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भाईचारे की अद्धभुत मिशाल, शव यात्रा में एक साथ लगे 'राम नाम सत्य है' और 'अल्लाह हू अकबर' के नारे

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 March 2018, 15:17 IST

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक अनोखी शवयात्रा निकाली गई. इस दौरान अजब ही नजारा देखने को मिला. मामला मुरादाबाद जिले के कटघर थाने का है. इलाके में एक शख्स की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार को लेकर दो समुदाय के लोग जिद पर अड़ गए. कोई उसे चमन, तो कोई रिजवान बता रहा था. लेकिन दोनों परिवारों की समझदारी और स्थानीय पुलिस की सूझबूझ से मामला सुलझ गया.
 
दोनों समुदाय के लोगों ने मिलजुल कर युवक का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया. और ये घटना हिन्दू मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल बन गई. इस अंतिम संस्कार में 'राम नाम सत्य है’ के साथ-साथ ‘अल्ला हू अकबर’ के नारे लगाए गए. पहले हिन्दू रीति रिवाज से अर्थी उठाई गई, बाद में मृतक को शमशान में दफ्न किया गया.  

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दरअसल मामला यह है कि कटघर थाने के दास-सराय में रहने वाले राम किशन सैनी के परिवार ने दावा किया कि रिजवान उर्फ चमन उनका बेटा था. वह साल 2009 में घर से लापता हो गया था और मानसिक तौर पर अस्वस्थ था. साल 2014 में युवक सैनी परिवार को दास-सराय से करीब तीन किलोमीटर दूर ईदगाह  के पास मिला था. इसी बीच, असालतपुरा में रहने वाले सुभान अली के परिवार ने भी कहा कि वे भी बीते पांच सालों से उस विक्षिप्त युवक की देखभाल कर रहे थे और उन्होंने ही उसका नाम रिजवान रखा था।”

गांव में इसी मसले पर तब पंचायत की एक बैठक भी हुई थी. दोनों समुदाय के लोगों ने एक मां की ममता को समझा और फैसला किया कि रिजवान उर्फ चमन दोनों घर का बेटा है. दोनों परिवार युवक का ख्याल रखेंगें और वह जब चाहे दोनों घर पर रह सकता है. महीने के वह 15-15 दिन वह दोनों परिवारों के पास बारी-बारी से रहेगा. मिली जानकारी के मुताबिक, बीते तीन दिन से युवक हिंदू परिवार के साथ रह रहा था. इस दौरान बीमारी के चलते उसकी मौत हो गई.

 इसके बाद उसके अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी तभी इसकी खबर सुभान के परिवार को मिली जिस पर दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए. उन्होंने दावा किया कि शख्स को मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार दफनाया जाएगा. पुलिस को इसके बाद हस्तक्षेप करना पड़ा और दोनों परिवारों ने साझदारी दिखाई. दोनों समुदाय के लोगों ने मिल-जुल कर अंतिम संस्कार करने का फैसला किया. जिससे हिन्दू-मुस्लिम एकता की अजब मिसाल देखने को मिली.

First published: 23 March 2018, 15:17 IST
 
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