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एग़्जिट पोल: उत्तर प्रदेश में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभर रही है

सादिक़ नक़वी | Updated on: 10 March 2017, 7:48 IST

मतदान के एक दिन बाद समाचार चैनलों ने पांच राज्यों का एग्ज़िट पोल जारी कर दिया है. 11 मार्च को आने वाले नतीजों से ठीक पहले जारी इन पोल में भी स्थिति साफ नहीं हो पाई है कि उत्तर प्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी. हालांकि सभी एग्ज़िट पोल में एक समानता ज़रूर है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी. वहीं सत्ता की मज़बूत दावेदार मानी जा रही बहुजन समाज पार्टी के लिए कमोबेश सभी एग्ज़िट निराशाजनक रहे हैं. उन्हें किसी भी पोल में 100 सीटें भी नहीं दी गई हैं.

इंडिया न्यूज़-एमआरसी पोल, एबीपी न्यूज़-लोकनीति सर्वे और इंडिया टीवी-सीवोटर के सर्वे में हंग असेंबली का इशारा किया गया है. दूसरी तरफ इंडिया टुडे-माय एक्सिस पोल, द टाइम्स नाउ-वीएमआर पोल और न्यूज़24-टुडेज़ चाणक्या के सर्वे में कहा गया है कि भाजपा अपने दम पर उत्तर प्रदेश में सरकार बना लेगी.

भाजपा के लिए टुडेज़ चाणक्या ने जहां 285 सीटें जीतने का दावा किया गया है, वहीं इंडिया टुडे-माय एक्सिस पोल में यह संख्या 251-279 के बीच है. टाइम्स नाउ-वीएमआर सर्वे में कहा गया है कि भाजपा 190-210 सीटों पर जीत दर्ज कर रही है. सभी एग्ज़िट पोल का अगर औसत निकाला जाए तो भाजपा को 211 सीटें मिल रही हैं.

25 साल से उत्तर प्रदेश की राजनीति में मज़बूती से सक्रिय बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन एग्ज़िट पोल में बेहद निराशाजनक दिखाया गया है. तमाम एग्ज़िट पोल के मुताबिक उन्हें 100 सीटें भी मिलती नहीं दिख रही हैं. मायावती 2012 का उत्तर प्रदेश चुनाव समाजवादी पार्टी से हार चुकी हैं और 2014 के आम चुनाव में उनकी पार्टी का प्रदर्शन बेहद ख़राब रहा था. आम चुनाव में वह एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी थीं. अगर एग्ज़िट पोल के नतीजे उनकी पार्टी के लिए थोड़ा बहुत भी सही साबित होते हैं तो उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

क्या कहते हैं पोल

इंडिया न्यूज़-एमआरसी

भाजपा+ 185

सपा-कांग्रेस 120

बसपा 90

अन्य 8

टाइम्स नाउ-वीएमआर

भाजपा+ 190-210

सपा-कांग्रेस 110-130

बसपा 57-74

अन्य 8

एबीपी-लोकनीति

भाजपा+ 164-176

सपा-कांग्रेस 156-169

बसपा 60-72

अन्य 2-6

इंडिया टीवी-सीवोटर

भाजपा+ 155-167

सपा-कांग्रेस 135-147

बसपा 81-93

अन्य 8-20

इंडिया टुडे-माय एक्सिस

भाजपा+ 251-279

सपा-कांग्रेस 88-112

बसपा 28-42

अन्य 6-16

न्यूज़24-टुडेज़ चाणक्य

भाजपा+ 285 ± 18

सपा-कांग्रेस 88 ± 15

बसपा 27 ± 12

अन्य 3 ± 2

आंकड़ों में इतना फर्क़ क्यों?

सभी कंपनियों के सर्वे का सैंपल साइज़ महज़ कुछ हज़ार है जबकि उत्तर प्रदेश की आबादी 20 करोड़ है. आमतौर पर चुनावों के लिए होने वाले ज़्यादातर एग्ज़िट पोल मतगणना होने के बाद गलत साबित होते हैं. 2015 में बिहार और दिल्ली के विधानसभा चुनाव में एग्ज़िट पोल औंधे मुंह गिर गए थे. ज़्यादातर कंपनियां ये नहीं भांप पाई थीं कि बिहार में महागठबंधन और दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार बना रही है.

भाजपा के लिए जीत के मायने

भाजपा किसी भी कीमत पर उत्तर प्रदेश जीतना चाहती है. 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद से यह पार्टी यूपी की सत्ता से बेदख़ल है. फिलहाल भाजपा आंकड़ों के हिसाब से देश की सबसे बड़ी पार्टी है. यूपी की जीत राज्य सभा में भाजपा की राह आसान करेगी. हालांकि 2014 आम चुनाव में यूपी में भाजपा के प्रदर्शन के मुक़ाबले इन एग्ज़िट पोल में उसकी परफॉरमेंस को कम करके दिखाया गया है. तब भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने यूपी की 80 में से 73 सीटें जीत ली थीं.

यह बात सही है कि नरेंद्र मोदी और भाजपा के लिए 2014 जैसे हालात नहीं हैं. यूपी चुनाव के पहले चरण में यह साफ देखा गया कि जिन जाटों ने 2014 में नरेंद्र मोदी को वोट दिया था, वह नाराज़गी के लिए अजीत सिंह की पार्टी आरएलडी के लिए प्रचार कर रहे थे. नोटबंदी की वजह से भाजपा के सर्वाधिक विश्वसनीय बनिया वर्ग में भी पार्टी के लिए नाराज़गी देखी गई.

भाजपा अपने वोटरों की नाराज़गी की तपिश को साफ महसूस कर रही थी और इसीलिए नरेंद्र मोदी, उनकी कैबिनेट और पार्टी ने अंतिम दो चरणों में बेहतर परफॉरमेंस के लिए पूरी ताक़त झोंक दी. प्रधानमंत्री मोदी तीन दिन तक वाराणसी में टिके रहे और उनका मंत्रीमंडल काशी और आसपास के इलाक़ों में घूम-घूमकर प्रचार करता रहा. चुनाव प्रचार के अंतिम तीन दिनों में नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में रोड शो किया, लोगों से मिले और मंदिर में मत्था टेकने तक गए. इससे साफ पता चलता रहा था कि मोदी समेत पूरी भाजपा भीतर से कितनी बेचैन है.

First published: 10 March 2017, 7:48 IST
 
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