Home » उत्तर प्रदेश चुनाव » Why Muslims and Dalits need to be scared of BJP. Mayawati lists the reasons at Ghazipur rally
 

दलितों और मुसलमानों को भाजपा से क्यों डरना चाहिए? मायावती ने गिनाई वजहें

भारत भूषण | Updated on: 2 March 2017, 9:32 IST

हो सकता है बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो अपने प्रतिद्वंद्वियों जितनी मंझी हुई वक्ता नहीं हों. वे अब भी लिखकर अपना भाषण पढ़ती हैं, बीच-बीच मेेें अटकती भी हैं. पर जानती हैं कि उन्हें अपने मतदाताओं को क्या कहना है. और मतदाताओं को भी उनकी हर बात पसंद है. गाजीपुर के लंका पब्लिक ग्राउंड में वे नाटकीयता से प्रवेश करती हैं- नीले रंग के समंदर के साथ. जी हां, नीले हेलीकॉप्टर में, जहां उनके समर्थक उनके सम्मान में खड़े हैं.

उनकी जन सभा के ठीक सामने बैठी दलित महिलाएं यह देखने में नाकाम नहीं होतीं कि उसके आगे बैठे पुरुष सार्वजनिक रूप से कितनी चापलूसी भरी मुद्रा में हैं. जब वे मंच पर आती हैं, दाढ़ी-मूंछ वाले सभी पुरुष उनके पैर छूते हैं. मायावती के ऑफ-व्हाइट सलवार सूट के आगे भले ही उन्होंने चिथड़े पहने हों, पर उनकी आंखों में गर्व है. उनके लिए प्रशंसा निश्चित रूप से उस वजह से है कि उन्होंने जाति के पिरामिड को उलटा है, यहां तक कि पितृसत्ता को भी, भले ही अस्थाई तौर पर.

मायावती अपने समर्थकों का हाथ हिला कर अभिवादन करती हैं और बिना ज्यादा भूमिका बांधे वह बसपा को वोट देने के लिए अपील करना शुरू करती हैं. वे यहां तीन घंटे देर से आई हैं और उनके पास चुनाव कैंपेन में गंवाने को बहुत कम समय है, जिसके नतीजे को लेकर सब अनुमान लगा रहे हैं. भीड़ भी घंटों चिल्लाने से बेसब्र है- ‘चलो चलें सरकार बनाएं, हाथी वाला बटन दबाएं’ और ‘बच्चा बच्चा भीम का, बसपा के टीम का’ (भीम मतलब भीमराव अंबेडकर).

बसपा नेता गाजीपुर के अपने सभी सात उम्मीदवारों के साथ अपने काम को तुरंत निपटाती हैं, जो उन्हें बड़े सम्मान और ध्यान से सुनते हैं. उन्होंने अपने संदेश को अपने भाषण में कई बार दोहराया है, ‘अर्थात’ कहकर बराबर समझाते हुए कि भाजपा और अन्य पार्टियों के शासन में दलित और मुसलमानों को कितना परेशान किया गया है.

अर्थात का सबसे बढिय़ा इस्तेमाल उनके भाषण के शुरुआत में था, जब उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बारे में कहा था. उन्होंने कहा, ‘भाजपा अध्यक्ष माननीय अमित शाहजी सबसे बड़े कसाब हैं-अर्थात आतंकवादी हैं.’ गाजीपुर के लोगों के लिए उनका संदेश एकदम साफ था. गाजीपुर मुख्तार अंसारी का गृह क्षेत्र है, जो जेल में हैं और उन्होंने अपनी पार्टी का विलय बसपा के साथ शामिल कर लिया है.

पांच वजहें

उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से इनकार करते हुए कहा, ‘दागी चेहरे के साथ गठबंधन को वोट करने की सोचें भी नहीं.’ वे कहती हैं, 'नरेंद्र मोदी और उनके वादों पर यकीन नहीं करें. उन्होंने चुनाव के समय किए दो वादे अब तक पूरे नहीं किए हैं. फिर भी यदि वे कहते हैं कि मैं यूपी का दत्तक पुत्र हूं, तो उन्हें कहें कि यूपी ने उनकी जगह अपनी बेटियों को चुनना तय किया है.’

1- इसके बाद मायावती बड़ी शांति से चेताती हैं कि मुसलमानों के वोट नहीं बंटने दें और बसपा के लिए दलितों की तरह वोट करें. ‘गाजीपुर के मुसलमान, जो समाजवादी पार्टी को वोट देते हैं, इस बार वोट देकर भाजपा की मदद करेंगे, सपा की नहीं. सपा के दो टुकड़े हो गए हैं और वे एक दूसरे को हराने की कोशिश कर रहे हैं. वे जीत के लिए काम नहीं कर रहे हैं. अर्थात भाजपा को हावी नहीं होने दें.’

2- उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आरएसएस के एजेंडे को मान रही है, ताकि दलितों को आरक्षण नहीं मिले या कम मिले, अर्थात ‘यदि भाजपा गलती से भी सत्ता में आ जाती है, तो वह एससी/एसटी के लिए आरक्षण खत्म कर देगी या बेअसर कर देगी.’

3- उन्होंने कहा कि भाजपा वाले राज्यों में, सरकार सरकारी काम प्राइवेट सेक्टर से करवा रही है, जिसमें एससी/ एसटी के लिए कोई आरक्षण नहीं है. अर्थात, ‘सरकार में एससी/एसटी के लिए आरक्षण का क्वांटम कम हो जाएगा क्योंकि सरकारी नौकरियां कम हो जाएंगी.’

4- यूपी में यदि बसपा चुनी जाती है, तो वह कम आय वाले अल्पसंख्यकों और उच्च जाति के लिए आरक्षण के प्रयास करेगी. अर्थात, यूपी में बसपा सरकार हुई तो उच्च जातियों और मुसलमानों में गरीब की स्थिति बेहतर रहेगी.

5- उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठी भाजपा सरकार का अल्पसंख्यकों को लेकर सौतेला व्यवहार साफ दिखता है. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक दर्जे को लेने की कोशिश का उदाहरण दिया. उन्होंने यूनिफार्म सिविल कोड लाने और तीन तलाक के मुद्दे को हटाने की मांग की. गाय बचाने के नाम पर, लव जेहाद, अल्पसंख्यक समुदाय को आतंकवाद से जोडक़र और सच्चर कमीशन की सिफारिशों की उपेक्षा करके सार्वजनिक माहौल को बिगाड़ने की बात कही. अर्थात यदि आप मुसलमान हैं, तो भाजपा से उम्मीद नहीं करें कि वे आपके लिए कुछ अच्छा करेंगे.

तालियों की गड़गड़ाहट

मायावती ने लोगों को याद दिलाया कि भाजपा पहले 6 साल शासन कर चुकी है और कुछ नहीं बदला. ‘अब वे दूध, दही और घी की नदियों की वादा करते हैं, पर उन्होंने यह 6 सालों में क्यों नहीं किया, जब वे सत्ता में थे ? भाजपा तब उत्तरप्रदेश को उत्तम प्रदेश क्यों नहीं बना सकी?’ और तालियां गूंज उठीं.

उन्होंने स्थानीय नेता मुख्तार अंसारी को ‘समाज सेवक’ बताकर उनका पक्ष लिया. उनका दावा था कि अन्य पार्टियां राजा भैया या रघुराज प्रताप सिंह (फिलहाल सपा में) जैसे डॉन को प्यार दे रही हैं, जिन्हें उन्होंने जेल भेजा था. अंसारी की वजह से उनके कई समर्थक बसपा में आए. वे नीले साफों में मायावती की सभा में थे.

मुसलमानों के अलावा, भीड़ दलितों की थी, जो मायावती को देखने-सुनने मीलों चलकर आए थे. गाजीपुर के करणपुर गांव के शिवपूजन व्यंग्य करते हैं, ‘मुझे बसपा को वोट देने पर क्या मिलेगा. शायद कुछ नहीं. पर बहनजी हमारी जाति की हैं और मैं उनके लिए जान दे सकता हूं.’

जिले के नौली गांव के एक अन्य दलित अंगद राम कहते हैं, ‘जब बसपा नहीं थी, तो हमें उच्च जाति की पार्टियों से कोई न्याय नहीं मिला. अब हमें सम्मान मिलता है और वोट देने के लिए हमारी अपनी पार्टी है.’

गाजीपुर के ओबीसी नंदलाल बिंद कहते हैं कि वे कांशीराम के साथ रहे हैं और शुरू से बसपा के साथ हैं. क्यों? ‘महात्मा फुले, बाबासाहब अंबेडकर और श्री नारायण गुरु के मानवता के सिद्धांत को फिर से स्थापित करने के लिए. मैंने कांशी राम पर भरोसा किया और मैं बहन मायावती पर भरोसा करता हूं. आप देखेंगे कि हम राज्य में नंबर वन पार्टी बनेंगे,’ अपनी पलकों को बिना झपकाए उसने भविष्यवाणी की. भविष्यवाणी जिसकी परख 11 मार्च को होगी.

तब तक यह कह सकते हैं कि चुनाव का बुखार तेजी से फैला हुआ है और गाजीपुर में सभी उसे लेकर बेसुध हैं.

First published: 2 March 2017, 8:00 IST
 
भारत भूषण @Bharatitis

Editor of Catch News, Bharat has been a hack for 25 years. He has been the founding Editor of Mail Today, Executive Editor of the Hindustan Times, Editor of The Telegraph in Delhi, Editor of the Express News Service, Washington Correspondent of the Indian Express and an Assistant Editor with The Times of India.

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