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उत्तर प्रदेश: जहां पिता-पुत्र, पति-पत्नी और सौतन चुनाव में आमने-सामने

आवेश तिवारी | Updated on: 3 February 2017, 8:40 IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 उम्मीदवारी के मामले में कई सीटों पर दिलचस्प हो गया है. सूबे में एक विधानसभा ऐसी भी है जहां सौतने घर के साथ-साथ चुनाव के मैदान में भी भीड़ रही हैं. यह मुकाबला चल रहा है अमेठी में जहां कांग्रेस के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की दोनों पत्नियां मैदान में हैं. 

संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है जबकि उसी सीट पर उनकी सौतन अमिता सिंह चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर चुकी हैं. अमिता सिंह ने कहा है कि अगर उन्हें कांग्रेस पार्टी से टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरेंगी. गरिमा और अमिता एक ही राजमहल में रहती हैं और संजय सिंह की प्रॉपर्टी को लेकर दोनों में विवाद भी हमेशा से रहा है. 

इसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश में देवरिया सदर सीट से पूर्व एमएलसी जय प्रकाश जायसवाल समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं. मगर इसी सीट पर उनकी पत्नी कृष्णा जायसवाल भी चुनाव लड़ने का मन बना चुकी हैं. डॉ कृष्णा भाजपा से टिकट मांग रही थीं लेकिन निराशा हाथ लगने पर उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल का दामन थाम लिया है. 

फिरोजाबाद की जसराना सीट से अखिलेश यादव ने सपा विधायक रामवीर सिंह यादव का टिकट काट दिया था तो उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल से पर्चा भर दिया. मगर रामवीर के ख़िलाफ़ उनके बेटे अमोल यादव ही चुनावी मैदान में उतर गए हैं. 

आगरा में इस तरह के कई दिलचस्प किस्से देखने को मिल रहे हैं. यहां आगरा साउथ से भाजपा प्रत्याशी योगेंद्र उपाध्याय के खिलाफ उनकी पत्नी प्रीति उपाध्याय चुनावी मैदान में हैं. बाह विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी मधुसूदन शर्मा की पत्नी मंजू मधुसूदन भी चुनावी रथ पर सवार हो गई हैं. इसी सीट से वर्तमान विधायक राजा अरिदमन सिंह ने अपनी पत्नी पक्षालिका सिंह के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया था लेकिन अंतिम समय में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया. 

मुलायम परिवार का घमासान

सवाल सिर्फ छोटे-मोटे उम्मीदवारों का नहीं है. पार्टी के नए मुखिया और सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी चार महीने तक अपने पिता और चाचा से घमासान कर चुके हैं. 

सीएम अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल बेशक अभी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन चुनाव के बाद नई पार्टी बनाने का ऐलान कर चुके हैं. 

हाल ही में मुलायम सिंह यादव अपनी ही पार्टी द्वारा समर्थित कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को हराने के लिए अपने समर्थकों को चुनाव मैदान में उतरने का हुक्म भी दिया था. बहरहाल, चुनाव का नतीजा जो भी हो राजनीति, आपसी रिश्तों को कैसे प्रभावित करती है, यूपी चुनाव में यह बखूबी दिख रहा है. 

माथा पकड़ रो रहे लिकरकिंग

इस बार के विधानसभा चुनाव में देवरिया सदर विधानसभा सीट से पूर्व एमएलसी जय प्रकाश जायसवाल, समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में है. लिकरकिंग के तौर पर पहचान रखने वाले जय प्रकाश जायसवाल के लिए मुसीबत यह है कि उनके खिलाफ चुनाव मैदान में उनकी पत्नी डॉ कृष्णा जायसवाल कूद पड़ी है.

गौरतलब है कि डॉ कृष्णा जायसवाल भाजपा भाजपा से टिकट मांग रही थी लेकिन टिकट न मिलने के बाद उन्होंने अब राष्ट्रीय लोक दल का दामन थाम लिया है.

राजा संजय सिंह की बीवियों का झगडा अमेठी में

ऐसा ही एक बड़ा दिलचस्प मुकाबला अमेठी सीट से देखने को मिलेगा जहां भाजपा ने कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद राजा संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह को उम्मीदवार बनाया है तो उनके सामने दूसरी पत्नी अमिता सिंह चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर चुकी हैं.

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने गठबंधन से पहले गायत्री प्रजापति को अमेठी सीट से टिकट दे दिया है लेकिन अमिता सिंह ने ऐलान कर दिया है कि अगर उन्हें कांग्रेस पार्टी से टिकट नहीं मिला तो वो इस सीट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरेंगी. गौरतलब है कि एक ही राजमहल में रह रही गरिमा और अमिता के बीच संजय सिंह की संपत्ति को लेकर गहरा विवाद चल रहा है.

First published: 3 February 2017, 8:40 IST
 
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