ला को भी यूपीआरएनएन के सलाहकार पद से हटा दिया गया है. संदीप शुक्ला को सुलतानपुर सदर सीट से विधानसभा का टिकट भी दिया गया था.

इस लिस्ट से यह भी साफ़ है कि यूपी का चुनावी समर और समाजवादी पार्टी का पारिवारिक घमासान साथ-साथ चलेगा. मुलायम सिंह यादव ने नामों का ऐलान करने के साथ यह भी कह दिया था कि अब इसमें फेरबदल की गुंजाइश नहीं है मगर अखिलेश के पिछले तेवर देखते हुए मुलायम के दावे को अंतिम सच मान लेना भी ठीक नहीं होगा. अखिलेश निश्चित तौर पर जवाबी हमला बोलेंगे और अपने समर्थकों के लिए टिकट की लड़ाई लड़ेंगे. 

इससे पहले बुधवार की दोपहर पार्टी कार्यालय पर मुलायम सिंह यादव ने 325 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी. इनमें 176 कैंडिडेट वो हैं जिन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी जबकि 149 वो हैं जिन्हें हार का सामना करना पड़ा था. 78 सीटों पर अभी भी टिकटों का फ़ैसला होना बाक़ी है.

क्या कहती है मुलायम की लिस्ट

मुलायम सिंह यादव ने 325 उम्मीदवारोंं की जो लिस्ट जारी की है वह अखिलेश की हार और शिवपाल की जीत के इतर भी इसके कई निहितार्थ हैं. मसलन 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने करीब 60 मुसलमान उम्मीदवारों को टिकट दिया था. इसमें से  42 उम्मीदवार चुुनाव जीतने में सफल भी रहे थे. मुसलमान प्रतिनिधित्व के लिहाज से 2012 की विधानसभा सबसे बेहतर कही जाएगी. इसमें कुल 68 मुस्लिम विधायक थे. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव ने माहौल को बदल दिया है. उत्तर प्रदेश से एक बी मुसलमान सांसद इस बार लोकसभा नहीं पहुंच पाया है.

लिहाजा सपा की मौजूदा लिस्ट में यहशिवपाल कैंप के कहे जाने वाले उन सभी आठ मंत्रियों के नाम मुलायम की सूची में मौजूद हैं जिन्हें अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया था मान लिया गया है कि फिलहाल उत्तर प्रदेश में मुसलमानोंं की विनेबिलिटी बहुत कम हो चुकी है. सो पार्टी ने इस बार सिर्फ 48 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है.

पार्टी का अपना शीर्ष का ढांचा परिवारवाद की जकड़ में है लिहाजा नीचे के स्तर पर भी छोटे-छोटे लंबरदार परिवार खड़े हो गए हैं. बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे को टिकट दिया गया है जो पिछला चुनाव हार गए थे. आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से कैबिनेट मंत्री बलराम यादव के बेटे को संग्राम सिंह को टिकट दिया गया है. बसपा के बड़े नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के भाई को भी सपा ने टिकट दिया है. इसी तरह अमरमणि त्रिपाठी के बेटे को टिकट दिया गया है. इस तरह पार्टी में समाजवाद के नाम पर जिले-जिले में कुछ खास परिवारोंं की सत्ता खड़ी हो गई है.

First published: 29 December 2016, 8:23 IST
 
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