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राहुल गांधी के साथ आए वरुण गांधी, वेमुला, माल्या और किसानों पर की 'मन की बात'

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 February 2017, 10:51 IST
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वो गांधी परिवार से आते हैं, वो प्रियंका गांधी को मानते हैं, वो राहुल गांधी के रिश्ते में चचेरे भाई हैं, इंदिरा गांधी के चहेते पुत्र संजय गांधी के बेटे हैं, लेकिन वो बीजेपी सांसद भी हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं सुल्तानपुर के सांसद वरुण गांधी की, जो इन दिनों अपनी पार्टी से ख़ुश नज़र नहीं आ रहे हैं. 

सियासत में बहुत कुछ शब्दों के ज़रिए बयां कर दिया जाता है. यूपी में विधानसभा चुनाव के चार चरण का प्रचार पूरा हो चुका है, लेकिन बीजेपी के स्टार प्रचारक वरुण गांधी किसी रैली या जनसभा के मंच पर नज़र नहीं आ रहे. यूपी की सियासत से काफ़ी दूर मध्य प्रदेश के मालवा में वरुण छात्रों को संबोधित करते दिखे. इस बार वरुण बोले तो बहुत कुछ कह गए. कुछ उसी तरह जैसे उनके बड़े भाई राहुल गांधी अक्सर मोदी सरकार के खिलाफ रैलियों में कहते हैं.

हां वरुण का तेवर उतना तल्ख तो नहीं था, लेकिन नरम लहजों में ही सही वरुण ने अपने मन की बात कर डाली. दरअसल वरुण गांधी मंगलवार को इंदौर के विद्यासागर कॉलेज में लेक्चर दे रहे थे. इस दौरान वरुण ने उन सारे मुद्दों को छुआ, जो बीजेपी के लिए हाल के दिनों में मुश्किल का सबब बनते रहे हैं. इसमें हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी, विजय माल्या की फ़रारी और किसानों के क़र्ज़ जैसे मुद्दे शामिल हैं.  

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'रोहित के सुसाइड नोट पर रोना आया'

वरुण ने इंदौर के विद्यासागर कॉलेज में 'विचार नए भारत का' विषय पर लेक्चर दिया. वरुण ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, "पिछले साल हैदराबाद में दलित पीएचडी छात्र रोहित वेमुला ने अपनी जान दे दी. जब मैंने उसकी चिट्ठी पढ़ी, तो मुझे रोना आ गया. इस चिट्ठी में उसने कहा कि मैं अपनी जान इसलिए दे रहा हूं कि मैंने इस रूप में जन्म लेने का पाप किया है."

अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर वरुण ने कहा, "देश की आबादी में 17.18 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं, लेकिन इनमें से केवल चार फीसदी लोग उच्च शिक्षा हासिल कर पाते हैं. हमें इन समस्याओं को हल करना है."

कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना

वरुण ने क़र्ज वसूली में किसानों से ज़्यादती का आरोप लगाते हुए कहा, "देश के ज्यादातर किसान चंद हजार रुपये का कर्ज न चुका पाने के चलते जान दे देते हैं, जो किसान खुदकुशी करते हैं उन पर 40, 50 या 60 हज़ार का क़र्ज़ होता है, लेकिन विजय माल्या पर सैकड़ों करोड़ रुपये का कर्ज बकाया होने के बावजूद वह एक नोटिस मिलने पर देश छोड़कर भाग गया."

वरुण ने आगे कहा, "जिस मनमोहन का नाम माल्या के गारंटर के रूप में लिया गया वह देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं बल्कि पीलीभीत का किसान मनमोहन है."

वरुण ने साथ ही देश के बड़े औद्योगिक घरानों पर बकाया कर्ज माफ करने पर निशाना साधते हुए कहा कि अमीरों को रियायत दी जा रही है, जबकि गरीबों की थोड़ी सी संपत्ति को भी निचोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. वरुण के ये बोल अपने बड़े भाई राहुल गांधी जैसे हैं.

हाल में बीजेपी ने यूपी चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की पहली लिस्ट में वरुण को जगह नहीं दी थी. दूसरी लिस्ट में भी उन्हें आख़िरी नंबर पर रखा गया. माना जा रहा है कि बीजेपी नेतृत्व से नाराज़ वरुण ने चुनाव से दूरी बना ली है.

First published: 22 February 2017, 10:51 IST
 
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