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चौथे चरण में भी अपराधियों का बोलबाला, 17 फ़ीसदी उम्मीदवार क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 February 2017, 8:05 IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए 23 फरवरी को होने वाली चौथे चरण की वोटिंग के लिए जो उम्मीदवार खड़े हुए हैं उनमें से 17 प्रतिशत आपराधिक रिकॉर्ड वाले हैं. एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म के एक विश्लेषण से यह बात सामने आई है. एडीआर के अनुसार इस चरण की 53 सीटों के लिए कुल 480 उम्मीदवार में से 200 उम्मीदवार इंडिपेंडेंट हैं, 87 उम्मीदवार गैर वर्गीकृत राजनीतिक दलों से हैं और शेष उम्मीदवार छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों और पांच राज्य स्तरीय दलों से हैं.

एडीआर के विश्लेषण के अनुसार इन सभी में आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक भाजपा के हैं. भाजपा ने इस दौर में 48 उम्मीदवार खड़े किए हैं जिनमें से 19 उम्मीदवार आपराधिक रिकॉर्ड रखते हैं. इसके बाद क्रमश: समाजवादी पार्टी, बसपा, आरएलडी और कांग्रेस के 13, 12, 9 और 8 उम्मीदवार आपराधिक रिकॉर्ड वाले हैं. 200 इंडिपेंडेंट उम्मीदवारों में से 24 के नाम आपराधिक रिकॉर्ड हैं.

भाजपा पहले नंबर पर

सिर्फ इतना ही नहीं, अगर आप गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों की बात करें, तो भाजपा यहां भी सबसे आगे खड़ी नजर आती है. भाजपा के 14 उम्मीदवारों के नाम जघन्य आपराधिक कृत्य दर्ज हैं. बसपा और सपा के 10 ऐसे उम्मीदवार हैं, आरएलडी के 8 और कांग्रेस के पांच ऐसे उम्मीदवार हैं. ऐसे इंडिपेंडेंट उम्मीदवारों की संख्या 19 है.

सभी उम्मीदवारों में से 7 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन पर हत्या का आरोप है और 18 के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा लंबित है. छह पर आरोप है कि उन्होंने महिला की गरिमा हनन करने के इरादे से आपराधिक बल का प्रयोग किया. वहीं 10 पर किडनैपिंग और फिरौती मांगने का आरोप है.

विश्लेषण यह भी बताता है कि जिन 53 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव हो रहे हैं उनमें से 21 रेड अलर्ट पर हैं, यानि वहां तीन या उससे अधिक आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार हैं.

बसपा उम्मीदवार सबसे अमीर

एडीआर ने इन उम्मीदवारों की आर्थिक हालात का विश्लेषण भी किया है. इसके अनुसार 189 उम्मीदवार ऐसे हैं जिन्होंने अपने नाम एक करोड़ से अधिक की संपत्ति शपथपत्र में घोषित की है. पार्टीवार ऐसे उम्मीदवारों की बात करें तो बसपा के 45 उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति 1 करोड़ से अधिक बताई है. भाजपा के 36, एसपी के 26, कांग्रेस के 17 और आरएलडी के 6 उम्मीदवारों ने अपनी संपत्ति 1 करोड़ से अधिक बताई है. इसके अलावा 25 करोड़पति उम्मीदवार निर्दलीय भी हैं. इस तरह चौथे चरण में उम्मीदवारों की औसतन सपत्ति 1.90 करोड़ है.

पार्टीवार औसत संपत्ति की बात करें तो सबसे अधिक संपन्न उम्मीदवार कांग्रेस में नजर आते हैं. कांग्रेस के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 5.18 करोड़ है. भाजपा और बसपा भी बहुत पीछे नहीं हैं. भाजपा के औसत उम्मीदवारों की संपत्ति 5.96 करोड़ है और बसपा के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 5.82 करोड़. सपा के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 4.29 करोड़ और आरएलडी के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 75.76 करोड़. फिर भी, केवल 11 उम्मीदवार ही ऐसे हैं जिन्होंने अपनी वार्षिक आय 50 लाख बताई है. रोचक यह है कि समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) के प्रतापगढ़ के उम्मीदवार ने शपथपत्र में अपनी संपत्ति जीरो दिखाई है.

कर्ज़दार उम्मीदवार

वहीं अगर कर्ज या देय अदायगी की बात करें तो भाजपा के सिद्धार्थनाथ सिंह नंबर एक पायदान पर हैं. सिंह का कुल कर्ज 9 करोड़ है और उन्होंने अपनी संपत्ति 22 करोड़ घोषित की है. 171 उम्मीदवारों ने अपने पैन का ब्योरा चुनाव आयोग को नहीं दिया है. जबकि 680 उम्मीदवारों में से 406 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग को अपने इनकम टैक्स रिकॉर्ड का विवरण ही नहीं दिया है, इसमें 28 करोड़पति उम्मीदवार भी शामिल हैं.

23 फरवरी को जिन जिलों में चुनाव होने जा रहे हैं उनमें से कुछ उत्तर प्रदेश के सबसे विपन्न जिले शामिल हैं विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र के. चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए जाने के बाद भी अधिकांश राजनीतिक दलों ने इस गरीबी से ग्रस्त क्षेत्र के विकास की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है. पार्टियों द्वारा पूर्ण रूप से नजरअंदाज किया गया यह क्षेत्र पिछले कुछ सालों से अकाल के कारण अभावग्रस्त है तो दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वच्छ जल, बिजली, स्वास्थ्य और सड़क की सुविधाओं से भी वंचित है.

2012 के चुनाव में एसपी के द्वारा क्लीन स्वीप किए जाने के बाद भी बुंदेलखंड में बसपा ही मुख्य ताकत बनकर उभरी थी और उसको 7 सीटें हासिल हुई थीं. लेकिन इस बार इस क्षेत्र में एसपी, बीएसपी और भाजपा में त्रिकोणीय मुकाबला है और डिमोनेटाइजेशन तथा सूखा राहत ही चुनाव के मुख्य मुद्दे हैं.

First published: 20 February 2017, 8:05 IST
 
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