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टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा में बग़ावत हुई तेज़

सुहास मुंशी | Updated on: 20 January 2017, 3:05 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)

उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी की अंदरूनी फूट को विरोधी पार्टियों की भुनाने की कोशिश के बाद भाजपा अंदरूनी संघर्ष और विद्रोह झेल रही है. पार्टी के सूत्रों ने कहा कि वरिष्ठ नेता टिकट बंटवारे से खुश नहीं हैं, और कुछ ने कठोर शब्दों में नाराजगी जताई है. कुछ ने इस्तीफा देने और दूसरी पार्टियों में शामिल होने तक की धमकी दी. राज्य और केंद्र के भाजपा नेताओं के बीच खाई बढ़ती जा रही है. 

पिछले महीने ही, यूपी भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी चलाने में केंद्रीय नेताओं की मनमानी पर गुस्सा जताया था. इस मोड़ पर, जब चुनाव नजदीक है, उनसे बिना सलाह नोटबंदी की घोषणा को लेकर भी वे बेहद नाराज थे. अन्य क्षेत्रों में भी पार्टी की गतिविधियों की वजह से यूपी भाजपा को नुकसान उठाना पड़ रहा है. 

ऊना में शारीरिक यातना की घटना से उनकी छवि ओबीसी और एससी के बीच खराब हुई है. उसके बाद भाजपा में काफी संख्या में ‘आउटसाइडर्स’ (विरोधी पार्टियों के नेता) के शामिल होने और भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं को कम अहमियत देने के कारण असंतोष था. 

ओबीसी उम्मीदवार ज़्यादा

अब उच्च जाति के हिंदु सदस्यों और पार्टी के समर्थकों के बीच असंतोष है. इसलिए क्योंकि सोमवार को घोषित 149 उम्मीदवारों की पहली सूची में टिकटों का काफी बड़ा भाग ओबीसी को दिया गया है. इस सूची में कई ‘आउटसाइडर्स’ को भी स्थान मिला है. बेहट, नकुड़, नहटौर, पलिया, पटियाली, तिलहड़ और धौरहरा से बसपा के मौजूदा विधायक ; गंगोह से मौजूदा कांग्रेस विधायक; और बरेली और बलदेव से आरएलडी विधायक. 

कम से कम दो कांग्रेस नेता, जो हाल ही में भाजपा में आए हैं, उनको भी पहली सूची में स्थान दिया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के प्रपौत्र संदीप को अतरौली से नामांकित किया गया है. इन सबने पार्टी के रैंक और फाइल को बेहद नाराज किया है. 

दूसरी लिस्ट पर भी नाराज़गी

असंतोष उम्मीदवारों की दूसरी सूची को लेकर भी है. यह सूची भाजपा के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने तैयार की है. यह मंगलवार को जारी होनी थी, पर भाजपा में इसकी वजह से पड़ रही दरार के कारण इसे रोक लिया गया.

पार्टी के अंदरूनी सूत्र ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने पार्टी के सदस्यों से बार-बार कहा है कि वे अपने परिवार के सदस्यों के लिए टिकट नहीं मांगें और ना ही उम्मीद करें. फिर भी पहली सूची में ऐसा है और ऐसा ही भविष्य में आने वाली सूचियों में होगा.’

पार्टी के राज्य अध्यक्ष केपी मौर्य सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उनकी सलाह के बिना टिकट देने पर असंतोष प्रकट किया है. 

कुछ जो हाल ही में पार्टी में आए हैं, कहा जा रहा है कि वे पार्टी से निकलने की सोच रहे हैं. दरअसल स्वामी प्रसाद मौर्य भी, जिन्हें पार्टी में आए लंबा समय नहीं हुआ है, वे भी विरोधी पार्टियों से बात कर रहे हैं.

ओबीसी नेता ओम प्रकाश राजभर, जिन्होंने भाजपा के साथ अपनी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विलय का ऐलान किया था, वे भी पार्टी से बाहर निकलने की सोच रहे हैं. अगर मौर्य और राजभर बाहर निकलते हैं, तो जिस तरह बसपा और सपा को पिछड़ी जातियों का समर्थन है, उसे तोडऩा भाजपा के लिए मुश्किल होगा. इसी तरह राजभर की गैरमौजूदगी में, पार्टी को राजभर के महत्वपूर्ण वोट क्षेत्र- पूर्वांचल, मऊ और देवरिया में नुकसान होगा.  

First published: 20 January 2017, 3:05 IST
 
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