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यूपी: सपा-कांग्रेस गठबंधन बेशक़ मगर साथ-साथ चुनाव प्रचार की संभावनाएं बहुत कम

सादिक़ नक़वी | Updated on: 27 January 2017, 8:19 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन हो चुका है. लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं को ज्यादा लाइमलाइट देने के मूड में नहीं दिख रहे. सपा के प्रचार अभियान के रणनीतिकारों का मानना है कि ‘अखिलेश ब्रांड’ अपने आप में ही इतना बड़ा है कि इसके नाम पर ही पर्याप्त संख्या में वोट आ जाएंगे. टीम अखिलेश के एक सदस्य ने कहा, 'गठबंधन के लिए भी हालांकि संयुक्त स्तर पर थोड़ा बहुत प्रचार किया जाएगा, पर ज्यादा नहीं.'

एक अन्य सपा नेता ने कहा, 'चूंकि यूपी एक बड़ा राज्य है, इसलिए दोनों पार्टियां 5-6 रैलियों में मंच साझा करेंगी.' वरिष्ठ सपा नेताओं ने इस बात की पुष्टि की कि सपा के कुछ नेता कांग्रेस के चिन्ह पर चुनाव लड़ेंगे. कैच ने पहले ही यह खबर दी थी. यह गठबंधन की ही एक शर्त के अनुसार है. अखिलेश के एक करीबी नेता ने बताया, यही वजह है कि मुख्यमंत्री कांग्रेस को 105 सीटें देने पर राजी हो गए. 

अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, देश के इस सबसे बड़े राज्य में लगभग सिमट चुकी कांग्रेस सपा नेतृत्व को इस बात पर राजी नहीं कर सकी कि उसके पास 100 सीटों पर लड़ने के लिए पर्याप्त संख्या में उम्मीदवार हैं. कांग्रेस सपा के कितने उम्मीदवार अपनी सीटों पर उतारेगी, यह तो तभी पता चलेगा जब वह अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करेगी.

सपा दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्टों से असमंजस में है, जिनमें कहा गया है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन संयुक्त चुनाव प्रचार में अखिलेश और राहुल गांधी को ‘यूपी के लड़के’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘बाहरी’ के रूप में प्रचारित करेगा. सपा के सूत्रों ने कहा, 'उन्हें इस प्रकार के प्रचार की योजना के बारे में नहीं बताया गया. ना ही वे इस प्रकार के किसी प्रचार की तैयारी कर रहे हैं.'

'काम बोलता है'

उनका मानना है कि सपा की पंच लाइन ‘काम बोलता है’ से ही पार्टी को बहुमत से अधिक सीटें मिल जाएंगी. अखिलेश टीम के एक मुख्य सदस्य ने कहा, ‘हमारे प्रचार के केंद्र में विकास का मुद्दा प्रमुख रहेगा. हमें इस तरह के संयुक्त प्रचार की जरूरत नहीं है, हमारे पास दिखाने के लिए हमारा काम है.’ 

सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह बताते हैं, ‘हमें कांग्रेस के प्रशांत किशोर की ओर से ऐसे किसी प्रस्ताव की जानकारी नहीं मिली है. हमारा प्रचार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा किए गए काम पर ही केंद्रित होगा.’ उदयवीर कहते हैं, ‘काम बोलता है’ नारा न केवल विकास कार्य के लिए है बल्कि अखिलेश द्वारा राजनीति में आम आदमी को अवसर देने को भी परिलक्षित करता है.'

वे कहते हैं अखिलेश ने साधारण पृष्ठभूमि वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को भी टिकट दिए हैं. उन्होंने पार्टी में बाहुबली और माफिया का प्रभाव भी खत्म कर दिया है. अब राजा भैया जैसे लोग सपा नेता के आस-पास नजर नहीं आते. उदयवीर ने कहा, 'अखिलेश ने पश्चिमी यूपी की थाना भवन सीट पर भाजपा के सुरेश राणा के सामने सपा से लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुधीर पंवार को टिकट दिया है. इसी प्रकार जहूराबाद से एक साइकिल मैकेनिक के बेटे महेंद्र चौहान को सपा टिकट दिया है.'

अखिलेश और उनकी टीम इस बात से खुश है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले मुख्तार अंसारी बसपा में शामिल हो गए हैं. अखिलेश ने अतीक अहमद जैसे विवादास्पद राजनेताओं को टिकट देने से इनकार कर दिया. अतीक अहमद का दामन आपराधिक रहा है और वे खुद कई बार अन्य अपराधियों का साथ देते देखे जा चुके हैं.

प्रशांत किशोर की भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने के लिए राहुल और अखिलेश को ‘यूपी के अपने लड़के’ के रूप में प्रचारित करने का आइडिया कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी टीम का था, जो यूपी, पंजाब व कुछ हद तक उत्तराखंड में कांग्रेस के प्रचार प्रबंधन का काम देख रहे हैं. सपा के साथ गठबंधन करवाने में किशोर की भूमिका अहम मानी जाती है. 

कैच ने जब उनसे सम्पर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने जवाब नहीं दिया. गठबंधन के बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि किशोर सपा-कांग्रेस के प्रचार की कमान संभालेंगे लेकिन सपा के अंदरूनी सूत्रों ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार कर दिया.

उन्होंने बताया अखिलेश पिछले एक साल से अधिक समय से चुनाव प्रचार की रणनीति बना रहे हैं और उनकी तीन-चार अलग-अलग टीमें विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही हैं. 

सपा के रणननीतिकारों में अखिलेश ने हार्वर्ड यूनिविर्सिटी के प्रोफेसर स्टीव जॉर्डिंग और सलाहकार अद्वैत विक्रम को शामिल किया है. प्रचार की रणनीति को साकार करने के लिए अखिलेश के पास एक पूर्णकालिक राजनीतिक टीम है. एक टीम फेसबुक और दूसरी ट्विटर पर पार्टी का प्रचार प्रबंधन कर रही है.

लखनऊ में पार्टी का प्रचार कार्य संभालने के लिए सपा ने वॉर रूम स्थापित किया है. इसे स्वयं अखिलेश के नेतृत्व में चलाया जा रहा है. अखिलेश के एक करीबी नेता ने वार रूम के कामकाज की शैली के बारे में कैच को बताया, 'जमीनी स्तर से आंकड़े इकठ्ठे करके हर स्थानीय नेता और उम्मीदवार तक पहुंचाया जा रहा है ताकि वे उसके हिसाब से अपनी रणनीति तय कर सकें.'

First published: 27 January 2017, 8:19 IST
 
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