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उत्तर प्रदेश: विरासत के रखवाले पांच बेटे और पांच बेटियां

महेंद्र प्रताप सिंह | Updated on: 26 January 2017, 7:30 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

यूं तो उत्तर प्रदेश के चुनाव में तमाम नेताओं की इज्जत दांव पर लगी है, लेकिन इनमें से 10 नाम ऐसे हैं जिन पर पूरे सूबे की आंख लगी है. ये 10 नेता अलग-अलग पार्टियों से हैं, युवा हैं. इनके साथ एक पारिवारिक विरासत जुड़ी हुई है. इसलिए इनकी जीत बहुत मायने रखती है.

इनमें से ज्यादातर अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं. लेकिन यदि इनमें से किसी की भी हार हुई तो पिता की सियासत पर सवाल खड़े होगें. परिवारवाद और वंशवाद का विरोध करने वाली पार्टियों की साख भी इन उम्मीदवारों के नाम से जुड़ी हुई है. इस सूची में दो मुख्यमंत्रियों के बेटे-पोते, कई मंत्रियों के बेटे और बेटी शामिल हैं.

पांच बेटियां

मृगांका सिंह, नीलिमा कटियार, अदिति सिंह, आराधना मिश्र और रीता बहुगुणा जोशी. इन पांच बेटियों में रीता और आराधना को छोडक़र बाकी तीनों नाम राजनीति के लिए भले ही नए हों. लेकिन, विरासत संभालने के लिए मैदान में उतरीं इन बेटियों का राजनीति में बड़ा नाम है.

1- आराधना मिश्रा

कांग्रेस के बड़े नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की राजनीतिक विरासत संभाल रही हैं उनकी विधायक बेटी आराधना मिश्रा उर्फ मोना मिश्रा. अभी वे प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से कांग्रेस की विधायक हैं.

राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद प्रमोद तिवारी ने यह सीट खाली की थी. उपचुनाव में आराधना इस सीट से कांग्रेस की विधायक बनीं. अब एक बार फिर कांग्रेस ने उन्हें इस सीट से उतारा है. मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट आराधना एक बड़े बिजनेस समूह का संचालन भी करती है.

2- मृगांका सिंह

मंत्री रह चुके हुकुम सिंह की बेटी हैं मृगांका सिंह. यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कैराना सीट से बीजेपी की उम्मीदवार हैं. कैराना से ही हुकुम सिंह भाजपा के सांसद हैं.

मृगांका ने दिल्ली से अपनी पढ़ाई लिखाई की है. इन्होंने उच्च शिक्षा विदेशी यूनिवर्सिटी से हासिल की है. विदेश से लौटकर शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय मृगांका फिलहाल एक नामी गिरामी स्कूल की संचालिका हैं. मृगांका अपने चुनाव प्रचार में कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा जोर शोर से उठा रही हैं.

3- नीलिमा कटियार

प्रेमलता कटियार भाजपा की कद्दावर महिला नेता रही हैं. प्रेमलता कल्याण सिंह से लेकर राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह के अलावा मायावती की सरकार में भी मंत्री रह चुकी हैं.

अब उनकी बेटी नीलिमा कटियार उनकी विरासत की संभालने के लिए चुनाव मैदान में हैं. भाजपा ने नीलिमा कटियार को कानपुर की कल्याणपुर विधानसभा सीट से टिकट दिया है. नीलिमा कटियार अपनी मां के साथ भाजपा में लंबे समय से सक्रिय हैं.

4- अदिति सिंह

रायबरेली सदर सीट से मौजूदा विधायक अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह राजनीति में नया चेहरा हैं. कान्वेंट एजूकेटेड अदिति पिता अखिलेश की विरासत संभालने के लिए चुनाव मैदान में उतर रही हैं. अदिति की पढ़ाई अमेरिका में हुई है.

भारत वापस लौटने के बाद उन्होंने पिता के साथ राजनीति में हिस्सा लेना शुरू किया. अदिति सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं. अदिति के पिता अखिलेश पांच बार से रायबरेली सदर सीट के विधायक रहे हैं.

फिलहाल अखिलेश सिंह कांग्रेस में हैं. अदिति सिंह, प्रियंका गांधी को अपना आदर्श मानती हैं. कांग्रेस ने अभी इन्हें अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है लेकिन जल्द ही इन्हें टिकट मिलने की संभावना है.

