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इलाहाबाद हाईकोर्ट: शादीशुदा महिला का लिव-इन रिलेशन में रहना ग़ैरक़ानूनी

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 December 2016, 12:13 IST
(एजेंसी)

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि शादीशुदा महिला गैर पुरुष के साथ लिव इन रिलेशन में नहीं रह सकती है, यदि कोई भी महिला ऐसा करती है तो उसे किसी भी प्रकार का कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता है.

जस्टिस सुनीत कुमार ने यह आदेश मिर्जापुर की महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. लिव-इन रिलेशन में अविवाहित महिला तो रह सकती है, मगर विवाहित के लिए ऐसा करना अनैतिक और अवैध होगा.

बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ता महिला की शादी 30 मई 2016 को हुई थी. उसका कहना था कि शादी उसकी मर्जी के खिलाफ हुई है, जबकि वह पांच वर्षों से अपने प्रेमी के साथ लिव इन रिलेशन में रह रही है. दोनों पति-पत्नी की तरह रहते हैं, मगर परिवार वाले परेशान कर रहे हैं. कोर्ट इन्हें रोके.

इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी को ही सह संबंध बनाने की कानून में मान्यता है, यदि कोई दूसरा पुरुष किसी अन्य की पत्नी के साथ संबंध बनाता है, तो यह कानून की नजर में अपराध है.

इस मामले में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने इंद्रा शर्मा बनाम वीकेवी शर्मा के केस में स्पष्ट किया है कि शादीशुदा स्त्री पति के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष से संबंध नहीं बना सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्पष्ट फैसले में कहा है कि अविवाहित या तलाक शुदा स्त्री-पुरुष ही लिव-इन रिलेशन में रह सकते हैं.

ऐसा रिश्ता किसी भी समय समाप्त हो सकता है और इसे नैतिक नहीं कहा जा सकता है. कोर्ट शादीशुदा स्त्री के साथ लिव इन रिलेशन में रहने वाले व्यक्ति को कभी कानूनी संरक्षण नहीं प्रदान कर सकता है.

First published: 2 December 2016, 12:13 IST
 
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