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यूपी में सज रही मुस्लिम वोटबैंक की मंडी

समीर चौगांवकर | Updated on: 28 October 2016, 3:07 IST
QUICK PILL
  • भाजपा की राष्ट्रीय परिषद के दौरान कोझीकोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मुसलमानों को वोट की मंड़ी ना समझें राजनीतिक दल. 
  • मगर उत्तर प्रदेश का चुनाव जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, सभी दलों में मुसलमान वोटरों को रिझाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. 

आबादी के लिहाज़ से देश के सबसे बड़े सूबे में मुसलमानों की आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का 19 फीसदी है. राज्य की 140 विधानसभा सीटों पर 10 से 20 फीसदी, 70 सीटों पर 20 से 30 फीसदी और 73 सीटों पर 30 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी है. लिहाज़ा, सभी पार्टियां मुस्लिम वोटरों को अपनी तरफ़ खींचने के लिए हर हथकंडे आज़मा रही हैं. 

2014 लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाने वाली बसपा ने मुसलमानों को अपने पाले में करने की ज़िम्मेदारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी को दी है. सिद्दीकी यूपी की दरगाहों और मज़हबी उलेमाओं से मुलाक़ात कर बहन जी का साथ देने की अपील कर रहे हैं. बसपा समाजवादी पार्टी के उन वादों को गिना रही है जो उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान किए थे लेकिन सत्ता संभालने के बाद उसपर अमल नहीं किया. इनमें सच्चर कमेटी की सिफारिशें और आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह मुसलमानों की रिहाई जैसे मुद्दे ख़ास हैं. 

भाजपा ने मुस्लिम वोटबैंक के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंद्रेश कुमार को तैनात किया है. इंद्रेश मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सहारे उलेमाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुसलमानों को यह समझाने में लगा है कि कैसे मुस्लिम औरतों की तक़दीर संवारने के लिए प्रधानमंत्री ने तीन तलाक़ पर कड़ा रुख़ अपनाया है. 

उत्तर प्रदेश में मुसलमान समाजवादी पार्टी की पहली पसंद है. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सूबे में मुसलमानों ने सबसे ज़्यादा वोटिंग मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी के लिए की है. मगर आंकड़े बताते हैं कि अब मुसलमान अपने लिए किसी अन्य दल की त्रिपाल में जाना चाहते हैं. 

2002 के विधानसभा चुनावों में सपा को 54 फीसदी मिले लेकिन 2007 में यह घटकर 45 फीसदी रह गया. इसी तरह 2012 के चुनावों में जब पार्टी को अब तक की सबसे बड़ी जीत मिली, तब यह घटकर 39 फीसदी ही रह गया.

इसके उलट बसपा की ओर मुस्लिमों का रुझान बढ़ा है. 2002 में बसपा को 9 फीसदी, 2007 में 17 फीसदी और 2012 के चुनाव में 20 फीसदी मुस्लिम समुदाय का वोट मिला था. इसी तरह 2002 के चुनाव में कांग्रेस को 10 फीसदी मुस्लिम वोट मिला था जो 2012 में 18 फीसदी हो गया था.

दलों की मज़बूती और कमज़ोरी

बहुजन समाज पार्टी

मजबूती : मुसलमानों में सपा से नाराजगी का फायदा, सुरक्षा के मुद्दे पर मुसलमानों का समर्थन मिल सकता है. पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग में मुसलमानों पर खासा ध्यान.

कमजोरी : नसीमुद्दीन सिद्दीकी के अलावा कोई दुसरा प्रभावी मुसलमान नेता नहीं. उलेमाओं और मुसलमानों के नेताओं से मायावती का सीधा संपर्क नहीं.

समाजवादी पार्टी

मजबूती : मुसलमानों में मुलायम की प्रभावी छवि, संगठन और सरकार में मुसलमानों को तवज्जो. 

कमजोरी : मुसलमानों को सुरक्षित महसूस कराने में नाकाम. पार्टी के मुसलमान नेताओं में गुटबाजी. सच्चर और रंगनाथ कमेटी की रिपोर्ट लागू करवाने का वादा अधूरा. सपा में मचे घमासान के बाद मुसलमानों का मुलायम से मो​हभंग की संभावना.

कांग्रेस

मजबूती : केन्द्र में शासन के दौरान मुस्लिम समाज के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत.

कमजोरी : मुसलमानों के बीच पार्टी का भरोसा लगातार कम होना. प्रदेश में प्रभावी मुस्लिम नेतृत्व का अभाव.

भाजपा

मजबूती : उत्तर प्रदेश से आने वाले मुख्तार अब्बास नकवी केन्द्र में मंत्री. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का मुसलमानों के बीच काम. 

कमजोरी : पार्टी की कट्टर हिन्दुत्व की छवि से नुकसान. प्रदेश के नेताओं के बयान से मुसलमानों में नाराजगी.

First published: 28 October 2016, 3:07 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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