5- रीता बहुगुणा जोशी

लखनऊ कैंट से कांग्रेस विधायक रहीं रीता बहुगुणा जोशी अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुकी हैं. भाजपा ने इन्हें इसी सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुकी रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रहे हेमवतीनंदन बहुगुणा की बेटी हैं. रीता बहुगुणा जोशी का मुकाबला सपा उम्मीदवार अपर्णा यादव से होगा. अपर्णा यादव मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू हैं.

पांच बेटे

संदीप सिंह, पंकज सिंह, हर्षवर्धन वाजपेयी, अब्दुल्ला आज़म और उत्कृष्ट मौर्य. ये पांच नाम हैं जो 2017 के विधानसभा चुनावों में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न दलों से चुनाव मैदान में किस्मत आज़माने उतर रहे हैं.

नयी पीढ़ी के ये नेता कुछ बेहद मंझे हुए राजनीतिज्ञों के बेटे हैं जो केंद्र और राज्य की राजनीति में अपनी पहचान रखते हैं. सभी युवा नेता उच्च शिक्षित हैं. इनका जीतना इनकी पारिवारिक विरासत के लिए जरूरी है.

1- संदीप सिंह

अलीगढ़ की अतरौली विधानसभा से पहली बार चुनाव मैदान में उतरे हैं संदीप सिंह. करीब 26 साल के संदीप भाजपा प्रत्याशियों की लिस्ट में सबसे कम उम्र के प्रत्याशी हैं. 24 जून 1991 को जन्में संदीप के दादा कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और फिलहाल राजस्थान के राज्यपाल हैं. उनके पिता राजवीर सिंह भी सांसद हैं.

दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम और लीड्स यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट संदीप अपने दादा की विरासत को भुनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.

2- पंकज सिंह

भारतीय जनता पार्टी के नोएडा विधानसभा से उम्मीदवार पंकज सिंह पहली बार चुनाव मैदान में हैं. हालांकि वे राजनीति में 2002 से ही सक्रिय हैं. 2007 में इन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया था. 2010 में पंकज भाजपा के राष्ट्रीय सचिव बने.

भाजपा की राजनीति में जाना-पहचाना नाम होने के बावजूद पंकज सिंह को चुनाव मैदान में उतरने का मौका देर से मिला क्योंकि उनके पिता राजनाथ सिंह का राजनीतिक क़द उनके आड़े आ रहा था. इस बार पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है.

3- हर्षवर्धन वाजपेयी

कभी समाजवादी पार्टी में बहुत बड़ा नाम हुआ करती थीं रंजना बाजपेयी. उनके बेटे हैं हर्षवर्धन वाजपेयी. करीब 16 सालों से राजनीति में हैं. 2012 में इन्होंने बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और बसपा से चुनाव भी लड़े. लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया.

2014 में वाजपेयी ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया. लेकिन जून 2016 में ये भारतीय जनता पार्टी की शरण में चले गए. इलाहाबाद उत्तर सीट से भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया है. शेफील्ड यूनिवर्सिटी से साफ्टवेयर इंजीनियरिंग करने वाले हर्षवर्धन ने दिल्ली विश्वविद्यालय से भी पढ़ाई की है.

4- अब्दुल्ला आजम

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और मंत्री आजम खान के बेटे हैं अब्दुल्ला आज़म. समाजवादी पार्टी ने इन्हें रामपुर की स्वार टांडा विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया है.

पेशे से बिजनेसमैन अब्दुल्ला यूं तो पहली बार चुनाव मैदान में हैं लेकिन इन्हें चुनाव लड़ाने का अच्छा अनुभव रहा है. अपने पिता आजम खान का चुनाव प्रबंधन यही संभालते रहे हैं.

आजम के दो बेटों में छोटे अब्दुल्ला एम टेक हैं और जौहर विश्वविद्यालय के सीईओ हैं. ये महज 24 साल की उम्र में सीइओ बन गए थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा आजम खां पर चुनाव प्रचार से प्रतिबंधित करने पर अब्दुल्ला ने मोर्चा संभाला था.

5- उत्कृष्ट मौर्या

कभी बहुजन समाज पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के बेटे हैं उत्कृष्ट मौर्या. अपने इसी बेटे को राजनीति में स्थापित करने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्या ने टिकट न मिलने पर बसपा से बगावत कर दी थी और भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली.

अब भाजपा के टिकट से बाप-बेटे दोनों चुनाव मैदान में हैं. भाजपा ने उत्कृष्ट को रायबरेली सीट से मैदान में उतारा है. उत्कृष्ट मौर्या 2012 का चुनाव बहुजन समाज पार्टी से ऊंचाहार विधानसभा से लड़ चुके हैं. लेकिन इन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था.

First published: 26 January 2017, 7:30 IST
 
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